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मोदी सरकार की आयुष्मान योजना के मरीजों को निजी अस्पताल में नहीं मिल रहा उपचार
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मोदी सरकार की आयुष्मान योजना के मरीजों को निजी अस्पताल में नहीं मिल रहा उपचार
बुलंदशहर। निजी अस्पताल संचालकों की मनमानी के चलते जनपद में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना को ग्रहण लगता जा रहा है। योजना में शामिल अस्पताल संचालक लाभार्थी मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी करने लगे हैं। जिसकी स्वास्थ्य अफसरों से प्रतिदिन शिकायतें की जा रही हैं। शिकायत के आधार पर एक अस्पताल को योजना से बाहर किया जा चुका है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 66000 लोगों के गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। योजना के प्रारंभ होने से अब तक केवल 2700 मरीजों को योजना से जुड़े सरकारी और निजी चिकित्सालयों में आयुष्मान योजना का लाभ दिया जा चुका है। वहीं, अधिकांश लाभार्थी मरीजों को लाभ लेने के लिए निजी अस्पताल और स्वास्थ्य अफसरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जानकारी के अनुसार योजना में जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, खुर्जा और सिकंदराबाद का संयुक्त चिकित्सालय को शामिल किया गया। जबकि निजी के लिए शहर के मात्र पांच अस्पतालों को योजना में शामिल किया गया। जिसमें राना हास्पिटल, अमेयश हास्पिटल, ग्लोबल हास्पिटल, शांतिद्वीप हास्पिटल और ओजस आई केयर सेंटर शामिल है। सूत्रों के अनुसार निजी अस्पताल संचालकों द्वारा लाभार्थी मरीजों को भर्ती करने की जगह बेड खाली या सुविधा न होने की बात कहकर टरका दिया जाता है। जबकि, वहीं सुविधा का लाभ मरीजों को पैसे देकर तुरंत दे दिया जाता है। जिसकी प्रतिदिन स्वास्थ्य अफसरों को शिकायतें मिल रही है। शिकायत मिलने पर उच्च अफसरों द्वारा टीम को भेजकर मामले की जांच भी कराई जा रही है। शिकायत के आधार पर ही आयुष्मान योजना पर नजर रखने वाली सांची संस्था द्वारा एक अमेयश अस्पताल को योजना से बाहर कर दिया गया है। नोडल अधिकारी डॉ. सुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि योजना में शामिल कुछ अस्पताल संचालक रुचि नहीं ले रहे हैं। प्रतिदिन आयुष्मान योजना से जुड़े लाभार्थी द्वारा शिकायत मिलने पर जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट उच्च अफसरों को भेज दी जाती है।
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बुलंदशहर। निजी अस्पताल संचालकों की मनमानी के चलते जनपद में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना को ग्रहण लगता जा रहा है। योजना में शामिल अस्पताल संचालक लाभार्थी मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी करने लगे हैं। जिसकी स्वास्थ्य अफसरों से प्रतिदिन शिकायतें की जा रही हैं। शिकायत के आधार पर एक अस्पताल को योजना से बाहर किया जा चुका है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 66000 लोगों के गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। योजना के प्रारंभ होने से अब तक केवल 2700 मरीजों को योजना से जुड़े सरकारी और निजी चिकित्सालयों में आयुष्मान योजना का लाभ दिया जा चुका है। वहीं, अधिकांश लाभार्थी मरीजों को लाभ लेने के लिए निजी अस्पताल और स्वास्थ्य अफसरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जानकारी के अनुसार योजना में जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, खुर्जा और सिकंदराबाद का संयुक्त चिकित्सालय को शामिल किया गया। जबकि निजी के लिए शहर के मात्र पांच अस्पतालों को योजना में शामिल किया गया। जिसमें राना हास्पिटल, अमेयश हास्पिटल, ग्लोबल हास्पिटल, शांतिद्वीप हास्पिटल और ओजस आई केयर सेंटर शामिल है। सूत्रों के अनुसार निजी अस्पताल संचालकों द्वारा लाभार्थी मरीजों को भर्ती करने की जगह बेड खाली या सुविधा न होने की बात कहकर टरका दिया जाता है। जबकि, वहीं सुविधा का लाभ मरीजों को पैसे देकर तुरंत दे दिया जाता है। जिसकी प्रतिदिन स्वास्थ्य अफसरों को शिकायतें मिल रही है। शिकायत मिलने पर उच्च अफसरों द्वारा टीम को भेजकर मामले की जांच भी कराई जा रही है। शिकायत के आधार पर ही आयुष्मान योजना पर नजर रखने वाली सांची संस्था द्वारा एक अमेयश अस्पताल को योजना से बाहर कर दिया गया है। नोडल अधिकारी डॉ. सुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि योजना में शामिल कुछ अस्पताल संचालक रुचि नहीं ले रहे हैं। प्रतिदिन आयुष्मान योजना से जुड़े लाभार्थी द्वारा शिकायत मिलने पर जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट उच्च अफसरों को भेज दी जाती है।
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