युद्ध का असर: जरी की चमक पर बारूद की धुंध, 100 करोड़ का माल अटका; बरेली मंडल के छह लाख कारीगर प्रभावित
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची है। कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। बरेली मंडल का जरी जरदोजी कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सौ करोड़ रुपये का माल अटक गया है।
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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने बरेली मंडल के जरी-जरदोजी कारोबार को भी बड़ा झटका दिया है। करीब 100 करोड़ का माल एयरपोर्ट, गोदाम और फैक्टरियों में फंस गया है। एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से लगाए जाने वाले डेमरेज (विलंब शुल्क) से बचने के लिए कारोबारी माल को शिफ्ट करने में जुटे हैं। ईद और सहालग के बीच निर्यात रुकने से बरेली मंडल के करीब छह लाख कारीगर भी प्रभावित हुए हैं।
मंडल के बरेली, पीलीभीत, बदायूं, शाहजहांपुर जिलों में जरी-जरदोजी का बड़ा कारोबार है। अकेले बरेली में करीब छह लाख कारीगर हैं। यहां तैयार माल का पश्चिम एशिया के देशों ईरान, इराक, सउदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, लीबिया, कतर, ओमान, जार्डन, तुर्किये आदि में निर्यात होता है। पिछले साल ईद से पहले मंडल से करीब 125 करोड़ का माल इन देशों को भेजा गया था। इस साल युद्ध की वजह से 25-30 करोड़ का माल ही निर्यात हो पाया। जरी-जरदोजी कारोबारियों का कहना है कि इस बार भी अच्छे कारोबार की उम्मीद थी, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया को जाने वाली फ्लाइटें रोक दी गईं।
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एयरपोर्ट बंद कर दिए गए। जो माल दिल्ली एयरपोर्ट भेजा था, वह रुक गया। रोजाना आठ-दस हजार रुपये डेमरेज लगने लगा। इससे उनको माल या तो वापस मंगवाना पड़ा या फिर दिल्ली में गोदाम की व्यवस्था कर वहां रखवाना पड़ा। करीब 100 करोड़ का माल फंसा हुआ है। उपायुक्त उद्योग विकास यादव के मुताबिक, युद्ध के कारण जरी-जरदोजी कारोबार को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। जब तक हालात सामान्य नहीं होते और एयरपोर्ट नहीं खुलते, तब तक माल का निर्यात मुश्किल ही दिख रहा है।
ईरान, दुबई, तुर्किये में सबसे ज्यादा मांग
कारोबारियों के मुताबिक, जरी-जरदोजी से तैयार माल की सबसे ज्यादा मांग ईरान, दुबई, तुर्किये में है। इन देशों से ही आसपास के छोटे देशों के करीब 5,000 कारोबारी माल खरीदते हैं। ईद के बाद मुस्लिम समाज में शादियों का दौर शुरू हो जाएगा। यह ऐसे समय है जब जरी-जरदोजी की बिक्री सबसे ज्यादा होती है। जनवरी से ऑर्डर भी मिलने लगे थे, लेकिन जब माल भेजने का वक्त आया तभी युद्ध शुरू हो गया। ऐसे में कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ईद से पहले कारीगरों की जेब खाली
जरी-जरदोजी के कारीगर भी संकट में हैं। ईद का त्योहार सिर पर है, लेकिन हाथ में पैसे नहीं हैं। बरेली के फरीदपुर, बहेड़ी, रिछा, नवाबगंज आदि जगहों पर कारीगरों की अच्छी संख्या है। पूरा का पूरा परिवार इसी काम से जुड़ा है। निर्यात रुकने के कारण काम भी लगभग ठप हो चुका है। पहले से तैयार माल ही नहीं बिक रहा है। कारीगरों के सामने संकट है कि अबकी ईद कैसे मनाएं।
जरी-जरदोजी कारोबारी सुदीप राजगढ़िया ने बताया कि कई देशों को होने वाला निर्यात पूरी तरह ठप है। बरेली मंडल के कारोबारियों को करीब 100 करोड़ का नुकसान हुआ है। कारीगर भी परेशान हैं, क्योंकि त्योहार नजदीक है। इस बार बड़ा घाटा उठाना पड़ रहा है।
