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Budaun News: कदमनगला में झोंपड़ियां गंगा में समा रहीं, ग्रामीण पक्के मकान जेसीबी से तुड़वा रहे
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गंगा में समाने के डर से पक्का मकान को जेसीबी से तुड़वाते ग्रामीण। संवाद
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उसहैत। कदमनलगा में गंगा नदी का कहर बढ़ रहा है। पूर्व माध्यमिक स्कूल का भवन गंगा में समाने के बाद छप्परनुमा घर भी गंगा में समाते जा रहे हैं। एक ही परिवार के कई छप्पर गंगा में समाने के बाद परिवार ने पंचायत भवन में शरण ली है। रविवार को ग्रामीण अशोक कुमार ने अपना पक्का घर जेसीबी से ढहाना शुरू कराया ताकि वह ईंटें सुरक्षित निकाल सकें।
ग्रामीण अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने पांच साल पहले गांव में पक्का मकान बनाया था। गंगा ने कई साल पहले खूब कटान किया था, तब दूसरी जगह पर गांव बसा। अभी गंगा जी घर से 20 मीटर दूर हैं, एक-दो दिन में पूरा मकान गंगा में समा जाएगा, इसलिए मकान ढहाकर उसकी ईंटें निकाल रहे हैं, ताकि आगे कभी मकान बना सकें।
बता दें कि ग्राम कदमनगला इन दिनों बाढ़ की तबाही झेल रहा है। 20 दिन से गांव हल्के हल्के गंगा में समाने की तरफ बढ़ रहा है। पहले ग्रामीणों की खेती की जमीन गंगा में समाई। पूर्व माध्यमिक विद्यालय गंगा में समा गया। न बाढ़ खंड के किसी अधिकारी ने गांव को बचाने का प्रयास किया न ही राजस्व विभाग ने।
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ग्रामीणों को गांव से बाहर सुरक्षित स्थान देने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। बीते 24 घंटों में पानी गांव तक आ गया। चार भाइयों का झोंपड़ीनुमा मकान भी बह गए, लेकिन प्रशासन अभी भी कुछ नहीं कर रहा है।
ग्राम पंचायत के भवन में शरण ली
राजाराम और नेकराम, सुनील, जगपाल सगे भाईं। इनके 8 बच्चे हैं। राजाराम ने बताया कि उनका मकान गंगा में कट रहा है, पूरे परिवार के साथ पंचायत भवन में शरण ली है, खेती की जमीन पहले ही गंगा में कट चुकी है, परिवार में 12 लोग हैं, 2-3 दिन में यह भवन भी गंगा में समा जाएगा, फिर किसी सड़क के किनारे रह लेंगे।
अफसरों ने किया कदमनगला का दौरा
एडीएम फाइनेंस महेन्द्र श्रीवास्तव, एसडीएम दातागंज विनोद कुमार, एई बाढ़ खंड नरेशपाल ने रविवार की शाम बाढ़ प्रभावित गांव कदमनगला का दौरा किया। एसडीम विनोद कुमार ने बताया कि सोमवार से ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य कैंप, पशुओं के लिए टीकाकरण एवं गांव में कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जाएगा। ग्रामीणों को कोई दिक्कत नहीं होने देंगे।
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ग्रामीण अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने पांच साल पहले गांव में पक्का मकान बनाया था। गंगा ने कई साल पहले खूब कटान किया था, तब दूसरी जगह पर गांव बसा। अभी गंगा जी घर से 20 मीटर दूर हैं, एक-दो दिन में पूरा मकान गंगा में समा जाएगा, इसलिए मकान ढहाकर उसकी ईंटें निकाल रहे हैं, ताकि आगे कभी मकान बना सकें।
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बता दें कि ग्राम कदमनगला इन दिनों बाढ़ की तबाही झेल रहा है। 20 दिन से गांव हल्के हल्के गंगा में समाने की तरफ बढ़ रहा है। पहले ग्रामीणों की खेती की जमीन गंगा में समाई। पूर्व माध्यमिक विद्यालय गंगा में समा गया। न बाढ़ खंड के किसी अधिकारी ने गांव को बचाने का प्रयास किया न ही राजस्व विभाग ने।
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ग्रामीणों को गांव से बाहर सुरक्षित स्थान देने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। बीते 24 घंटों में पानी गांव तक आ गया। चार भाइयों का झोंपड़ीनुमा मकान भी बह गए, लेकिन प्रशासन अभी भी कुछ नहीं कर रहा है।
ग्राम पंचायत के भवन में शरण ली
राजाराम और नेकराम, सुनील, जगपाल सगे भाईं। इनके 8 बच्चे हैं। राजाराम ने बताया कि उनका मकान गंगा में कट रहा है, पूरे परिवार के साथ पंचायत भवन में शरण ली है, खेती की जमीन पहले ही गंगा में कट चुकी है, परिवार में 12 लोग हैं, 2-3 दिन में यह भवन भी गंगा में समा जाएगा, फिर किसी सड़क के किनारे रह लेंगे।
अफसरों ने किया कदमनगला का दौरा
एडीएम फाइनेंस महेन्द्र श्रीवास्तव, एसडीएम दातागंज विनोद कुमार, एई बाढ़ खंड नरेशपाल ने रविवार की शाम बाढ़ प्रभावित गांव कदमनगला का दौरा किया। एसडीम विनोद कुमार ने बताया कि सोमवार से ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य कैंप, पशुओं के लिए टीकाकरण एवं गांव में कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जाएगा। ग्रामीणों को कोई दिक्कत नहीं होने देंगे।

गंगा में समाने के डर से पक्का मकान को जेसीबी से तुड़वाते ग्रामीण। संवाद