UP News: बदायूं में पुलिस ने दिखाई मुठभेड़... आरोपी 62 किमी दूर बरेली में था, एसपी अंशिका वर्मा करेंगी जांच
बदायूं के कुंवरगांव थाना प्रभारी राजेश कौशिक ने मुठभेड़ में खेल कर दिया। उन्होंने अपने क्षेत्र में जिस आरोपी से मुठभेड़ दिखाई, वह घटना के वक्त 62 किमी दूर बरेली में मौजूद था। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर डीआईजी ने इस मामले की जांच बरेली की एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा को सौंपी है।
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बदायूं के कुंवरगांव थाना प्रभारी राजेश कौशिक 62 किमी दूर बरेली में मौजूद आरोपी से कागजों पर मुठभेड़ दिखाकर फंस गए हैं। पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) ने उनकी भूमिका और घटना की सत्यता की जांच बरेली की पुलिस अधीक्षक (एसपी) दक्षिणी अंशिका वर्मा को सौंपी है।
सिपाही से रैंकर थानेदार बने राजेश कौशिक ने नवंबर में कुंवरगांव थाने का प्रभार लिया तो वहां पशु तस्करी की घटना हो गई। तब अधिकारियों ने दरोगा समेत दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। सूत्र बताते हैं कि खुलासे के दबाव में एसओ ने उन मुखबिरों पर भरोसा कर लिया जो विरोधी को फंसाने और अपनी कमाई से ज्यादा कुछ ध्यान नहीं देते हैं।
यही वजह रही जो कई दिनों से बरेली में मौजूद शिफ्ते रजा नाम के व्यक्ति से को आरोपी बनाकर उसी इलाके में मुठभेड़ दिखा दी गई। शिफ्ते व उसकी मां हबीबा बानो ने साक्ष्य देकर डीआईजी से शिकायत की तो प्राथमिक जांच में हकीकत सामने आने लगी।
बदायूं एसओजी ने भी झाड़ा पल्ला
डीआईजी के मना करने के बावजूद कुंवरगांव थाना प्रभारी (एसओ) ने स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) में अपने संबंध का फायदा उठाकर उन्हें दबिश देने भेज दिया। वहां कोई नहीं मिला तो एसओजी पड़ोसी फरीद (70) को उठा ले गई। मामला अधिकारियों की जानकारी में आया तो एसओजी फरीद को कोतवाली में छोड़कर चली गई। उनका वीडियो भी बनाया कि उनसे न कोई रुपया लिया गया, न ही परेशान किया गया। एसओजी ने फरीद को बताया कि कुंवरगांव एसओ के कहने पर ही वह शिब्ते के घर गए थे।
डीआईजी रेंज अजय कुमार साहनी ने बताया कि बदायूं में पशु तस्करी के मामलों में पुलिस की भूमिका को लेकर शिकायतें मिलती रहती हैं। पहले भी बरेली से एसपी दक्षिणी को भेजकर जांच कराई थी। यह जांच भी उन्हीं को सौंपी गई है। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।