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Budaun News: बिना वाहन चलाए ही तीन लाख के आठ ई-चालान
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बदायूं। जिले के ग्राम बरातेगदार निवासी एक ट्रक स्वामी इन दिनों बिना वाहन चलाए ही लगातार आ रहे ऑनलाइन चालानों से परेशान है। मई 2025 से अब तक उनके ट्रक नंबर पर 8 ई-चालान हो चुके हैं, जिनकी कुल धनराशि करीब 3 लाख रुपये पहुंच गई है।
खास बात यह है कि चालान की फोटो में किसी अन्य राज्य के डंपर (HR-38) का वाहन दिखाई दे रहा है, जबकि चालान में अंकित नंबर उनका अपना ट्रक UP-24T 3021 है। पीड़ित ट्रक स्वामी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि उनका ट्रक लकड़ी की बॉडी वाला है। आरोप है कि जिन चालानों की सूचना उन्हें मिल रही है, वे मुरादाबाद क्षेत्र में माइनटैक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किए गए हैं, जबकि वह अपना वाहन लेकर वहां गए ही नहीं हैं।
कृष्ण कुमार के अनुसार, उन्होंने माइनटैक का पंजीकरण मुरादाबाद के एक कैफे से कराया था, जिसका विवरण उन्हें आज तक प्राप्त नहीं हुआ। अचानक मई 2025 से उनके वाहन नंबर पर चालान आने शुरू हो गए। जब चालानों की संख्या बढ़ती गई तो उन्होंने मुरादाबाद के खनन अधिकारी, आईजीआरएस पोर्टल तथा बदायूं के संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका।
पीड़ित ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि गलत तरीके से दर्ज किए गए चालानों को निरस्त कर उन्हें राहत दी जाए, ताकि वह दोबारा अपना वाहन चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर सकें।
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खास बात यह है कि चालान की फोटो में किसी अन्य राज्य के डंपर (HR-38) का वाहन दिखाई दे रहा है, जबकि चालान में अंकित नंबर उनका अपना ट्रक UP-24T 3021 है। पीड़ित ट्रक स्वामी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि उनका ट्रक लकड़ी की बॉडी वाला है। आरोप है कि जिन चालानों की सूचना उन्हें मिल रही है, वे मुरादाबाद क्षेत्र में माइनटैक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किए गए हैं, जबकि वह अपना वाहन लेकर वहां गए ही नहीं हैं।
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कृष्ण कुमार के अनुसार, उन्होंने माइनटैक का पंजीकरण मुरादाबाद के एक कैफे से कराया था, जिसका विवरण उन्हें आज तक प्राप्त नहीं हुआ। अचानक मई 2025 से उनके वाहन नंबर पर चालान आने शुरू हो गए। जब चालानों की संख्या बढ़ती गई तो उन्होंने मुरादाबाद के खनन अधिकारी, आईजीआरएस पोर्टल तथा बदायूं के संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका।
पीड़ित ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि गलत तरीके से दर्ज किए गए चालानों को निरस्त कर उन्हें राहत दी जाए, ताकि वह दोबारा अपना वाहन चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर सकें।
