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Bijnor News: स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं चिकित्सक, गंदगी का अंबार
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नूरपुर। यूं तो ग्रामीण इलाकों में मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बने हैं लेकिन मोरना स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक ही तैनात नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में मरीज परेशान हो रहे हैं। इलाज के लिए उन्हें रेफर किया जा रहा है। वहीं, गंदगी होने से मरीजों को संक्रमण होने का अधिक खतरा है।
गांव मोरना स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आवासीय भवन साल 2010 में लाखों रुपये की लागत से तैयार हुआ था। मगर, अब यहां स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। अस्पताल में चिकित्सक का पद रिक्त पड़ा है। बुधवार को हुई पड़ताल में रिपोर्टिंग टीम को फार्मासिस्ट विपिन कुमार मरीजों को दवाई देते मिले। वहीं, लैब टेक्नीशियन सुरभि चौधरी मौके पर नहीं थी। ऐसे में मरीजों को जांच के लिए भटकना पड़ा। इसके अलावा वार्डबॉय सुभाष चंद्र शर्मा, स्टाफ नर्स सपना, सफाई कर्मचारी/ चौकीदार राकेश की तैनाती है। फार्मासिस्ट विपिन कुमार ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन करीब 35-40 मरीज आते हैं। अस्पताल में गांव मोरना, उमरी, तरकोला पालनी, दरियापुर, जलालपुर, अथाई अहीर से मरीज आते हैं। इस समय मरीजों में अधिकांश सांस, खांसी, बुखार, त्वजा रोगियों की संख्या अधिक है। अस्पताल में तीन बेड की व्यवस्था है।
अस्पताल परिसर की चहारदीवारी टूटी
अस्पताल भवन व आवासीय परिसर में गंदगी से बुरा हाल है। परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां खड़ी हुई हैं। साथ ही आवासीय मकान भी खंडहर में तब्दील हो गए हैं। परिसर की चहारदीवारी भी टूटी हुई है।
तार टूटा होने से छाया रहता है अंधेरा
अस्पताल में विद्युत कनेक्शन है। लेकिन आए दिन पोल से तार टूटा होने से परिसर में अंधेरा छाया रहता है। इससे स्टाफ और मरीजों को भी परेशानी होती है।
क्या बोले ग्रामीण
मरीजों को नहीं मिल रहा सही उपचार: देशराज सिंह
गांव दरियापुर निवासी देशराज सिंह ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सक की कमी की वजह से मरीजों को सही उपचार नहीं मिल रहा है। अस्पताल में केवल बुखार, खांसी व हल्की फुल्की चोट में मरहम पट्टी बांध दी जाती है।
स्वास्थ्य केंद्र पर हो चिकित्सक की तैनाती: अरविंद कुमार
मोरना निवासी अरविंद कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र पर स्टाफ की कमी है। मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। लैब टेक्नीशियन के छुट्टी होने से जांच नहीं होती है। चिकित्सक की तैनाती होनी चाहिए। ताकि, स्वास्थ्य सेवाएं सुधर सके।
अस्पताल की चहारदीवारी बरसात में आए पानी की वजह से गिर गई थी। इसके निर्माण के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है। लैब टेक्नीशियन सीएल अवकाश पर है। कम स्टाफ में मरीजों को बेहतर सुविधा देने की कोशिश है।
....डॉ. अजय गंधर्व, पीएचसी प्रभारी
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गांव मोरना स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आवासीय भवन साल 2010 में लाखों रुपये की लागत से तैयार हुआ था। मगर, अब यहां स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। अस्पताल में चिकित्सक का पद रिक्त पड़ा है। बुधवार को हुई पड़ताल में रिपोर्टिंग टीम को फार्मासिस्ट विपिन कुमार मरीजों को दवाई देते मिले। वहीं, लैब टेक्नीशियन सुरभि चौधरी मौके पर नहीं थी। ऐसे में मरीजों को जांच के लिए भटकना पड़ा। इसके अलावा वार्डबॉय सुभाष चंद्र शर्मा, स्टाफ नर्स सपना, सफाई कर्मचारी/ चौकीदार राकेश की तैनाती है। फार्मासिस्ट विपिन कुमार ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन करीब 35-40 मरीज आते हैं। अस्पताल में गांव मोरना, उमरी, तरकोला पालनी, दरियापुर, जलालपुर, अथाई अहीर से मरीज आते हैं। इस समय मरीजों में अधिकांश सांस, खांसी, बुखार, त्वजा रोगियों की संख्या अधिक है। अस्पताल में तीन बेड की व्यवस्था है।
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अस्पताल परिसर की चहारदीवारी टूटी
अस्पताल भवन व आवासीय परिसर में गंदगी से बुरा हाल है। परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां खड़ी हुई हैं। साथ ही आवासीय मकान भी खंडहर में तब्दील हो गए हैं। परिसर की चहारदीवारी भी टूटी हुई है।
तार टूटा होने से छाया रहता है अंधेरा
अस्पताल में विद्युत कनेक्शन है। लेकिन आए दिन पोल से तार टूटा होने से परिसर में अंधेरा छाया रहता है। इससे स्टाफ और मरीजों को भी परेशानी होती है।
क्या बोले ग्रामीण
मरीजों को नहीं मिल रहा सही उपचार: देशराज सिंह
गांव दरियापुर निवासी देशराज सिंह ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सक की कमी की वजह से मरीजों को सही उपचार नहीं मिल रहा है। अस्पताल में केवल बुखार, खांसी व हल्की फुल्की चोट में मरहम पट्टी बांध दी जाती है।
स्वास्थ्य केंद्र पर हो चिकित्सक की तैनाती: अरविंद कुमार
मोरना निवासी अरविंद कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र पर स्टाफ की कमी है। मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। लैब टेक्नीशियन के छुट्टी होने से जांच नहीं होती है। चिकित्सक की तैनाती होनी चाहिए। ताकि, स्वास्थ्य सेवाएं सुधर सके।
अस्पताल की चहारदीवारी बरसात में आए पानी की वजह से गिर गई थी। इसके निर्माण के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है। लैब टेक्नीशियन सीएल अवकाश पर है। कम स्टाफ में मरीजों को बेहतर सुविधा देने की कोशिश है।
....डॉ. अजय गंधर्व, पीएचसी प्रभारी
