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Bijnor News: कोरा कागज तो कहीं चार माह पुरानी रसीद कर दी अपलोड
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स्योहारा। ग्राम पंचायतों में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड किए गए दस्तावेजों की जांच में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत पाइन्दापुर के रिकॉर्ड देखने पर पता चला कि विभिन्न मदों में हुए लाखों रुपये के भुगतान के बावजूद पोर्टल पर सही बिल और रसीदें अपलोड ही नहीं की गईं।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज विवरणों के अनुसार ग्राम पंचायत पाइन्दापुर में 8 मई 2025 को पंचायत सहायक का अप्रैल तक छह माह का मानदेय 35,800 रुपये प्रीति रानी के खाते में ट्रांसफर किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस भुगतान के प्रमाण के तौर पर पोर्टल पर ग्राम पंचायत माहुपुरा की ग्राम प्रधान की चार माह पुरानी रसीद अपलोड की गई है, जो 14 फरवरी 2025 की है और सिर्फ पांच हजार रुपये की बताई गई है। यानि पंचायत सहायक के मानदेय के लिए प्रधान के मानदेय की पुरानी रसीद को ही दस्तावेज बना दिया गया।
इतना ही नहीं, शौचालय के केयर टेकर का 12 हजार रुपये का मानदेय शिव सेल्फ हेल्प ग्रुप के नाम पर दिखाया गया है, लेकिन पोर्टल पर इसके समर्थन में केवल कोरा कागज अपलोड कर दिया गया। इसी तरह प्रशासनिक व्यय के 18,500 रुपये, हैंडपंप मरम्मत के 14,400 रुपये और विभिन्न स्थानों पर नाली मरम्मत व निर्माण कार्य के 18,690 रुपये श्रीराम कॉन्ट्रैक्टर के नाम पर भुगतान दिखाया गया है, लेकिन इन सभी कार्यों में भी पोर्टल पर वही प्रधान की धुंधली रसीद लगा दी गई है, जिसका इन भुगतानों से कोई सीधा संबंध नहीं है। 11 जनवरी 2025 को नहर वाले रास्ते पर मिट्टी भराव के 19,890 रुपये और दवाई छिड़काव के 11,064 रुपये भी श्रीराम कॉन्ट्रैक्टर को दिए गए, जबकि पोर्टल पर बिल के नाम पर केवल खाली कागज ही अपलोड है।
सबसे चौंकाने वाला मामला पंचायतघर निर्माण का है, जहां 90 हजार रुपये का भुगतान हो चुका है, लेकिन उसके समर्थन में भी कोई वास्तविक बिल या रसीद पोर्टल पर मौजूद नहीं है, बल्कि वहां भी कोरा कागज लगा दिया गया है।
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ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज विवरणों के अनुसार ग्राम पंचायत पाइन्दापुर में 8 मई 2025 को पंचायत सहायक का अप्रैल तक छह माह का मानदेय 35,800 रुपये प्रीति रानी के खाते में ट्रांसफर किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस भुगतान के प्रमाण के तौर पर पोर्टल पर ग्राम पंचायत माहुपुरा की ग्राम प्रधान की चार माह पुरानी रसीद अपलोड की गई है, जो 14 फरवरी 2025 की है और सिर्फ पांच हजार रुपये की बताई गई है। यानि पंचायत सहायक के मानदेय के लिए प्रधान के मानदेय की पुरानी रसीद को ही दस्तावेज बना दिया गया।
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इतना ही नहीं, शौचालय के केयर टेकर का 12 हजार रुपये का मानदेय शिव सेल्फ हेल्प ग्रुप के नाम पर दिखाया गया है, लेकिन पोर्टल पर इसके समर्थन में केवल कोरा कागज अपलोड कर दिया गया। इसी तरह प्रशासनिक व्यय के 18,500 रुपये, हैंडपंप मरम्मत के 14,400 रुपये और विभिन्न स्थानों पर नाली मरम्मत व निर्माण कार्य के 18,690 रुपये श्रीराम कॉन्ट्रैक्टर के नाम पर भुगतान दिखाया गया है, लेकिन इन सभी कार्यों में भी पोर्टल पर वही प्रधान की धुंधली रसीद लगा दी गई है, जिसका इन भुगतानों से कोई सीधा संबंध नहीं है। 11 जनवरी 2025 को नहर वाले रास्ते पर मिट्टी भराव के 19,890 रुपये और दवाई छिड़काव के 11,064 रुपये भी श्रीराम कॉन्ट्रैक्टर को दिए गए, जबकि पोर्टल पर बिल के नाम पर केवल खाली कागज ही अपलोड है।
सबसे चौंकाने वाला मामला पंचायतघर निर्माण का है, जहां 90 हजार रुपये का भुगतान हो चुका है, लेकिन उसके समर्थन में भी कोई वास्तविक बिल या रसीद पोर्टल पर मौजूद नहीं है, बल्कि वहां भी कोरा कागज लगा दिया गया है।