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Bijnor: दो दुपट्टों का फंदा बनाकर दसवीं की छात्रा ने की आत्महत्या, छोटे भाई से झगड़ा होने पर थी परेशान
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
Published by: Mohd Mustakim
Updated Tue, 12 May 2026 04:41 PM IST
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सार
बिजनौर के गांव हेमराज महावतपुर उर्फ गांवड़ी निवासी किशोरी के माता-पिता की मौत हो चुकी थी। वह अपने भाई के साथ ताऊ के पास रह रही थी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। छोटा भाई मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया।
सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
स्योहारा क्षेत्र के गांव हेमराज महावतपुर उर्फ गांवड़ी में मंगलवार तड़के दर्दनाक घटना सामने आई। कक्षा दस की 15 वर्षीय छात्रा ने घर के कमरे में दुपट्टे का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। सुबह परिजनों ने उसका शव पंखे से लटका देखा तो परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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गांव हेमराज महावतपुर उर्फ गांवड़ी निवासी किशोरी (15) कक्षा दस की छात्रा थी और अपने छोटे भाई व ताऊ के साथ रह रही थी। बताया जा रहा है कि सोमवार रात किसी बात को लेकर उसका अपने 12 वर्षीय छोटे भाई से विवाद हो गया था। इसके बाद परिवार के सभी लोग खाना खाकर सो गए।
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मंगलवार सुबह करीब छह बजे परिजनों ने देखा कि किशोरी अपने बिस्तर पर नहीं है। तलाश करने पर अंदर कमरे में उसका शव पंखे से लटका मिला। बताया गया कि किशोरी ने दो दुपट्टों को जोड़कर फंदा बनाया और पंखे के कुंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। परिजनों के अनुसार किशोरी की मां का करीब डेढ़ वर्ष पहले निधन हो गया था, जबकि पिता की मौत लगभग तीन वर्ष पूर्व हो चुकी थी। माता-पिता की मौत के बाद से दोनों भाई-बहन अपने ताऊ के संरक्षण में रह रहे थे।
वहीं उसका छोटा भाई मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा है। सूचना मिलने पर थाना स्योहारा पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।
आखिर मौत को क्यों चुन रहे हैं किशोर-किशोरियां?
वरिष्ठ महिला चिकित्सक डा. लिपिसेन वर्मा के अनुसार 14-15 वर्ष की उम्र में बच्चे भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील होते हैं और छोटी बातों को भी गहराई से महसूस करते हैं। सोशल मीडिया, मोबाइल और इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली नकारात्मक सामग्री का असर भी किशोर मन पर तेजी से पड़ रहा है। परिवारों में संवाद की कमी, अकेलापन, मानसिक तनाव और भावनात्मक सहारे का अभाव बच्चों को भीतर से कमजोर बना रहा है। कई बार बच्चे अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं कर पाते और गलत कदम उठा लेते हैं। उनका मानना है कि अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार, मानसिक स्थिति और भावनाओं को समझते हुए उनसे मित्रवत संवाद बनाए रखना चाहिए।
वरिष्ठ महिला चिकित्सक डा. लिपिसेन वर्मा के अनुसार 14-15 वर्ष की उम्र में बच्चे भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील होते हैं और छोटी बातों को भी गहराई से महसूस करते हैं। सोशल मीडिया, मोबाइल और इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली नकारात्मक सामग्री का असर भी किशोर मन पर तेजी से पड़ रहा है। परिवारों में संवाद की कमी, अकेलापन, मानसिक तनाव और भावनात्मक सहारे का अभाव बच्चों को भीतर से कमजोर बना रहा है। कई बार बच्चे अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं कर पाते और गलत कदम उठा लेते हैं। उनका मानना है कि अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार, मानसिक स्थिति और भावनाओं को समझते हुए उनसे मित्रवत संवाद बनाए रखना चाहिए।