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Budaun News: कदमनगला के मेंथा प्लांट का भंडार गृह गंगा में समाया, भू-कटान भी हुआ तेज
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कदमनगला बाढ़: रमेश
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उसहैत। बाढ़ के लिहाज से अति संवेदनशील ग्राम कदमनगला में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। गंगा की लहरों से भू-कटान तेजी से हो रहा है। मंगलवार को मेंथा प्लांट का भंडार गृह भी गंगा में समा गया। गंगा का पानी गांव के किनारे पहुंच गया है। छप्परनुमा घरों को भी नुकसान पहुंचा है। पूर्व में माध्यमिक विद्यालय का भवन पहले ही गंगा में समा चुका है। ग्रामीण 20 दिनों से दिक्कतें झेल रहे हैं। मंगलवार को प्रशासन ने गांव में कोई राहत शिविर नहीं लगाया। ग्रामीणों के अनुसार, तीन सौ बीघा भूमि गंगा में समा चुकी है। पशुओं को हरा चारा नहीं मिल रहा है।
कदमनगला गांव में देवेंद्र पाल सिंह का मेंथा प्लांट है। उसका भंडार गृह मंगलवार को गंगा में समा गया। बाढ़ की स्थिति गंभीर देखते हुए ग्रामीणों ने अपने घरों को खाली कर दिया है। घरों में सामान नहीं है। पशुओंं को छोड़ ग्रामीण कहीं और नहीं जा पा रहे। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं मिल रही है, न ही कोई शरणार्थी कैंप ही लगाया गया है।
ऐसे में सड़क किनारे खुले में रहना उनकी मजबूरी है। गंगा रोज भू-कटान कर रही है। खेतीहर भूमि गंगा में समाती जा रही है। कहा कि अब तक करीब तीन सौ बीघा भूमि गंगा में समा चुकी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कोई भी उनकी पीड़ा समझने को तैयार नहीं। न जनप्रतिनिधि हालात देखने आ रहे हैं और न ही प्रशासन सुध ले रहा है। बाढ़ खंड़, प्रशासन के अधिकारी कई बार आए लेकिन गांव को बचाने के कोई प्रयास नहीं हुए है।
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इन गांवों में ज्यादा तबाही मचा रही गंगा
गंगा नदी ने इस बार ग्राम कदमनगला, सिथौली खाम, रैपुरा में सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। इन गांवों की भूमि 22 दिन से लगातार गंगा में समा रही है। ग्रामीण अपने घरों को छोड़कर जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार राजस्व विभाग और बाढ़ खंड के अधिकारी आए, लेकिन सिर्फ वायदे और झूठे आश्वासन ही मिले हैं।
ग्रामीण बोले- 22 दिन से चला आ रहा है भू-कटान
ग्रामीण राजवीर ने बताया कि 22 दिन से भू-कटान जारी है। गांव के चारों ओर पानी भरा हुआ है, जिससे मच्छर भी परेशान कर रहे हैं, न कोई मदद मिली है न किसी कीटनाशक दवा का छिड़काव किया गया है। घर को खाली कर सामान दूसरे गांव में रखवा दिया है।
ग्रामीण रामनिवास ने बताया कि धीरे-धीरे पूरा गांव कट रहा है। उनके खेत गंगा में समा गए हैं, जिसके बाद उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं बचा है, अधिकारी गांव आते हैं और चले जाते हैं। उनको गांव से निकालने या कुछ राहत देने का काम किसी स्तर पर अब तक शुरू नहीं हुआ है।
ग्रामीण रमेश ने बताया कि ग्राम कदमनगला में रहकर खेती करते थे। उनके खेत गंगा में समा गए हैं। अधिकारी कई बार गांव आए, लेकिन कोई मदद की घोषणा नहीं हुई। जिस तरह से भू-कटान हो रहा है, उससे गांव को खतरा बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीण जमींदार ने बताया कि गंगा के कटान से सब कुछ अस्त व्यस्त हो गया है। बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे। अधिकारियों ने कोई मदद नहीं की है। हमें अपने हाल पर छोड़ दिया है। गांव में हालात खराब हो रहे हैं। पशुओं के लिए चारा तक नहीं मिल रहा है।
कदमनगला के प्राथमिक विद्यालय में शरणार्थियों के लिए कैंप तैयार किया जा रहा है, जो ग्रामीण वहां जाना चाहते हैं जा सकते हैं। पशुओं का टीकाकरण भी कराया जाएगा। ग्रामीणों की परेशानियों का हमें अंदाजा है, उन्हें दिक्कतें नहीं होने देंगे। - विनोद कुमार, दातागंज एसडीएम
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कदमनगला गांव में देवेंद्र पाल सिंह का मेंथा प्लांट है। उसका भंडार गृह मंगलवार को गंगा में समा गया। बाढ़ की स्थिति गंभीर देखते हुए ग्रामीणों ने अपने घरों को खाली कर दिया है। घरों में सामान नहीं है। पशुओंं को छोड़ ग्रामीण कहीं और नहीं जा पा रहे। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं मिल रही है, न ही कोई शरणार्थी कैंप ही लगाया गया है।
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ऐसे में सड़क किनारे खुले में रहना उनकी मजबूरी है। गंगा रोज भू-कटान कर रही है। खेतीहर भूमि गंगा में समाती जा रही है। कहा कि अब तक करीब तीन सौ बीघा भूमि गंगा में समा चुकी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कोई भी उनकी पीड़ा समझने को तैयार नहीं। न जनप्रतिनिधि हालात देखने आ रहे हैं और न ही प्रशासन सुध ले रहा है। बाढ़ खंड़, प्रशासन के अधिकारी कई बार आए लेकिन गांव को बचाने के कोई प्रयास नहीं हुए है।
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इन गांवों में ज्यादा तबाही मचा रही गंगा
गंगा नदी ने इस बार ग्राम कदमनगला, सिथौली खाम, रैपुरा में सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। इन गांवों की भूमि 22 दिन से लगातार गंगा में समा रही है। ग्रामीण अपने घरों को छोड़कर जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार राजस्व विभाग और बाढ़ खंड के अधिकारी आए, लेकिन सिर्फ वायदे और झूठे आश्वासन ही मिले हैं।
ग्रामीण बोले- 22 दिन से चला आ रहा है भू-कटान
ग्रामीण राजवीर ने बताया कि 22 दिन से भू-कटान जारी है। गांव के चारों ओर पानी भरा हुआ है, जिससे मच्छर भी परेशान कर रहे हैं, न कोई मदद मिली है न किसी कीटनाशक दवा का छिड़काव किया गया है। घर को खाली कर सामान दूसरे गांव में रखवा दिया है।
ग्रामीण रामनिवास ने बताया कि धीरे-धीरे पूरा गांव कट रहा है। उनके खेत गंगा में समा गए हैं, जिसके बाद उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं बचा है, अधिकारी गांव आते हैं और चले जाते हैं। उनको गांव से निकालने या कुछ राहत देने का काम किसी स्तर पर अब तक शुरू नहीं हुआ है।
ग्रामीण रमेश ने बताया कि ग्राम कदमनगला में रहकर खेती करते थे। उनके खेत गंगा में समा गए हैं। अधिकारी कई बार गांव आए, लेकिन कोई मदद की घोषणा नहीं हुई। जिस तरह से भू-कटान हो रहा है, उससे गांव को खतरा बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीण जमींदार ने बताया कि गंगा के कटान से सब कुछ अस्त व्यस्त हो गया है। बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे। अधिकारियों ने कोई मदद नहीं की है। हमें अपने हाल पर छोड़ दिया है। गांव में हालात खराब हो रहे हैं। पशुओं के लिए चारा तक नहीं मिल रहा है।
कदमनगला के प्राथमिक विद्यालय में शरणार्थियों के लिए कैंप तैयार किया जा रहा है, जो ग्रामीण वहां जाना चाहते हैं जा सकते हैं। पशुओं का टीकाकरण भी कराया जाएगा। ग्रामीणों की परेशानियों का हमें अंदाजा है, उन्हें दिक्कतें नहीं होने देंगे। - विनोद कुमार, दातागंज एसडीएम

कदमनगला बाढ़: रमेश

कदमनगला बाढ़: रमेश

कदमनगला बाढ़: रमेश

कदमनगला बाढ़: रमेश

कदमनगला बाढ़: रमेश

कदमनगला बाढ़: रमेश