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Budaun News: ई-रिक्शों में ले जाए जा रहे स्कूली बच्चे, हर दिन बन रहा हादसे का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Wed, 08 Apr 2026 12:26 AM IST
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ई-रिक्शा से जाते स्कूली बच्चे। संवाद
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बदायूं। शहर और कस्बों में स्कूली बच्चों के परिवहन के लिए चल रहे ई-रिक्शे दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। एक तो इनमें बच्चों को बैठाना ही है नियम विरुद्ध है, ऊपर से कई गुना अधिक बच्चों को बैठाना हादसे को दावत दे रहा है। कई बच्चे दरवाजे के पास लटककर सफर करने को मजबूर होते हैं, इससे हर पल हादसे का खतरा बना रहता है।
अभिभावकों की मजबूरी भी इस समस्या को बढ़ा रही है। कम किराए और आसानी से उपलब्धता के कारण वे बच्चों को ई-रिक्शों से भेज रहे हैं, जबकि कई बार वाहन चालक के पास वैध परमिट या सुरक्षा इंतजाम भी नहीं होते। कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
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अभिभावकों को जागरूक करने पर जोर
-शासन स्तर पर इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। हाल ही में प्रदेश स्तर पर हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में ई-रिक्शों से बच्चों के परिवहन का मुद्दा उठा, इसके बाद सभी जिलाधिकारियों को अभिभावकों की काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभिभावकों को समझाया जाएगा कि वे बिना सुरक्षा मानकों वाले वाहनों से बच्चों को न भेजें, ताकि जोखिम को कम किया जा सके।
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15 अप्रैल के बाद बिना पंजीकरण वाहनों पर होगी सख्ती
-परिवहन विभाग के अनुसार जिले में 710 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं, इनमें से 605 वाहनों का विवरण उत्तर प्रदेश इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। शेष वाहनों को 15 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से पोर्टल पर पंजीकृत करना होगा। तय समय सीमा के बाद बिना पंजीकरण वाले वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी जाएगी और नियम उल्लंघन मिलने पर चालक के खिलाफ एफआईआर के साथ स्कूल की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
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वर्जन-
जिले में 600 से अधिक स्कूलों वाहनों का एकीकृत विद्यालयीय वाहन अनुश्रवण पोर्टल (आईएसवीपीएल) पर डाटा अपलोड किया है। सभी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वह 15 अप्रैल से पहले अपने वाहनाें का संपूर्ण डाटा अपलोड कर दें।
-हरिओम गौतम, एआरटीओ
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अभिभावकों की मजबूरी भी इस समस्या को बढ़ा रही है। कम किराए और आसानी से उपलब्धता के कारण वे बच्चों को ई-रिक्शों से भेज रहे हैं, जबकि कई बार वाहन चालक के पास वैध परमिट या सुरक्षा इंतजाम भी नहीं होते। कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
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अभिभावकों को जागरूक करने पर जोर
-शासन स्तर पर इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। हाल ही में प्रदेश स्तर पर हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में ई-रिक्शों से बच्चों के परिवहन का मुद्दा उठा, इसके बाद सभी जिलाधिकारियों को अभिभावकों की काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभिभावकों को समझाया जाएगा कि वे बिना सुरक्षा मानकों वाले वाहनों से बच्चों को न भेजें, ताकि जोखिम को कम किया जा सके।
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15 अप्रैल के बाद बिना पंजीकरण वाहनों पर होगी सख्ती
-परिवहन विभाग के अनुसार जिले में 710 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं, इनमें से 605 वाहनों का विवरण उत्तर प्रदेश इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। शेष वाहनों को 15 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से पोर्टल पर पंजीकृत करना होगा। तय समय सीमा के बाद बिना पंजीकरण वाले वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी जाएगी और नियम उल्लंघन मिलने पर चालक के खिलाफ एफआईआर के साथ स्कूल की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
वर्जन-
जिले में 600 से अधिक स्कूलों वाहनों का एकीकृत विद्यालयीय वाहन अनुश्रवण पोर्टल (आईएसवीपीएल) पर डाटा अपलोड किया है। सभी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वह 15 अप्रैल से पहले अपने वाहनाें का संपूर्ण डाटा अपलोड कर दें।
-हरिओम गौतम, एआरटीओ

ई-रिक्शा से जाते स्कूली बच्चे। संवाद