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Bijnor News: गन्ने के बीच दलहन की खेती, जमीन के साथ सुधरेगी जेब की सेहत
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ब्रजवीर चौधरी
बिजनौर। गन्ना बेल्ट क्षेत्र में दलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए कृषि विभाग और गन्ना विभाग ने संयुक्त पहल शुरू की है। इसके तहत गन्ने के साथ सहफसली के रूप में उड़द व मूंग की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। लगातार गन्ना क्षेत्रफल बढ़ने और जंगली जानवरों की संख्या में इजाफा होने से जिले में दलहन फसलों का रकबा सिमटता जा रहा है, जिससे दालों के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
जनपद में दो लाख 55 हजार गन्ना क्षेत्रफल है। दूसरे नंबर पर गेहूं की फसल होती है। इसका रकबा सवा लाख के ईद-गिर्द रहता है। गन्ना नकदी फसल और उसमें नुकसान भी कम है। गन्ने की लंबी अवधि की फसल के कारण किसान दलहन की खेती से दूरी बना रहे थे। अब सहफसली प्रणाली अपनाकर गन्ने के साथ उड़द एवं मूंग की खेती कर किसान अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकेंगे। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार एक किसान को एक हेक्ट्रेयर क्षेत्रफल के लिए अधिकतम 20 किलोग्राम उर्द एवं 20 किलोग्राम मूंग का नि:शुल्क बीज दिया जाएगा। इससे न केवल दलहन उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी सुधरेगी।
-सहफसली खेती लाभकारी -पीएन सिंह
जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि सहफसली खेती किसान व जमीन दोनों के लिए लाभकारी है। कम लागत और उसी समय में किसान दो फसलों का उत्पादन कर लाभ कमाएंगे। फरवरी मार्च माह में ट्रैंच विधि से गन्ना बुवाई कराकर सहफसली खेती करने को प्रेरित किया जा रहा है। कुछ किसानों ने शरदकालीन गन्ना बुवाई में सहफसली के तौर पर चना, सरसो, आलू की खेती की जा रही है।
- कम समय में तैयार होती उड़द की फसल - जसवीर सिंह
जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने बताया कि उड़द कम समय में तैयार होने वाली फसल है और गन्ने की प्रारंभिक बढ़वार के दौरान खेत की खाली जगह का बेहतर उपयोग संभव बनाती है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को उड़द की किट निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इच्छुक किसानों को इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। पंजीकरण के बाद चयनित किसानों को प्रमाणित बीज, जैव उर्वरक और तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाएगा।
-पोषण सुरक्षा को मिलेगी मजबूती - उप कृषि निदेशक
उप कृषि निदेशक डॉ. धनश्याम वर्मा ने बताया कि दलहन फसलों के विस्तार से पोषण सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। गन्ना बेल्ट बिजनौर में यह प्रयोग सफल रहेगा। विभाग की ओर से अन्य दलहन फसलों को अकेले एवं सहफसली के रूप बुवाई कराकर रकबा बढ़वाया जाएगा।
दलहन की खेती से किसानों को फायदे
-मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, उर्वरता सुधरती है
-कम लागत में अतिरिक्त आय का साधन
-कम समय में तैयार होने वाली फसल
-दालों का घरेलू उत्पादन बढ़ने से बाजार निर्भरता घटेगी
-फसल विविधता से जोखिम कम होगा
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बिजनौर। गन्ना बेल्ट क्षेत्र में दलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए कृषि विभाग और गन्ना विभाग ने संयुक्त पहल शुरू की है। इसके तहत गन्ने के साथ सहफसली के रूप में उड़द व मूंग की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। लगातार गन्ना क्षेत्रफल बढ़ने और जंगली जानवरों की संख्या में इजाफा होने से जिले में दलहन फसलों का रकबा सिमटता जा रहा है, जिससे दालों के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
जनपद में दो लाख 55 हजार गन्ना क्षेत्रफल है। दूसरे नंबर पर गेहूं की फसल होती है। इसका रकबा सवा लाख के ईद-गिर्द रहता है। गन्ना नकदी फसल और उसमें नुकसान भी कम है। गन्ने की लंबी अवधि की फसल के कारण किसान दलहन की खेती से दूरी बना रहे थे। अब सहफसली प्रणाली अपनाकर गन्ने के साथ उड़द एवं मूंग की खेती कर किसान अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकेंगे। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार एक किसान को एक हेक्ट्रेयर क्षेत्रफल के लिए अधिकतम 20 किलोग्राम उर्द एवं 20 किलोग्राम मूंग का नि:शुल्क बीज दिया जाएगा। इससे न केवल दलहन उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी सुधरेगी।
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-सहफसली खेती लाभकारी -पीएन सिंह
जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि सहफसली खेती किसान व जमीन दोनों के लिए लाभकारी है। कम लागत और उसी समय में किसान दो फसलों का उत्पादन कर लाभ कमाएंगे। फरवरी मार्च माह में ट्रैंच विधि से गन्ना बुवाई कराकर सहफसली खेती करने को प्रेरित किया जा रहा है। कुछ किसानों ने शरदकालीन गन्ना बुवाई में सहफसली के तौर पर चना, सरसो, आलू की खेती की जा रही है।
- कम समय में तैयार होती उड़द की फसल - जसवीर सिंह
जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने बताया कि उड़द कम समय में तैयार होने वाली फसल है और गन्ने की प्रारंभिक बढ़वार के दौरान खेत की खाली जगह का बेहतर उपयोग संभव बनाती है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को उड़द की किट निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इच्छुक किसानों को इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। पंजीकरण के बाद चयनित किसानों को प्रमाणित बीज, जैव उर्वरक और तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाएगा।
-पोषण सुरक्षा को मिलेगी मजबूती - उप कृषि निदेशक
उप कृषि निदेशक डॉ. धनश्याम वर्मा ने बताया कि दलहन फसलों के विस्तार से पोषण सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। गन्ना बेल्ट बिजनौर में यह प्रयोग सफल रहेगा। विभाग की ओर से अन्य दलहन फसलों को अकेले एवं सहफसली के रूप बुवाई कराकर रकबा बढ़वाया जाएगा।
दलहन की खेती से किसानों को फायदे
-मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, उर्वरता सुधरती है
-कम लागत में अतिरिक्त आय का साधन
-कम समय में तैयार होने वाली फसल
-दालों का घरेलू उत्पादन बढ़ने से बाजार निर्भरता घटेगी
-फसल विविधता से जोखिम कम होगा
