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Bhadohi News: खेत मजदूर यूनियन का कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन
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ज्ञानपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर लाए गए विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) बिल का विरोध किया। यूनियन ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। जिसमें नए कानून से ग्रामीण मजदूरों की आजीविका छिनने की आशंका व्यक्त की गई है। वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा को तत्कालीन यूपीए सरकार ने वामपंथी पार्टियों की पहल पर ग्रामीण खेत मजदूरों के हित में पारित किया था। यह योजना देश के करोड़ों ग्रामीण खेत मजदूरों को काम की संवैधानिक गारंटी प्रदान करती थी। मनरेगा में 90 प्रतिशत बजट केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत बजट राज्य सरकारें वहन करती थीं।
नए विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) एक्ट में केंद्र सरकार को 60 प्रतिशत और प्रांतीय सरकारों को 40 प्रतिशत बजट की व्यवस्था करनी होगी। यूनियन का आरोप है कि अधिकांश प्रांतीय सरकारें पहले से ही कर्ज में डूबी हैं, जिससे उनके लिए 40 प्रतिशत धन की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण होगा। यूनियन ने आशंका जताई है कि केंद्र सरकार भी अतिरिक्त धन उपलब्ध नहीं कराएगी। इसके अतिरिक्त, वीबी जी राम जी एक्ट में 60 प्रतिशत राशि कृषि क्षेत्र में देने का प्रावधान है, जबकि कृषि में पर्याप्त काम उपलब्ध नहीं है। संगठन ने खेत मजदूरों को पक्का आवास के लिए 15 डिसिमिल जमीन देने के साथ ही आवास के लिए पांच लाख रुपये देने, स्कूलों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों में पिछड़े, दलितों, आदिवासियों पर हो रहे भेदभाव पर रोक लगाने समेत 13 सूत्री मांगो का ज्ञापन सौंपा गया। इस मौके पर राजेंद्र प्रसाद कन्नौजिया, असगर अली, विजय, अमृत लाल मौर्य, उमाशंकर बिंद, जगनारायण सरोज, मुरारी कुमार, कमला प्रसाद आदि रहे।
नए विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) एक्ट में केंद्र सरकार को 60 प्रतिशत और प्रांतीय सरकारों को 40 प्रतिशत बजट की व्यवस्था करनी होगी। यूनियन का आरोप है कि अधिकांश प्रांतीय सरकारें पहले से ही कर्ज में डूबी हैं, जिससे उनके लिए 40 प्रतिशत धन की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण होगा। यूनियन ने आशंका जताई है कि केंद्र सरकार भी अतिरिक्त धन उपलब्ध नहीं कराएगी। इसके अतिरिक्त, वीबी जी राम जी एक्ट में 60 प्रतिशत राशि कृषि क्षेत्र में देने का प्रावधान है, जबकि कृषि में पर्याप्त काम उपलब्ध नहीं है। संगठन ने खेत मजदूरों को पक्का आवास के लिए 15 डिसिमिल जमीन देने के साथ ही आवास के लिए पांच लाख रुपये देने, स्कूलों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों में पिछड़े, दलितों, आदिवासियों पर हो रहे भेदभाव पर रोक लगाने समेत 13 सूत्री मांगो का ज्ञापन सौंपा गया। इस मौके पर राजेंद्र प्रसाद कन्नौजिया, असगर अली, विजय, अमृत लाल मौर्य, उमाशंकर बिंद, जगनारायण सरोज, मुरारी कुमार, कमला प्रसाद आदि रहे।
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