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Bareilly News: हादसे में रोडवेज चालक की मौत के बाद चक्का जाम, 400 बसों का संचालन आठ घंटे रहा बंद

अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Thu, 11 Jun 2026 05:27 PM IST
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सार

बरेली में बृहस्पतिवार को आठ घंटे तक रोडवेज की 400 बसों का संचालन बंद रहा।शाहजहांपुर में हुए हादसे में चालक की मौत के बाद चालकों और परिचालकों ने हड़ताल कर दी थी। अफसरों के समझाने पर चालक-परिचालक शांत हुए। इसके बाद दोपहर दो बजे से बसों का संचालन शुरू हुआ। 

Roadways Bus operations remained suspended for eight hours following the death of driver in Bareilly
बरेली के सेटेलाइट बस अड्डे पर खड़ी बसें - फोटो : संवाद
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विस्तार

शाहजहांपुर के तिलहर में बुधवार रात हुए हादसे में रोडवेज चालक की मौत के बाद रुहेलखंड व बरेली डिपो के चालकों व परिचालकों ने हड़ताल कर दी। इस दौरान आठ घंटे तक रोडवेज की 400 बसों के पहिए थम गए। उनका आरोप था कि हादसे के समय किसी उच्चाधिकारी का मौके पर फोन नहीं उठा, जिससे साथी की मौत हो गई। घटना का कारण चालक को लगातार बस चलाने से आई झपकी को बताया गया। दोपहर में आरएम व एआरएम के समझाने के बाद कर्मचारी काम पर लौटे तब जाकर बसों का संचालन शुरू हो सका। बस संचालन बंद होने से रोडवेज को करीब आठ लाख रुपये का नुकसान हुआ है।



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ट्रक से टकराई थी बस 
बरेली जिले के नवाबगंज तहसील के हाफिजगंज थाना क्षेत्र के बीसी रम्पुरा निवासी प्रमोद (30 वर्ष) रोडवेज में एक साल से संविदा चालक की नौकरी कर रहे थे। वह बुधवार की शाम बरेली से लखनऊ के लिए रोडवेज बस लेकर निकले। वापसी के समय शाहजहांपुर के तिलहर में बुधवार रात करीब तीन बजे चालक को झपकी आने से बस आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। बताया गया कि ट्रक चालक ने अचानक ब्रेक मार दिए थे। बस की गति अधिक होने के कारण चालक घायल हो गया। घटना के बाद यात्रियों व परिचालक ने 108 एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन गाड़ी नहीं पहुंची। तभी उधर से गुजर रहे दूसरे रोडवेज चालक ने अपनी बस से चालक प्रमोद को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तिलहर पहुंचाया। जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। 
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तुरंत उपचार मिलती तो शायद बच जाती जान 
चालकों व परिचालकों का आरोप है घटना के समय किसी उच्चाधिकारियों का फोन नहीं उठा, तुरंत उपचार मिलता तो शायद प्रमोद की मौत न होती। साथी की मौत की सूचना मिलते ही बरेली के सेटेलाइट व पुराने बस अड्डे पर बरेली व रुहेलखंड डिपो की सभी बसों के चालक व परिचालक हड़ताल पर चले गए। जब सुबह सात बजे मामले की जानकारी एआरएम एके वाजपेयी हो हुई तो वह हड़ताल को समाप्त करने गए लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। वहीं घटना के बाद चालक के पिता शिशुपाल भी शाहजहांपुर में मौके पर पहुंचे थे, जहां शव के पोस्टमॉर्टम के बाद चालकों व परिचालकों के बुलावे पर करीब 10 बजे सेटेलाइट बस अड्डे पर चले आए। 

दो बजे शुरू हो सका बसों का संचालन 
वजह कि यहां पर चालक, परिचालक उनकी मृतक की पत्नी को नौकरी, एक करोड़ मुआवजे की मांग पर अड़े थे। बेटे की मौत से परिवार का चिराग बुझ गया। पिता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। वह बार-बार कह रहे थे कि मेरा इकलौता बेटा था, वह भी अब नहीं रहा। दोपहर 12:30 बजे जब पुन: एआरएम एके वाजपेयी आए, वह अपने साथ मृतक के पिता शिशुपाल व चालकों, परिचालकों को अपने साथ सेटेलाइट बस स्टेशन पर लेकर गए। वहां बातचीत के बाद मामला खत्म किया। जिसके बाद दो बजे से बसों का संचालन शुरू हो सका।

आठ घंटे की ड्यूटी के बाद नहीं दिया गया आराम
साथी चालक सतीश यादव ने बताया कि लंबी दूरी के बसों पर दो चालक लगाए जाते हैं, जब एक थक जाता है तो दूसरा चलाता है। जबकि यहां पर चालक से लगातार ड्यूटी कराई गई। पहले उसको दिल्ली भेजा गया, वहां से लौटने पर उत्तराखंड टनकपुर भेजा गया। फिर वहां से आने के बाद लखनऊ भेज गया। लगातार 1300 किमी दूरी तय करने के कारण नींद न पूरी होने के कारण यह हादसा हुआ है। इसके लिए उच्चाधिकारी जिम्मेदार हैं, जो हमेशा नौकरी से बाहर निकालने का दबाव बनाते रहते हैं।

पिता को मौके पर दी 70 हजार की आर्थिक सहायता 
बातचीत के दौरान पिता शिशुपाल को परिवहन निगम की तरफ से अंतिम संस्कार के लिए 20 हजार रुपये, यात्री सुविधा के तहत हादसे में मृतकों को दिए जाने वाले 7.50 लाख रुपये में से 50 हजार रुपये की मदद की। बाकी शेष धनराशि वारिसान का प्रमाणपत्र लाने पर आश्रितों को दी जाएगी। मृतक के पीछे उसकी पत्नी रेखा (28) व छह माह का बच्चा लल्ला है।

रुहेलखंड डिपो के एआरएम एके वाजपेयी ने बताया कि बसों का संचालन न होने के पीछे दो-चार अराजक कर्मचारियों का हाथ था। उन्होंने अपनी बसों को सड़क पर आगे लगाकर खड़का कर दिया, जिससे पीछे के वाहन नहीं निकल सके। मृतक के पिता को 70 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। आगे वारिसान का प्रमाणपत्र मिलने पर धनराशि दी जाएगी।

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