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Bijnor News: तालिब, गाजी समेत 14 पर रिपोर्ट दर्ज
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शेरकोट। पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह पर हमले के आरोप में जेल में बंद तालिब की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब 50 करोड़ रुपये की जमीन हड़पने के आरोप में तालिब और उनके समधी पूर्व विधायक मोहम्मद गाजी समेत 14 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। इसमें शेरकोट सहकारी आवास समिति के अध्यक्ष और सचिव समेत पूर्व विधायक के तीन भाइयों को भी आरोपी बनाया गया है।
शेरकोट सहकारी आवास समिति लिमिटेड के सदस्य शाहिद अली ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि 1989 में शेरकोट सहकारी आवास समिति लिमिटेड ने अब्दुल अजीज से 25 बीघा जमीन खरीदने के लिए इकरारनामा 3.45 लाख रुपये में कराया और पूरी धनराशि अदा कर दी गई थी लेकिन बैनामा होने से पहले विक्रेता की मृत्यु हो गई। आरोप है कि इसके बाद समिति के तत्कालीन सचिव शौकत अली ने विक्रेता के वारिसों से मिलीभगत कर केवल 12.50 बीघा जमीन ही समिति के नाम कराई। बाकी साढ़े बीघा जमीन समिति के नौ फर्जी सदस्य बनाते हुए उनके नाम करा दी। सदस्य बनाने के लिए रसीद भी फर्जी काटी गई। पूरे प्रकरण का मास्टर माइंड भू-माफिया तालिब को बताया गया है, जिसने अपने रिश्तेदारों व सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। आपसी बैनामों के जरिए जमीन पर कब्जा कर लिया।
आरोप है कि सभी आरोपी संगठित गिरोह बनाकर इस अवैध कब्जे में शामिल हैं। आरोप लगाया कि मौजा रामबड़ी स्थित यह जमीन अब आबादी क्षेत्र में शामिल हो चुकी है। इसकी कीमत करीब 50 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। जमीन बिक्री से प्राप्त कोई भी धनराशि समिति के खाते में जमा नहीं की गई। निजी उपयोग में खर्च कर ली गई।
शाहिद ने बताया कि 17 अप्रैल को जब वह समिति की जमीन की ओर जा रहा था। तब आरोपियों ने उसे रोककर गाली-गलौज की और जान से मारने की नीयत से हमला किया। शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिससे उसकी जान बच सकी। आरोपी दोबारा जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। सीओ आलोक कुमार ने रिपोर्ट दर्ज करने की पुष्टि की।
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शेरकोट सहकारी आवास समिति लिमिटेड के सदस्य शाहिद अली ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि 1989 में शेरकोट सहकारी आवास समिति लिमिटेड ने अब्दुल अजीज से 25 बीघा जमीन खरीदने के लिए इकरारनामा 3.45 लाख रुपये में कराया और पूरी धनराशि अदा कर दी गई थी लेकिन बैनामा होने से पहले विक्रेता की मृत्यु हो गई। आरोप है कि इसके बाद समिति के तत्कालीन सचिव शौकत अली ने विक्रेता के वारिसों से मिलीभगत कर केवल 12.50 बीघा जमीन ही समिति के नाम कराई। बाकी साढ़े बीघा जमीन समिति के नौ फर्जी सदस्य बनाते हुए उनके नाम करा दी। सदस्य बनाने के लिए रसीद भी फर्जी काटी गई। पूरे प्रकरण का मास्टर माइंड भू-माफिया तालिब को बताया गया है, जिसने अपने रिश्तेदारों व सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। आपसी बैनामों के जरिए जमीन पर कब्जा कर लिया।
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आरोप है कि सभी आरोपी संगठित गिरोह बनाकर इस अवैध कब्जे में शामिल हैं। आरोप लगाया कि मौजा रामबड़ी स्थित यह जमीन अब आबादी क्षेत्र में शामिल हो चुकी है। इसकी कीमत करीब 50 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। जमीन बिक्री से प्राप्त कोई भी धनराशि समिति के खाते में जमा नहीं की गई। निजी उपयोग में खर्च कर ली गई।
शाहिद ने बताया कि 17 अप्रैल को जब वह समिति की जमीन की ओर जा रहा था। तब आरोपियों ने उसे रोककर गाली-गलौज की और जान से मारने की नीयत से हमला किया। शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिससे उसकी जान बच सकी। आरोपी दोबारा जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। सीओ आलोक कुमार ने रिपोर्ट दर्ज करने की पुष्टि की।

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