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Bulandshahar News: समय पर पूरे नहीं हुए लोकनिर्माण विभाग के 459 कार्य, बजट को सरेंडर करने की तैयारी
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बुलंदशहर। जनपद में लोकनिर्माण विभाग के सड़क चौड़ीकरण, नवनिर्माण और मरम्मत से जुड़े 459 कार्य वित्त वर्ष की समाप्ति तक पूरे नहीं हो सके हैं। तय समय में काम अधूरा रहने के कारण विभाग अब शेष बजट को सरेंडर करने की तैयारी में है। इसके लिए अधिकारी तेजी से लेखाजोखा तैयार करने में जुटे हैं। पांच अप्रैल तक बची धनराशि वापस कर दी जाएगी।
एक्सईएन लोकनिर्माण विभाग राहुल शर्मा ने बताया कि जनपद में इस समय स्टेट हाईवे, प्रमुख जिला मार्ग और अन्य सड़कों के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण के 18 कार्य प्रगति पर हैं। इनकी कुल लंबाई 86 किलोमीटर है और लागत 69.42 करोड़ रुपये है। इसके अलावा 167 किलोमीटर लंबाई की 51 सड़कों का नवनिर्माण कार्य 463.95 करोड़ रुपये की लागत से चल रहा है। वहीं 569 किलोमीटर लंबाई की 390 सड़कों पर मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य 140 करोड़ रुपये की लागत से जारी है।
वित्त वर्ष समाप्त होने तक ये कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं, जिससे बजट का एक हिस्सा खर्च नहीं हो सका। शेष बजट को नियमानुसार सरेंडर किया जाएगा और बाद में कार्यों को पूरा करने के लिए पुनः बजट आवंटन कराया जाएगा।
बजट खर्च करने की कवायद तेज
वित्त वर्ष के अंतिम दिनों में विभागीय अधिकारी आवंटित बजट का अधिकतम उपयोग करने में जुट गए हैं। सोमवार को भी निर्माण कार्यों की रफ्तार बढ़ाने और अधिक से अधिक भुगतान सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए। बजट सरेंडर करने पर दोबारा आवंटन में समय लगने से परियोजनाओं की समयसीमा पर असर पड़ेगा। ऐसे में हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि उपलब्ध धनराशि का अधिकतम उपयोग किया जा सकें।
फाइलों में उलझे नजर आए अधिकारी- कर्मचारी
बुलंदशहर। वित्तीय वर्ष समाप्त होने जा रहा है। एक दिन शेष हैं। यही वजह रही कि सोमवार को वित्तीय कामकाज से जुड़े सरकारी कर्मचारी कार्यालय में फाइलों में जूझते रहे। सबसे अधिक दबाव कोषागार में दिखा। जहां वित्तीय वर्ष समाप्ति को लेकर लेखा-जोखा बंदी का दबाव बढ़ गया है। कोषागार के कर्मचारी जिले के सभी विभागों से समन्वय बनाकर हिसाब-किताब में जुटे हैं। वित्तीय वर्ष समाप्त होने की वजह से सरकारी विभागों में अफसर एवं लेखा विभाग से जुड़े कर्मचारी हिसाब-किताब मिलाने के साथ ही बचे बजट को खर्च करने में जुटे हुए हैं। कई ऐसे विभाग हैं आवंटित बजट का प्रयोग नहीं कर सकेंगे। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से 31 मार्च के मध्य सभी सरकारी विभागों को शासन बजट जारी करता है, जिसका हिसाब-किताब 31 मार्च को देना होता है। अगर रकम बची है तो वह वापस देनी होती है।
विभाग बजट जारी करने वाले विभाग को ही शेष बजट का सरेंडर करते हैं। जिसकी उन्हें जानकारी नहीं दी जाती है। उन्हें केवल उपयोग किए जाने वाले बजट के बारे में जानकारी दी जाती है। - डॉ. अनिल कुमार यादव, वरिष्ठ कोषाधिकारी
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एक्सईएन लोकनिर्माण विभाग राहुल शर्मा ने बताया कि जनपद में इस समय स्टेट हाईवे, प्रमुख जिला मार्ग और अन्य सड़कों के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण के 18 कार्य प्रगति पर हैं। इनकी कुल लंबाई 86 किलोमीटर है और लागत 69.42 करोड़ रुपये है। इसके अलावा 167 किलोमीटर लंबाई की 51 सड़कों का नवनिर्माण कार्य 463.95 करोड़ रुपये की लागत से चल रहा है। वहीं 569 किलोमीटर लंबाई की 390 सड़कों पर मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य 140 करोड़ रुपये की लागत से जारी है।
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वित्त वर्ष समाप्त होने तक ये कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं, जिससे बजट का एक हिस्सा खर्च नहीं हो सका। शेष बजट को नियमानुसार सरेंडर किया जाएगा और बाद में कार्यों को पूरा करने के लिए पुनः बजट आवंटन कराया जाएगा।
बजट खर्च करने की कवायद तेज
वित्त वर्ष के अंतिम दिनों में विभागीय अधिकारी आवंटित बजट का अधिकतम उपयोग करने में जुट गए हैं। सोमवार को भी निर्माण कार्यों की रफ्तार बढ़ाने और अधिक से अधिक भुगतान सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए। बजट सरेंडर करने पर दोबारा आवंटन में समय लगने से परियोजनाओं की समयसीमा पर असर पड़ेगा। ऐसे में हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि उपलब्ध धनराशि का अधिकतम उपयोग किया जा सकें।
फाइलों में उलझे नजर आए अधिकारी- कर्मचारी
बुलंदशहर। वित्तीय वर्ष समाप्त होने जा रहा है। एक दिन शेष हैं। यही वजह रही कि सोमवार को वित्तीय कामकाज से जुड़े सरकारी कर्मचारी कार्यालय में फाइलों में जूझते रहे। सबसे अधिक दबाव कोषागार में दिखा। जहां वित्तीय वर्ष समाप्ति को लेकर लेखा-जोखा बंदी का दबाव बढ़ गया है। कोषागार के कर्मचारी जिले के सभी विभागों से समन्वय बनाकर हिसाब-किताब में जुटे हैं। वित्तीय वर्ष समाप्त होने की वजह से सरकारी विभागों में अफसर एवं लेखा विभाग से जुड़े कर्मचारी हिसाब-किताब मिलाने के साथ ही बचे बजट को खर्च करने में जुटे हुए हैं। कई ऐसे विभाग हैं आवंटित बजट का प्रयोग नहीं कर सकेंगे। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से 31 मार्च के मध्य सभी सरकारी विभागों को शासन बजट जारी करता है, जिसका हिसाब-किताब 31 मार्च को देना होता है। अगर रकम बची है तो वह वापस देनी होती है।
विभाग बजट जारी करने वाले विभाग को ही शेष बजट का सरेंडर करते हैं। जिसकी उन्हें जानकारी नहीं दी जाती है। उन्हें केवल उपयोग किए जाने वाले बजट के बारे में जानकारी दी जाती है। - डॉ. अनिल कुमार यादव, वरिष्ठ कोषाधिकारी