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Budaun News: बाजारों में बढ़ी रेवड़ी, गजक और मूंगफली की बिक्री
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Sun, 11 Jan 2026 01:27 AM IST
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गुड्डू,
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बदायूं। लोहड़ी और मकर संक्रांति पर बाजार में गजक, रेवड़ी और मूंगफली की मांग बढ़ने लगी है। दुकानदार भी इस वर्ष लोहड़ी और मकर संक्रांति पर अच्छे कारोबार की उम्मीद में दुकानें लगाए बैठे हैं। कारीगर न होने के कारण यहां गजक बनती नहीं है, बरेली और चंदौसी से लाकर बेची जाती है।
शहर में लोहड़ी के कई जगह पर सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम होते हैं। मकर संक्रांति पर भी गजक, रेवड़ी का अधिक महत्व रहता है। शहर के लावेला चौक, कचहरी रोड, सुभाष चौक, टिकटगंज, रेलवे क्रासिंग, परशुराम चौराहा और गोपी चौक, काली सड़क पर गजक की कई दुकानें हैं।
दुकानों पर गुड़ और चीनी के अलावा गुड़ दाना, मूंगफली की पट्टी के साथ अलग-अलग डिजाइनों की गजक मौजूद है। इसमें ग्राहक सबसे ज्यादा चीनी और गुड़ की गजक को पसंद कर रहे हैं। बाजार में गजक 200 से 350 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेची जा रही है।
वहीं मूंगफली 150 से 180 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। गजक की दुकानदारी एक माह तक चलती है। इसमें 6 जनवरी से 15 जनवरी तक गजक की दुकानदारी ज्यादा रहती है। इसके बाद सामान्य तरीके की दुकानदारी चलती है।
बाहर से लाकर बेची जाती है गजक
गजक बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर कोई कारीगर नहीं है। दुकानदारों बताया कि जिले में गजक तैयार नहीं होती है। यहां गजक चंदौसी और बरेली से लाकर गजक बेची जाती है।
लोहड़ी और मकर संक्रांति पर एक-दूसरे को देने के लिए गजक की बिक्री बढ़ जाती है। - संजीव, दुकानदार
बाजार में गजक की मांग बढ़ रही है। पर्व के नजदीक आते ही गजक की मांग में और इजाफा होगा। - गुड्डू, दुकानदार
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शहर में लोहड़ी के कई जगह पर सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम होते हैं। मकर संक्रांति पर भी गजक, रेवड़ी का अधिक महत्व रहता है। शहर के लावेला चौक, कचहरी रोड, सुभाष चौक, टिकटगंज, रेलवे क्रासिंग, परशुराम चौराहा और गोपी चौक, काली सड़क पर गजक की कई दुकानें हैं।
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दुकानों पर गुड़ और चीनी के अलावा गुड़ दाना, मूंगफली की पट्टी के साथ अलग-अलग डिजाइनों की गजक मौजूद है। इसमें ग्राहक सबसे ज्यादा चीनी और गुड़ की गजक को पसंद कर रहे हैं। बाजार में गजक 200 से 350 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेची जा रही है।
वहीं मूंगफली 150 से 180 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। गजक की दुकानदारी एक माह तक चलती है। इसमें 6 जनवरी से 15 जनवरी तक गजक की दुकानदारी ज्यादा रहती है। इसके बाद सामान्य तरीके की दुकानदारी चलती है।
बाहर से लाकर बेची जाती है गजक
गजक बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर कोई कारीगर नहीं है। दुकानदारों बताया कि जिले में गजक तैयार नहीं होती है। यहां गजक चंदौसी और बरेली से लाकर गजक बेची जाती है।
लोहड़ी और मकर संक्रांति पर एक-दूसरे को देने के लिए गजक की बिक्री बढ़ जाती है। - संजीव, दुकानदार
बाजार में गजक की मांग बढ़ रही है। पर्व के नजदीक आते ही गजक की मांग में और इजाफा होगा। - गुड्डू, दुकानदार

गुड्डू,

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