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Budaun News: रील की आदत कर रही याददाश्त कमजोर

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jan 2026 01:30 AM IST
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The habit of watching reels is weakening memory.
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बदायूं। मोबाइल फोन पर रील देखने की आदत अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि यह एक गंभीर मानसिक समस्या बनती जा रही है। बच्चे और महिलाएं सबसे ज्यादा इसकी चपेट में आ रहे हैं। लगातार घंटों मोबाइल स्क्रीन देखने से उनमें चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, याददाश्त कमजोर होना, नींद न आना और बेचैनी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
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जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग में रोजाना दो से तीन ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो मोबाइल की लत से जुड़ी मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट के अनुसार, रील जैसे छोटे-छोटे वीडियो दिमाग को बार-बार तेज उत्तेजना देते हैं, जिससे मस्तिष्क को इसकी आदत लग जाती है और सामान्य गतिविधियों में रुचि कम हो जाती है।
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यही कारण है कि बच्चे पढ़ाई से दूर होते जा रहे हैं। वहीं महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों से कटाव महसूस करने लगी हैं। उनका कहना हैं कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम से हार्मोनल असंतुलन भी होता है। इससे मूड स्विंग, गुस्सा और उदासी बढ़ती है। बच्चों में व्यवहार परिवर्तन, जिद्दीपन और अकेलापन देखा जा रहा है। वहीं महिलाओं में थकान, सिरदर्द, आंखों में जलन और मानसिक तनाव की शिकायतें बढ़ रहीं हैं।

क्या करें
- दिनभर में मोबाइल उपयोग का समय सीमित करें।
- बच्चों को खेल, पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करें।
-परिवार के साथ समय बिताएं और बातचीत बढ़ाएं।
- सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल का उपयोग बंद करें।
- यदि चिड़चिड़ापन, बेचैनी या नींद की समस्या हो तो समय रहते डॉक्टर से सलाह लें।

क्या नहीं करें
- बच्चों को शांत रखने के लिए मोबाइल देना आदत न बनाएं।
- खाना खाते समय या परिवार के साथ बैठकर मोबाइल न चलाएं।
- देर रात तक रील देखने से बचें।
- समस्या को हल्के में न लें या नजरअंदाज न करें।

रील की लत धीरे-धीरे डिजिटल एडिक्शन का रूप ले रही है। यह दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को प्रभावित करती है। इससे व्यक्ति बार-बार मोबाइल देखने के लिए मजबूर होता है। समय रहते नियंत्रण और जागरूकता से इसे रोका जा सकता है। -डॉ. सर्वेश कुमारी, क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट, जिला अस्पताल
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