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Basti News: शहर में अलम व ताबूत का निकाला जुलूस
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शहर में अलम व ताबूत के जुलूस में शामिल लोग स्रोत आयोजक
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बस्ती। इमाम हुसैन के बेटे हजरत अली अकबर की शहादत की याद में बृहस्पतिवार शाम शहर के गांधीनगर में अलम व ताबूत का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस इमामबाड़ा खुर्शेद मंजिला से निकाला गया, जो गांधीनगर मुख्य मार्ग से होता हुआ इमामबाड़ा शाबान मंजिल पहुंचा। यहां से निकलकर जुलूस स्टेट बैंक के पीछे हुसैनी मस्जिद के निकट इमामबाड़ा मुस्तफा हुसैन में समाप्त हुआ। इमामबाड़ा खुर्शेद मंजिला में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलान मोहम्मद हैदर खां ने कहा कि हजरत अली अकबर की शक्ल पैगम्बरे-इस्लाम हजरत मोहम्मद सल. से मिलती जुलती थी। यही कारण था कि इमाम हुसैन को जब अपने नाना मोहम्मद सल. की जियारत करनी होती थी तो वह अपने इस बेटे को देख लिया करते थे। कर्बला के मैदान में जब इमाम हुसैन के सभी साथी और घर के लोग शहीद हो चुके तो अंत में हजरत अली अकबर इमाम के पास आए और कहा कि मुझे भी अब शहीद होने की इजाजत दे दीजिए।
अली अकबर बहुत प्यासे थे, इसके बाद भी वह यजीदी पहलवानों पर भारी पड़ रहे थे। धोखे से हमला कर उन्हें घोड़े से गिरा दिया गया। सीने में भाले की नोंक टूट जाने से खून काफी बह रहा था, और अंत में अपने पिता की आगोश में 18 साल के इस नौजवान ने दम तोड़ दिया। सुहेल बस्तवी, सोनू, रफीक अहमद आदि ने नौहा व सलाम पेश किया।
मौलाना अली हसन, शबीब हैदर, हाजी अनवार काजमी, जीशान रिजवी, सफदर रजा, हसनैन रिजवी, जावेद, मोहम्मद, अरशद, जैन, अन्नू, साजिद, आसिफ, मीजान, तकी हैदर, मुन्ने, साजिद, शम्स आबिद, जर्रार हुसैन, मुर्तजा, हनी, कामरान, मानू, आमिर, अली अकबर, अस्करी आदि माैजूद रहे। संवाद
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अली अकबर बहुत प्यासे थे, इसके बाद भी वह यजीदी पहलवानों पर भारी पड़ रहे थे। धोखे से हमला कर उन्हें घोड़े से गिरा दिया गया। सीने में भाले की नोंक टूट जाने से खून काफी बह रहा था, और अंत में अपने पिता की आगोश में 18 साल के इस नौजवान ने दम तोड़ दिया। सुहेल बस्तवी, सोनू, रफीक अहमद आदि ने नौहा व सलाम पेश किया।
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मौलाना अली हसन, शबीब हैदर, हाजी अनवार काजमी, जीशान रिजवी, सफदर रजा, हसनैन रिजवी, जावेद, मोहम्मद, अरशद, जैन, अन्नू, साजिद, आसिफ, मीजान, तकी हैदर, मुन्ने, साजिद, शम्स आबिद, जर्रार हुसैन, मुर्तजा, हनी, कामरान, मानू, आमिर, अली अकबर, अस्करी आदि माैजूद रहे। संवाद
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