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Bhadohi News: रेलवे स्टेशनों की सुविधाएं पटरी से उतरीं, ट्रैक पर दाैड़ रहीं परेशानियां
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चौरी के परसीपुर रेलवे स्टेशन के पास छाया अंधेरा। संवाद
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ज्ञानपुर। जिले के चार प्रमुख रेलवे स्टेशनों से हर दिन करीब 30 हजार यात्री यात्रा करते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। परसीपुर स्टेशन पर बैठने की व्यवस्था नहीं है। सुरियावां में पेयजल संसाधन खराब हैं। ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन की टोटियां टूट गई हैं। वहीं, भदोही स्टेशन निर्माणाधीन होने के कारण यहां यात्रियों की दुश्वारियां बनी रहती हैं। स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधाओं का हाल यह है कि बैठने तक के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई स्टेशनों पर साफ-सफाई का अभाव है।
पेयजल संसाधन दुरुस्त नहीं होने के कारण यात्रियों को बोतलबंद पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी शाम के समय होती है, जब प्लेटफार्मों पर अंधेरा छा जाता है। ऐसे में स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों में अनहोनी का भय बना रहता है। ज्ञानपुर रोड स्टेशन: यहां हर दिन 19 ट्रेनों का स्टापेज होता है। यहां से करीब पांच से छह हजार यात्री यात्रा करते हैं। स्टेशन पर रात के समय अंधेरा छा सकता है। इसके अलावा साफ-सफाई की स्थिति खराब है। स्टेशन के आसपास की बाउंड्री ध्वस्त होने से अराजकतत्व सक्रिय रहते हैं। माधोसिंह स्टेशन : यहां छह पैसेंजर और दो एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव होता है। यहां से हर दिन करीब एक हजार लोग यात्रा करते हैं। कभी जंक्शन रहा यह स्टेशन आज विभिन्न दुश्वारियां झेल रहा है। यहां बैठने तक का इंतजाम नहीं है।
सुरियावां स्टेशन : पेयजल की व्यवस्था नहीं
यहां हर दिन 17 ट्रेनों का स्टापेज होता है। यहां प्रतिदिन छह हजार लोग यात्रा करते हैं। यहां लखनऊ से आने वाली कोई ट्रेन नहीं है। पेयजल संसाधन नहीं हैं। तीन हैंडपंप बंद पड़े हैं। यात्रियों के बैठने तक के इंतजाम नहीं हैं। यहां अवैध वेंडरों का बोलबाला है।
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परसीपुर स्टेशन : यहां हर दिन पांच एक्सप्रेस और दो पैसेंजर ट्रेनें रुकती हैं। यहां से करीब पांच हजार यात्री यात्रा करते हैं। स्टेशन के दो हैंडपंप खराब हैं, जिनमें एक चार साल से बंद पड़ा है। शाम के समय आधा प्लेटफार्म अंधेरे में डूब जाता है। स्टेशन पर बना सामुदायिक शौचालय भी बंद पड़ा हुआ है।
स्टेशन अधीक्षक से प्राप्त होने वाली शिकायतों को आगे बढ़ाया जाता है। उच्चाधिकारियों द्वारा उनका समाधान भी कराया जाता है। जो समस्याएं हैं, उन्हें धीरे-धीरे दुरुस्त कराया जा रहा है। - अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी
पेयजल संसाधन दुरुस्त नहीं होने के कारण यात्रियों को बोतलबंद पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी शाम के समय होती है, जब प्लेटफार्मों पर अंधेरा छा जाता है। ऐसे में स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों में अनहोनी का भय बना रहता है। ज्ञानपुर रोड स्टेशन: यहां हर दिन 19 ट्रेनों का स्टापेज होता है। यहां से करीब पांच से छह हजार यात्री यात्रा करते हैं। स्टेशन पर रात के समय अंधेरा छा सकता है। इसके अलावा साफ-सफाई की स्थिति खराब है। स्टेशन के आसपास की बाउंड्री ध्वस्त होने से अराजकतत्व सक्रिय रहते हैं। माधोसिंह स्टेशन : यहां छह पैसेंजर और दो एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव होता है। यहां से हर दिन करीब एक हजार लोग यात्रा करते हैं। कभी जंक्शन रहा यह स्टेशन आज विभिन्न दुश्वारियां झेल रहा है। यहां बैठने तक का इंतजाम नहीं है।
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सुरियावां स्टेशन : पेयजल की व्यवस्था नहीं
यहां हर दिन 17 ट्रेनों का स्टापेज होता है। यहां प्रतिदिन छह हजार लोग यात्रा करते हैं। यहां लखनऊ से आने वाली कोई ट्रेन नहीं है। पेयजल संसाधन नहीं हैं। तीन हैंडपंप बंद पड़े हैं। यात्रियों के बैठने तक के इंतजाम नहीं हैं। यहां अवैध वेंडरों का बोलबाला है।
परसीपुर स्टेशन : यहां हर दिन पांच एक्सप्रेस और दो पैसेंजर ट्रेनें रुकती हैं। यहां से करीब पांच हजार यात्री यात्रा करते हैं। स्टेशन के दो हैंडपंप खराब हैं, जिनमें एक चार साल से बंद पड़ा है। शाम के समय आधा प्लेटफार्म अंधेरे में डूब जाता है। स्टेशन पर बना सामुदायिक शौचालय भी बंद पड़ा हुआ है।
स्टेशन अधीक्षक से प्राप्त होने वाली शिकायतों को आगे बढ़ाया जाता है। उच्चाधिकारियों द्वारा उनका समाधान भी कराया जाता है। जो समस्याएं हैं, उन्हें धीरे-धीरे दुरुस्त कराया जा रहा है। - अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी