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Budaun News: 40 डिग्री पहुंचा पारा, लू लगने का तरा बढ़ा
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जिला अस्पताल मे बना हीटवेव कक्ष। संवाद
- फोटो : Samvad
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बदायूं। जिले में लगातार बढ़ती गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बुधवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इससे हीटवेव का खतरा गहराने लगा है। बदलते मौसम के इस तेवर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। सरकारी अस्पतालों को विशेष तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएमओ डॉ. श्रीमोहन झा ने हीटवेव के संभावित प्रभाव को देखते हुए जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में दो-दो बेड आरक्षित कर दिए हैं। इन बेड पर विशेष रूप से हीट स्ट्रोक और लू से प्रभावित मरीजों को तत्काल भर्ती कर इलाज दिया जाएगा। इसके साथ ही अस्पतालों में ओआरएस, आवश्यक दवाएं और ठंडे पानी की व्यवस्था करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
वहीं जिला अस्पताल में भी तैयारियों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। यहां हीटवेव से प्रभावित मरीजों के लिए अलग से एक वार्ड बनाया गया है। इसमें 10 बेड, कूलिंग व्यवस्था और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा डॉ. शिव मोहन कमल, डॉ. राजेश कुमार वर्मा, डाॅ. अलंकार सोलंकी, डॉ. स्वतंत्र पाल सिंह समेत पैरामेडिकल स्टाफ को भी अलर्ट रहने को कहा गया है, ताकि मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके।
दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक तेज धूप में निकलने से बचें
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने से लू लगने, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, उल्टी, सिरदर्द और बेहोशी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। वहीं, वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. शिव मोहन कमल डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक तेज धूप में निकलने से बचें। पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, छाछ और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें व सिर को ढककर ही बाहर निकलें।
हीटवेव से बचाव के उपाय
-दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचें।
-ज्यादा से ज्यादा पानी और तरल पदार्थ लें।
-हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।
-सिर को गमछा या टोपी से ढककर निकलें।
-खाली पेट बाहर न जाएं।
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लू के प्रमुख लक्षण
-तेज बुखार और सिरदर्द
-चक्कर आना और कमजोरी।
-उल्टी या मितली।
-शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)।
-बेहोशी की स्थिति।
सभी सीएचसी, पीएचसी पर दो-दो बेड आरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा कूलर, आइस पैक आदि की भी व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि अगर कोई मरीज पहुंचे तो उसे तुरंत उपचार मिल सके। -डॉ. श्रीमोहन झा, सीएमओ
अस्पताल में अभी अलग से 10 बेड का एक वार्ड आरक्षित किया गया है। वहां पर स्टाफ की तैनाती की गई है, ताकि मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। -अमित वार्ष्णेय, सीएमएस, जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में उमड़ी भीड़, 1149 लोग पहुंचे इलाज कराने
- 494 मरीजों में बुखार व उल्टी-दस्त की शिकायत, अपच और पेट संबंधी दिक्कतें बढ़ीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सोमवार को अस्पताल की ओपीडी में कुल 1149 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। जिससे अस्पताल परिसर में दिनभर भीड़ का माहौल बना रहा। डॉक्टरों को भी लगातार बढ़ रहे मरीजों के दबाव का सामना करना पड़ा।
मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 1149 मरीज पहुंचे। इनमें से 494 मरीज ऐसे रहे, जो बुखार, उल्टी-दस्त और पेट से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित थे। इसके अलावा कई मरीज अपच, पेट फूलने और खट्टी डकार की शिकायत लेकर भी अस्पताल पहुंचे। डॉ. अलंकार सोलंकी के अनुसार बदलते मौसम और खानपान में लापरवाही के चलते इस तरह की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
उनका कहना है कि गर्मी के मौसम में दूषित पानी और बाहर का अस्वच्छ भोजन करने से पेट संबंधी रोग बढ़ जाते हैं। ऐसे में लोगों को खानपान में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है। डॉक्टर ने कहा है कि लोग साफ पानी का सेवन करें, ताजा भोजन ही खाएं और बाहर की खुली चीजों से परहेज करें।
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सीएमओ डॉ. श्रीमोहन झा ने हीटवेव के संभावित प्रभाव को देखते हुए जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में दो-दो बेड आरक्षित कर दिए हैं। इन बेड पर विशेष रूप से हीट स्ट्रोक और लू से प्रभावित मरीजों को तत्काल भर्ती कर इलाज दिया जाएगा। इसके साथ ही अस्पतालों में ओआरएस, आवश्यक दवाएं और ठंडे पानी की व्यवस्था करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
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वहीं जिला अस्पताल में भी तैयारियों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। यहां हीटवेव से प्रभावित मरीजों के लिए अलग से एक वार्ड बनाया गया है। इसमें 10 बेड, कूलिंग व्यवस्था और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा डॉ. शिव मोहन कमल, डॉ. राजेश कुमार वर्मा, डाॅ. अलंकार सोलंकी, डॉ. स्वतंत्र पाल सिंह समेत पैरामेडिकल स्टाफ को भी अलर्ट रहने को कहा गया है, ताकि मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके।
दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक तेज धूप में निकलने से बचें
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने से लू लगने, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, उल्टी, सिरदर्द और बेहोशी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। वहीं, वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. शिव मोहन कमल डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक तेज धूप में निकलने से बचें। पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, छाछ और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें व सिर को ढककर ही बाहर निकलें।
हीटवेव से बचाव के उपाय
-दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचें।
-ज्यादा से ज्यादा पानी और तरल पदार्थ लें।
-हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।
-सिर को गमछा या टोपी से ढककर निकलें।
-खाली पेट बाहर न जाएं।
लू के प्रमुख लक्षण
-तेज बुखार और सिरदर्द
-चक्कर आना और कमजोरी।
-उल्टी या मितली।
-शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)।
-बेहोशी की स्थिति।
सभी सीएचसी, पीएचसी पर दो-दो बेड आरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा कूलर, आइस पैक आदि की भी व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि अगर कोई मरीज पहुंचे तो उसे तुरंत उपचार मिल सके। -डॉ. श्रीमोहन झा, सीएमओ
अस्पताल में अभी अलग से 10 बेड का एक वार्ड आरक्षित किया गया है। वहां पर स्टाफ की तैनाती की गई है, ताकि मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। -अमित वार्ष्णेय, सीएमएस, जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में उमड़ी भीड़, 1149 लोग पहुंचे इलाज कराने
- 494 मरीजों में बुखार व उल्टी-दस्त की शिकायत, अपच और पेट संबंधी दिक्कतें बढ़ीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सोमवार को अस्पताल की ओपीडी में कुल 1149 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। जिससे अस्पताल परिसर में दिनभर भीड़ का माहौल बना रहा। डॉक्टरों को भी लगातार बढ़ रहे मरीजों के दबाव का सामना करना पड़ा।
मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 1149 मरीज पहुंचे। इनमें से 494 मरीज ऐसे रहे, जो बुखार, उल्टी-दस्त और पेट से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित थे। इसके अलावा कई मरीज अपच, पेट फूलने और खट्टी डकार की शिकायत लेकर भी अस्पताल पहुंचे। डॉ. अलंकार सोलंकी के अनुसार बदलते मौसम और खानपान में लापरवाही के चलते इस तरह की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
उनका कहना है कि गर्मी के मौसम में दूषित पानी और बाहर का अस्वच्छ भोजन करने से पेट संबंधी रोग बढ़ जाते हैं। ऐसे में लोगों को खानपान में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है। डॉक्टर ने कहा है कि लोग साफ पानी का सेवन करें, ताजा भोजन ही खाएं और बाहर की खुली चीजों से परहेज करें।

जिला अस्पताल मे बना हीटवेव कक्ष। संवाद- फोटो : Samvad

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