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Bijnor News: पहले सत्ता फिर रसूख से लड़ी 18 साल तक जंग, नहीं हुई सुनवाई
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अचल चाैधरी बिजनौर। शेरकोट सहकारी आवास समिति में हुए जमीन घोटाला के नींव मोहम्मद गाजी के विधायक बनते ही रखी जाने लगी थी। 2008 में तालिब बंधुओं को जमीन बेची गई, इसके बाद जमीन बेचने का सिलसिला नहीं थमा। इसकी भनक लगते ही समिति के सदस्य शाहिद अली ने तमाम शिकायत कीं, लखनऊ तक भागदौड़ की मगर सत्ता और रसूख के चलते शिकायतों पर सुनवाई नहीं हो सकी। अब 18 साल के बाद यह मामला प्राथमिकी तक पहुंचा है।
1989 में 51 लोगों ने सहकारी आवास समिति बनाई। 1991 में इसका पंजीकरण करा लिया गया था। शुरुआत में इस समिति के पास करीब 25 बीघा जमीन हुआ करती थी। मगर धोखाधड़ी करते हुए समिति को भूमिहीन कर दिया गया। अब समिति के पास केवल आधा बीघा जमीन ही बची है।
मोहम्मद गाजी बसपा से 2007 में विधायक चुने गए थे। तभी इस समिति की जमीन पर उनकी नजरें टेढ़ी हो गई। मोहम्मद गाजी 2017 तक लगातार दो बार विधायक रहे। ऐसे में उनके खिलाफ जमीन की शिकायतें दम तोड़ती रहीं। अब पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह पर हमले के आरोप में तालिब बंधु घिरे और जेल चले गए। साथ ही पूर्व सांसद की शिकायत पर तालिब बंधु की जमीनों की जांच चल रही थी। सभी तहसीलों में बैनामों का रिकार्ड खंगाला जा रहा था। ऐसे में सहकारी समिति की जमीन का मामला भी सामने आ गया, जिसके चलते तालिब के समधि और पूर्व विधायक मोहम्मद गाजी भी इस लपेटे में आ गए।
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1989 में 51 लोगों ने सहकारी आवास समिति बनाई। 1991 में इसका पंजीकरण करा लिया गया था। शुरुआत में इस समिति के पास करीब 25 बीघा जमीन हुआ करती थी। मगर धोखाधड़ी करते हुए समिति को भूमिहीन कर दिया गया। अब समिति के पास केवल आधा बीघा जमीन ही बची है।
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मोहम्मद गाजी बसपा से 2007 में विधायक चुने गए थे। तभी इस समिति की जमीन पर उनकी नजरें टेढ़ी हो गई। मोहम्मद गाजी 2017 तक लगातार दो बार विधायक रहे। ऐसे में उनके खिलाफ जमीन की शिकायतें दम तोड़ती रहीं। अब पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह पर हमले के आरोप में तालिब बंधु घिरे और जेल चले गए। साथ ही पूर्व सांसद की शिकायत पर तालिब बंधु की जमीनों की जांच चल रही थी। सभी तहसीलों में बैनामों का रिकार्ड खंगाला जा रहा था। ऐसे में सहकारी समिति की जमीन का मामला भी सामने आ गया, जिसके चलते तालिब के समधि और पूर्व विधायक मोहम्मद गाजी भी इस लपेटे में आ गए।

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