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Budaun News: बीमा कंपनी के प्रबंधक और जीएम को कोर्ट का नोटिस
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बदायूं। बीमा कंपनी ने एक व्यक्ति की मौत के बाद उसके पिता द्वारा किए मृत्यु दावे को निरस्त कर दिया है। इस मामले में पीड़ित ने स्थायी लोक अदालत में सात मार्च को वाद दायर किया। अदालत ने आईसीआईसीआई बीमा कंपनी के प्रबंधक व महाप्रबंधक (जीएम) दोनों को नोटिस भेजकर छह अप्रैल को अपना पक्ष रखने का आदेश जारी किया है।
वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव पुन्नापुर निवासी ख्याली राम ने सात मार्च को वाद दायर किया था। उन्हाेंने बताया कि बेटे धर्मपाल ने सात दिसंबर 2023 को आईसीआईसीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से बीमा कराया था। बीमा 30 वर्षों के लिए किया गया था। एजेंट ने पूरी जांच पड़ताल व फिटनेस प्रमाणपत्र बनवाकर शारीरिक परीक्षण भी कराया था, उसके बाद ही बीमा किया था।
महिला ने बताया कि उसके पति ने सालाना एक लाख रुपये की पॉलिसी खरीदी थी। हर छह महीने में बेटा 50,161 रुपये जमा करता आ रहा था। चार फरवरी 2024 को बेटे की अचानक मौत हो गई। इसके बाद उसके परिवार के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई।
उसने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी के अधिकारियों को बुलाकर मौका मुआयना भी कराया। प्रबंधक व महाप्रबंधक ने 10 जून 2024 को आवेदन निरस्त कर दिया। बताया गया कि कागजों में उसकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। महिला का कहना है कि उसके बेटे की मौत हार्टअटैक से हुई थी। पीड़िता ने कोर्ट में कहा है कि वह 30 लाख रुपये पाने की अधिकारी है। उसने बीमा राशि के अलावा एक लाख रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति व 20 हजार रुपये अधिवक्ता का मेहनताना दिलाने की मांग की है।
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वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव पुन्नापुर निवासी ख्याली राम ने सात मार्च को वाद दायर किया था। उन्हाेंने बताया कि बेटे धर्मपाल ने सात दिसंबर 2023 को आईसीआईसीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से बीमा कराया था। बीमा 30 वर्षों के लिए किया गया था। एजेंट ने पूरी जांच पड़ताल व फिटनेस प्रमाणपत्र बनवाकर शारीरिक परीक्षण भी कराया था, उसके बाद ही बीमा किया था।
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महिला ने बताया कि उसके पति ने सालाना एक लाख रुपये की पॉलिसी खरीदी थी। हर छह महीने में बेटा 50,161 रुपये जमा करता आ रहा था। चार फरवरी 2024 को बेटे की अचानक मौत हो गई। इसके बाद उसके परिवार के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई।
उसने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी के अधिकारियों को बुलाकर मौका मुआयना भी कराया। प्रबंधक व महाप्रबंधक ने 10 जून 2024 को आवेदन निरस्त कर दिया। बताया गया कि कागजों में उसकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। महिला का कहना है कि उसके बेटे की मौत हार्टअटैक से हुई थी। पीड़िता ने कोर्ट में कहा है कि वह 30 लाख रुपये पाने की अधिकारी है। उसने बीमा राशि के अलावा एक लाख रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति व 20 हजार रुपये अधिवक्ता का मेहनताना दिलाने की मांग की है।
