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Bhadohi News: न परमिट, न फिटनेस, स्कूली बच्चों को ढो रहे ऑटो-ई-रिक्शा
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ज्ञानपुर नगर में टोटो से स्कूल जाते बच्चे। संवाद
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ज्ञानपुर। गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने के बाद एक जुलाई से सभी विद्यालय खुल गए हैं। स्कूली बसों की जांच करने वाले परिवहन और यातायात विभाग की कार्रवाई ऑटो और ई-रिक्शा तक नहीं पहुंच रही है। इन वाहनों से बेरोकटोक बच्चों को विद्यालय लाया-ले जाया जा रहा है। चार से छह सीट वाले वाहनों में 10 से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है। जिले में 725 निजी एवं कॉन्वेंट विद्यालय संचालित हैं। इनमें 100 विद्यालयों के पास अपनी निजी बस या चार पहिया वाहन हैं। परिवहन विभाग में करीब 550 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। शुक्रवार को हमारी टीम ने गोपीगंज, नई बाजार और ज्ञानपुर के कुछ विद्यालयों के परिवहन व्यवस्था की पड़ताल की। गोपीगंज के ज्ञानपुर रोड के पास एक ऑटो में 10 बच्चों को बैठाया गया था, जबकि इसमें सिर्फ छह लोगों के बैठने का मानक है। ज्ञानपुर के दुर्गागंज मार्ग पर एक ई-रिक्शा में छह से सात बच्चे बैठे मिले। कई चालक सीटों के साथ अपने अगल-बगल भी बच्चों को बैठाए थे। इससे हादसे की आशंका है।
यातायात पुलिस की मौजूदगी में भी क्षमता से अधिक बच्चों को लेकर ऑटो और ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। जिले में 2100 ई-रिक्शा और 3500 ऑटो पंजीकृत हैं, जबकि सैकड़ों वाहन बिना पंजीकरण के भी संचालित हो रहे हैं।
फिटनेस फेल, फिर भी संचालन, वाहन हुए सीज
परिवहन विभाग ने बिना फिटनेस के स्कूली वाहन न चलाने का निर्देश दिया है, लेकिन स्कूल संचालक इसका पालन नहीं कर रहे हैं। एआरटीओ राम सिंह ने शुक्रवार को पाइनियर पब्लिक स्कूल, सर्रोई के एक वाहन को सीज किया। इसी तरह एसएनटी पब्लिक स्कूल, कोइरौना के दो, एमएलडी पब्लिक स्कूल, कांवल के एक और नंद किशोर पब्लिक स्कूल के दो वाहनों को भी सीज किया गया।
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पहले हुए हादसों में मौत के साथ बच्चे हुए थे घायल
सितंबर 2025 में मकनपुर के पास एक स्कूली वैन पलट गई थी, जिसमें 12 बच्चे घायल हो गए थे। उस वैन का परमिट दो वर्ष पहले ही समाप्त हो गया था। महराजगंज में करीब सात महीने पूर्व एक स्कूली वैन खेत में पलट गई थी, जिसमें तीन बच्चे घायल हो गए थे। उसका भी फिटनेस फेल था। औराई के कैयरमऊ गांव के पास रेलवे फाटक पर जुलाई 2016 की घटना में चालक की लापरवाही से नौ मासूम बच्चों की जान चली गई थी। 2019 में लखनों के पास आग लगने से तीन स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी।
42 वाहनों का पंजीयन किया था निलंबित
अप्रैल में नया शिक्षण सत्र शुरू होने के बाद फिटनेस फेल वाहनों पर कार्रवाई करते हुए करीब 42 वाहनों का पंजीयन निलंबित किया गया था। इसके बावजूद अब भी बिना फिटनेस वाले स्कूली वाहन बच्चों को ढो रहे हैं। इतना ही नहीं, बिना परमिट और बिना फिटनेस वाले ऑटो व ई-रिक्शा भी बच्चों को विद्यालय ले जाने और घर पहुंचाने में लगे हैं।
ऑटो और ई-रिक्शा में बैठाने के मानक
बड़े ऑटो : चालक के अलावा छह यात्रियों की अनुमति।
थ्री-सीटर ऑटो : चालक के अलावा तीन यात्रियों की अनुमति।
ई-रिक्शा: चालक के अलावा चार यात्रियों की अनुमति।
अभिभावक बोले
बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाने वाले वाहनों के खिलाफ नियमित जांच अभियान चलाया जाए। - मुकेश यादव, अभिभावक
ऑटो और ई-रिक्शा में बच्चों को मानक से अधिक बिठाया जाता है। कई बच्चे दरवाजे के आसपास लटके रहते हैं। स्कूल प्रबंधन को अभिभावकों से बात कर ऐसे वाहनों से बच्चों को न भेजने का आग्रह करना चाहिए। - मिलन मिश्रा, अभिभावक
स्कूली वाहनों की लगातार जांच की जा रही है। फिटनेस फेल होने पर 36 वाहनों का पंजीयन निलंबित किया गया था। ऑटो और ई-रिक्शा के खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को ऐसे वाहनों से न भेजें। इसके लिए लोगों को भी जागरूक किया जाएगा। - राम सिंह, एआरटीओ भदोही
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यातायात पुलिस की मौजूदगी में भी क्षमता से अधिक बच्चों को लेकर ऑटो और ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। जिले में 2100 ई-रिक्शा और 3500 ऑटो पंजीकृत हैं, जबकि सैकड़ों वाहन बिना पंजीकरण के भी संचालित हो रहे हैं।
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फिटनेस फेल, फिर भी संचालन, वाहन हुए सीज
परिवहन विभाग ने बिना फिटनेस के स्कूली वाहन न चलाने का निर्देश दिया है, लेकिन स्कूल संचालक इसका पालन नहीं कर रहे हैं। एआरटीओ राम सिंह ने शुक्रवार को पाइनियर पब्लिक स्कूल, सर्रोई के एक वाहन को सीज किया। इसी तरह एसएनटी पब्लिक स्कूल, कोइरौना के दो, एमएलडी पब्लिक स्कूल, कांवल के एक और नंद किशोर पब्लिक स्कूल के दो वाहनों को भी सीज किया गया।
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पहले हुए हादसों में मौत के साथ बच्चे हुए थे घायल
सितंबर 2025 में मकनपुर के पास एक स्कूली वैन पलट गई थी, जिसमें 12 बच्चे घायल हो गए थे। उस वैन का परमिट दो वर्ष पहले ही समाप्त हो गया था। महराजगंज में करीब सात महीने पूर्व एक स्कूली वैन खेत में पलट गई थी, जिसमें तीन बच्चे घायल हो गए थे। उसका भी फिटनेस फेल था। औराई के कैयरमऊ गांव के पास रेलवे फाटक पर जुलाई 2016 की घटना में चालक की लापरवाही से नौ मासूम बच्चों की जान चली गई थी। 2019 में लखनों के पास आग लगने से तीन स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी।
42 वाहनों का पंजीयन किया था निलंबित
अप्रैल में नया शिक्षण सत्र शुरू होने के बाद फिटनेस फेल वाहनों पर कार्रवाई करते हुए करीब 42 वाहनों का पंजीयन निलंबित किया गया था। इसके बावजूद अब भी बिना फिटनेस वाले स्कूली वाहन बच्चों को ढो रहे हैं। इतना ही नहीं, बिना परमिट और बिना फिटनेस वाले ऑटो व ई-रिक्शा भी बच्चों को विद्यालय ले जाने और घर पहुंचाने में लगे हैं।
ऑटो और ई-रिक्शा में बैठाने के मानक
बड़े ऑटो : चालक के अलावा छह यात्रियों की अनुमति।
थ्री-सीटर ऑटो : चालक के अलावा तीन यात्रियों की अनुमति।
ई-रिक्शा: चालक के अलावा चार यात्रियों की अनुमति।
अभिभावक बोले
बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाने वाले वाहनों के खिलाफ नियमित जांच अभियान चलाया जाए। - मुकेश यादव, अभिभावक
ऑटो और ई-रिक्शा में बच्चों को मानक से अधिक बिठाया जाता है। कई बच्चे दरवाजे के आसपास लटके रहते हैं। स्कूल प्रबंधन को अभिभावकों से बात कर ऐसे वाहनों से बच्चों को न भेजने का आग्रह करना चाहिए। - मिलन मिश्रा, अभिभावक
स्कूली वाहनों की लगातार जांच की जा रही है। फिटनेस फेल होने पर 36 वाहनों का पंजीयन निलंबित किया गया था। ऑटो और ई-रिक्शा के खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को ऐसे वाहनों से न भेजें। इसके लिए लोगों को भी जागरूक किया जाएगा। - राम सिंह, एआरटीओ भदोही