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Budaun News: एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक पर रोक
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बदायूं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक “एक्सप्लोरिंग सोसाइटी : इंडिया एंड बियोंड” पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके बाद जिले में भी इस पुस्तक की बिक्री और स्कूलों में इसके उपयोग पर रोक लगा दी गई है। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में इस पुस्तक को विद्यार्थियों को न पढ़ाया जाए।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि यदि किसी स्कूल में यह पुस्तक पढ़ाई जाती हुई पाई गई तो संबंधित स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें स्कूल की मान्यता समाप्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए केस भी दर्ज कराया जाएगा।
बताया जा रहा है कि फरवरी 2026 में प्रकाशित इस पुस्तक में “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” शीर्षक से एक अध्याय शामिल था। इस अध्याय में न्यायपालिका की व्यवस्था से जुड़ी कुछ समस्याओं का उल्लेख किया गया था। इस सामग्री पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई और कहा कि इससे न्यायपालिका की छवि प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर अदालत ने पुस्तक के प्रकाशन, वितरण और डिजिटल प्रसार पर भी तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश मिलने के बाद जिले के शिक्षा अधिकारियों ने सभी स्कूलों, पुस्तक विक्रेताओं और संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी दुकान या संस्थान में इस पुस्तक की प्रतियां उपलब्ध हों तो उन्हें तुरंत जब्त कर सील किया जाए और उनकी बिक्री पूरी तरह बंद कर दी जाए।
फरवरी में प्रकाशित यह पुस्तक किसी भी स्कूल में किसी भी परिस्थिति में पढ़ाई के लिए उपयोग में नहीं लाई जाएगी। यदि कहीं इसका वितरण हो चुका है तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाएगी। जहां भी यह किताब उपलब्ध होगी, उसकी प्रतियां जब्त कर ली जाएंगी। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि यदि किसी स्कूल में यह पुस्तक पढ़ाई जाती हुई पाई गई तो संबंधित स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें स्कूल की मान्यता समाप्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए केस भी दर्ज कराया जाएगा।
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बताया जा रहा है कि फरवरी 2026 में प्रकाशित इस पुस्तक में “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” शीर्षक से एक अध्याय शामिल था। इस अध्याय में न्यायपालिका की व्यवस्था से जुड़ी कुछ समस्याओं का उल्लेख किया गया था। इस सामग्री पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई और कहा कि इससे न्यायपालिका की छवि प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर अदालत ने पुस्तक के प्रकाशन, वितरण और डिजिटल प्रसार पर भी तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश मिलने के बाद जिले के शिक्षा अधिकारियों ने सभी स्कूलों, पुस्तक विक्रेताओं और संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए हैं। अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी दुकान या संस्थान में इस पुस्तक की प्रतियां उपलब्ध हों तो उन्हें तुरंत जब्त कर सील किया जाए और उनकी बिक्री पूरी तरह बंद कर दी जाए।
फरवरी में प्रकाशित यह पुस्तक किसी भी स्कूल में किसी भी परिस्थिति में पढ़ाई के लिए उपयोग में नहीं लाई जाएगी। यदि कहीं इसका वितरण हो चुका है तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाएगी। जहां भी यह किताब उपलब्ध होगी, उसकी प्रतियां जब्त कर ली जाएंगी। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
