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मेहनौना हत्याकांड : रखौना चौकी प्रभारी और बीट सिपाही निलंबित
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बस्ती। लालगंज क्षेत्र मेहनौना गांव में लक्ष्मण निषाद हत्याकांड के बाद एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने आरोपियों की धरपकड़ के निर्देश देने के साथ स्थानीय पुलिस के भूमिका की भी जांच शुरू करा दी थी। लालगंज थाने में हत्या की प्राथमिकी दर्ज होने के बाद दो आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए।
वहीं तीसरे दिन बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय चौकी इंचार्ज रखौना उप निरीक्षक बृजमोहन सिंह और बीट सिपाही अमरजीत यादव की लापरवाही सामने आने के बाद एसपी ने दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।
बता देें कि लालगंज थाना क्षेत्र के मेहनौना गांव में सोमवार की देर रात जमीन की रजिस्ट्री में गवाह बनने के विवाद में लक्ष्मण निषाद की पीटकर हत्या कर दी गई थी। घटना से आक्रोशित ग्रामीणोंं ने आरोपियों के घर पर हमला बोल दिया। आक्रोशित भीड़ ने बाइक व अन्य सामानों को क्षतिग्रस्त कर दिया था।
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पुलिस ने इस मामले में मृतक की पत्नी सुभावती देवी की तहरीर पर गांव निवासी सुधाकर पाल और सौरभ पाल एवं चार अज्ञात पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज की थी। मंगलवार को मृतक के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद परिजन अंतिम संस्कार से इनकार दिए थे।
घटना के तीसरे दिन बुधवार को मुख्य आरोपी सुधाकर पाल और सौरभ पाल की गिरफ्तारी के बाद परिजनों ने गांव के निकट मनोरमा तट पर शव का अंतिम संस्कार किया था। एसपी के निर्देश पर सीओ रुधौली कुलदीप यादव ने क्षेत्रीय चौकी पुलिस रखौना की भूमिका की जांच शुरू कर दी थी। पता चला कि हत्या से पहले भी दोनों पक्षों में विवाद होने का मामला चौकी पर पहुंचा था। उस वक्त चौकी पुलिस ने मामले में तत्परता नहीं दिखाई थी।
जांच में पता चला कि चौकी प्रभारी बृजमोहन सिंह ने विवाद/ मारपीट होने के बावजूद प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की थी। इसके अलावा बीट सिपाही अमरजीत यादव ने एप पर बीट सूचना तक अंकित नहीं की थी। लापरवाही सामने आने पर एसपी ने दोनों पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है। इनके विरुद्ध विभागीय जांच के भी निर्देश दिए गए हैं।
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वहीं तीसरे दिन बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय चौकी इंचार्ज रखौना उप निरीक्षक बृजमोहन सिंह और बीट सिपाही अमरजीत यादव की लापरवाही सामने आने के बाद एसपी ने दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं।
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बता देें कि लालगंज थाना क्षेत्र के मेहनौना गांव में सोमवार की देर रात जमीन की रजिस्ट्री में गवाह बनने के विवाद में लक्ष्मण निषाद की पीटकर हत्या कर दी गई थी। घटना से आक्रोशित ग्रामीणोंं ने आरोपियों के घर पर हमला बोल दिया। आक्रोशित भीड़ ने बाइक व अन्य सामानों को क्षतिग्रस्त कर दिया था।
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पुलिस ने इस मामले में मृतक की पत्नी सुभावती देवी की तहरीर पर गांव निवासी सुधाकर पाल और सौरभ पाल एवं चार अज्ञात पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज की थी। मंगलवार को मृतक के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद परिजन अंतिम संस्कार से इनकार दिए थे।
घटना के तीसरे दिन बुधवार को मुख्य आरोपी सुधाकर पाल और सौरभ पाल की गिरफ्तारी के बाद परिजनों ने गांव के निकट मनोरमा तट पर शव का अंतिम संस्कार किया था। एसपी के निर्देश पर सीओ रुधौली कुलदीप यादव ने क्षेत्रीय चौकी पुलिस रखौना की भूमिका की जांच शुरू कर दी थी। पता चला कि हत्या से पहले भी दोनों पक्षों में विवाद होने का मामला चौकी पर पहुंचा था। उस वक्त चौकी पुलिस ने मामले में तत्परता नहीं दिखाई थी।
जांच में पता चला कि चौकी प्रभारी बृजमोहन सिंह ने विवाद/ मारपीट होने के बावजूद प्रभावी निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की थी। इसके अलावा बीट सिपाही अमरजीत यादव ने एप पर बीट सूचना तक अंकित नहीं की थी। लापरवाही सामने आने पर एसपी ने दोनों पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है। इनके विरुद्ध विभागीय जांच के भी निर्देश दिए गए हैं।