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Budaun News: गंगा एक्सप्रेसवे पर 100 किमी का सफर महज 50 मिनट में हुआ पूरा
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गंगा एक्सप्रेस-वे पर फराटा भरते वाहन। संवाद
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बदायूं। गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के पहले ही दिन इस संवाददाता ने भी इस बहुप्रतीक्षित मार्ग पर सफर कर इसकी गुणवत्ता और रफ्तार का अनुभव लिया। अपराह्न ठीक एक बजे बिनावर के घटपुरी इंटरचेंज पर कार चढ़ाई गई। शुरुआती कुछ मिनटों में ही यह एहसास हो गया कि यह सफर पारंपरिक सड़कों से बिल्कुल अलग होने वाला है।
इंटरचेंज से प्रवेश करते ही कार चालक ने बेहद संतुलित ढंग से वाहन को गति दी। पहले 60, फिर 80 और कुछ ही मिनटों में स्पीडोमीटर 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच स्थिर हो गया। हैरानी की बात यह रही कि इतनी तेज रफ्तार के बावजूद गाड़ी पूरी तरह नियंत्रित और स्थिर बनी रही। कहीं भी झटका, कंपन या सड़क की खराबी जैसा कोई अनुभव नहीं हुआ।
संभल सीमा तक लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय करने में महज 50 मिनट का समय लगा। यह आंकड़ा अपने आप में इस एक्सप्रेसवे की क्षमता और गुणवत्ता को दर्शाता है, क्योंकि पहले यही दूरी तय करने में दो से ढाई घंटे तक का समय लग जाता था। इस बार न केवल समय की बचत हुई, बल्कि सफर इतना सहज रहा कि थकान का नाम तक महसूस नहीं हुआ। ड्राइव के दौरान एक्सप्रेसवे की चौड़ी लेन, स्पष्ट मार्किंग, मजबूत डिवाइडर और दूर-दूर तक फैली समतल सड़क लगातार आकर्षित करती रही।
वाहन चालक ने बताया कि यहां ड्राइव करते समय बार-बार ब्रेक लगाने या गियर बदलने की जरूरत नहीं पड़ी। सड़क इतनी स्मूद है कि गाड़ी अपने आप ही संतुलित गति में चलती रहती है। पहले ही दिन का यह अनुभव यह बताने के लिए काफी है कि गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि रफ्तार, सुविधा और विकास का नया प्रतीक बन चुका है। आने वाले समय में यह मार्ग पूरे क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। (संवाद)
संकेतक, रिफ्लेक्टर और दिशा सूचक बोर्ड करा रहे सुरक्षा का एहसास
सफर के दौरान कई स्थानों पर सुरक्षा से जुड़े संकेतक, रिफ्लेक्टर और दिशा सूचक बोर्ड लगे दिखाई दिए, जो ड्राइव को और अधिक सुरक्षित बनाते हैं। कहीं भी अनियंत्रित कट या बाधा नजर नहीं आई, जिससे यह साफ हुआ कि इस मार्ग को आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। कार के भीतर बैठे लोगों को बार-बार यही एहसास होता रहा कि वे सड़क पर नहीं, बल्कि किसी विमान के रनवे पर दौड़ रहे हों। तेज रफ्तार के बावजूद न शरीर पर कोई दबाव महसूस हुआ और न ही सीट पर बैठे रहने में कोई असहजता। यही वजह रही कि 100 किलोमीटर का लंबा सफर भी पलक झपकते पूरा हो गया।
रास्ते के सफर को कैमरे में कैद करते दिखे वाहन सवार
रास्ते में कई जगह अन्य वाहन चालक भी रुककर इस ऐतिहासिक पल को अपने कैमरों में कैद करते नजर आए। युवाओं के समूह अपने दोस्तों के साथ कार लेकर पहुंचे थे और एक्सप्रेस-वे पर ड्राइव के साथ-साथ फोटो और वीडियो बनाकर इस अनुभव को यादगार बना रहे थे। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों से बातचीत में यह बात सामने आई कि गंगा एक्सप्रेसवे ने यात्रा के मायने पूरी तरह बदल दिए हैं। जहां पहले खराब सड़कों, गड्ढों और जाम की समस्या आम थी, वहीं अब कम समय में सुरक्षित, तेज और आरामदायक सफर संभव हो गया है। विशेषज्ञों की मानें तो इस एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि व्यापार, कृषि और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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इंटरचेंज से प्रवेश करते ही कार चालक ने बेहद संतुलित ढंग से वाहन को गति दी। पहले 60, फिर 80 और कुछ ही मिनटों में स्पीडोमीटर 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच स्थिर हो गया। हैरानी की बात यह रही कि इतनी तेज रफ्तार के बावजूद गाड़ी पूरी तरह नियंत्रित और स्थिर बनी रही। कहीं भी झटका, कंपन या सड़क की खराबी जैसा कोई अनुभव नहीं हुआ।
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संभल सीमा तक लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय करने में महज 50 मिनट का समय लगा। यह आंकड़ा अपने आप में इस एक्सप्रेसवे की क्षमता और गुणवत्ता को दर्शाता है, क्योंकि पहले यही दूरी तय करने में दो से ढाई घंटे तक का समय लग जाता था। इस बार न केवल समय की बचत हुई, बल्कि सफर इतना सहज रहा कि थकान का नाम तक महसूस नहीं हुआ। ड्राइव के दौरान एक्सप्रेसवे की चौड़ी लेन, स्पष्ट मार्किंग, मजबूत डिवाइडर और दूर-दूर तक फैली समतल सड़क लगातार आकर्षित करती रही।
वाहन चालक ने बताया कि यहां ड्राइव करते समय बार-बार ब्रेक लगाने या गियर बदलने की जरूरत नहीं पड़ी। सड़क इतनी स्मूद है कि गाड़ी अपने आप ही संतुलित गति में चलती रहती है। पहले ही दिन का यह अनुभव यह बताने के लिए काफी है कि गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि रफ्तार, सुविधा और विकास का नया प्रतीक बन चुका है। आने वाले समय में यह मार्ग पूरे क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। (संवाद)
संकेतक, रिफ्लेक्टर और दिशा सूचक बोर्ड करा रहे सुरक्षा का एहसास
सफर के दौरान कई स्थानों पर सुरक्षा से जुड़े संकेतक, रिफ्लेक्टर और दिशा सूचक बोर्ड लगे दिखाई दिए, जो ड्राइव को और अधिक सुरक्षित बनाते हैं। कहीं भी अनियंत्रित कट या बाधा नजर नहीं आई, जिससे यह साफ हुआ कि इस मार्ग को आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। कार के भीतर बैठे लोगों को बार-बार यही एहसास होता रहा कि वे सड़क पर नहीं, बल्कि किसी विमान के रनवे पर दौड़ रहे हों। तेज रफ्तार के बावजूद न शरीर पर कोई दबाव महसूस हुआ और न ही सीट पर बैठे रहने में कोई असहजता। यही वजह रही कि 100 किलोमीटर का लंबा सफर भी पलक झपकते पूरा हो गया।
रास्ते के सफर को कैमरे में कैद करते दिखे वाहन सवार
रास्ते में कई जगह अन्य वाहन चालक भी रुककर इस ऐतिहासिक पल को अपने कैमरों में कैद करते नजर आए। युवाओं के समूह अपने दोस्तों के साथ कार लेकर पहुंचे थे और एक्सप्रेस-वे पर ड्राइव के साथ-साथ फोटो और वीडियो बनाकर इस अनुभव को यादगार बना रहे थे। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों से बातचीत में यह बात सामने आई कि गंगा एक्सप्रेसवे ने यात्रा के मायने पूरी तरह बदल दिए हैं। जहां पहले खराब सड़कों, गड्ढों और जाम की समस्या आम थी, वहीं अब कम समय में सुरक्षित, तेज और आरामदायक सफर संभव हो गया है। विशेषज्ञों की मानें तो इस एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि व्यापार, कृषि और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
