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Basti News: नए सत्र में पुरानी चुनौतियां...शिक्षकों की कमी तो कहीं किताबों का इंतजार
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हर्रैया। नए सत्र में परिषदीय विद्यालयाें के सामने अस्तित्व बचाने की एक बार फिर चुनौती खड़ी हो गई है। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के दावे कई स्कूलों में फेल नजर आ रहे हैं। अधिकांश स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था बेपटरी हो गई है।
निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 भी महज खानापूर्ति पूरी तक ही सिमट गई है। हर्रैया ब्लॉक क्षेत्र में संचालित 159 परिषदीय विद्यालयों में दो दर्जन स्कूलों में स्थायी प्रधानाध्यापक नहीं है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार ब्लॉक क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में बारह हजार बच्चे नामांकित है। इनके पठन-पाठन के लिए 450 शिक्षक तैनात है। मानक के अनुसार शिक्षकों की संख्या पर्याप्त है। लेकिन, इनकी तैनाती में विसंगतियों के चलते कई विद्यालय शिक्षकों की कमी का दंश झेल रहे हैं।
शिक्षकों के तैनाती के मामले में सर्वाधिक विसंगतियां उच्च प्राथमिक विद्यालयों में है। गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक विद्यालय में भाषा, सामाजिक विज्ञान और गणित/विज्ञान विषय के शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य है।
मगर जिम्मेदारों की मेहरबानी से शिक्षकों ने अपनी तैनाती सुविधानुसार मनचाहा स्कूलों में करवा ली है। जिससे अधिकांश विद्यालयों में एक-एक विषय के दो-दो शिक्षक तैनात हैं। इस वजह से दो दर्जन परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी हो गई है।
आरटीई एक्ट के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में 150 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 की संख्या पर प्रधानाध्यापक के तैनाती की अनिवार्यता है। पिछले 10 साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी शिक्षकों की पदोन्नति अटकी हुई है।
ब्लॉक क्षेत्र के 51 उच्च प्राथमिक विद्यालय में से मात्र चार विद्यालय गौहनिया, हरदिया, सरैया तिवारी, चोरखरी में ही स्थायी प्रधानाध्यापक तैनात है। शेष 47 उच्च प्राथमिक विद्यालय समेत 100 परिषदीय स्कूलों में स्थाई प्रधानाध्यापक नहीं है। जिससे प्रशासनिक कार्य समेत विद्यालय में अनुशासन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 भी महज खानापूर्ति पूरी तक ही सिमट गई है। हर्रैया ब्लॉक क्षेत्र में संचालित 159 परिषदीय विद्यालयों में दो दर्जन स्कूलों में स्थायी प्रधानाध्यापक नहीं है।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार ब्लॉक क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में बारह हजार बच्चे नामांकित है। इनके पठन-पाठन के लिए 450 शिक्षक तैनात है। मानक के अनुसार शिक्षकों की संख्या पर्याप्त है। लेकिन, इनकी तैनाती में विसंगतियों के चलते कई विद्यालय शिक्षकों की कमी का दंश झेल रहे हैं।
शिक्षकों के तैनाती के मामले में सर्वाधिक विसंगतियां उच्च प्राथमिक विद्यालयों में है। गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक विद्यालय में भाषा, सामाजिक विज्ञान और गणित/विज्ञान विषय के शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य है।
मगर जिम्मेदारों की मेहरबानी से शिक्षकों ने अपनी तैनाती सुविधानुसार मनचाहा स्कूलों में करवा ली है। जिससे अधिकांश विद्यालयों में एक-एक विषय के दो-दो शिक्षक तैनात हैं। इस वजह से दो दर्जन परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी हो गई है।
आरटीई एक्ट के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में 150 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 की संख्या पर प्रधानाध्यापक के तैनाती की अनिवार्यता है। पिछले 10 साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी शिक्षकों की पदोन्नति अटकी हुई है।
ब्लॉक क्षेत्र के 51 उच्च प्राथमिक विद्यालय में से मात्र चार विद्यालय गौहनिया, हरदिया, सरैया तिवारी, चोरखरी में ही स्थायी प्रधानाध्यापक तैनात है। शेष 47 उच्च प्राथमिक विद्यालय समेत 100 परिषदीय स्कूलों में स्थाई प्रधानाध्यापक नहीं है। जिससे प्रशासनिक कार्य समेत विद्यालय में अनुशासन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।