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वृंदावन भाव के बिना अधूरी है भगवान की अनुभूति : आचार्य मनीष
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जहांगीराबाद में कथा के दौरान आरती में भाग लेती महिला श्रद्धालु। संवाद
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जहांगीराबाद। नगर के बिजली घर चौराहा स्थित प्राचीन सिद्धेश्वर मंदिर में श्री राम रसायन सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन आचार्य मनीष कौशिक ने कहा कि वृंदावन भाव के बिना भगवान की अनुभूति अधूरी है। कहा कि यदि भगवान को समझना है तो भागवत को जानना होगा, भागवत को जानना है तो गोपियों को समझना होगा और गोपियों को समझना है तो वृंदावन में आस्था धारण करनी होगी।
आचार्य ने कहा कि जीव अनंत जन्मों से अपनी यात्रा करता आ रहा है और इसकी पूर्णता केवल परमात्मा से मिलन में ही संभव है। यह आध्यात्म का चरम अनुभव है, जिसे सौभाग्यशाली आत्माएं ही प्राप्त कर पाती हैं। उन्होंने भागवत कथा को परमात्मा के प्रबल प्रेम का साक्षात स्वरूप बताते हुए कहा कि इसमें सांसारिक संबंध गौण हो जाते हैं और भक्त पूर्णतः ईश्वर प्रेम में लीन हो जाता है।
कंस वध प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि पापी व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसका अंत दयनीय ही होता है। कभी-कभी पाप करने वाला व्यक्ति सुखी दिखाई देता है, लेकिन वह उसके पूर्व जन्मों के पुण्यों का परिणाम होता है। जब उसके पाप प्रकट होते हैं तो उसका पतन निश्चित हो जाता है। इस अवसर पर रुक्मिणी वल्लभ भगवान के विवाह उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। सुंदर झांकियों के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और भजनों पर झूमते नजर आए। कार्यक्रम में कृष्ण कांत वार्ष्णेय, सूर्य प्रकाश बंसल, उमेश वार्ष्णेय, अजय कौशिक, गौरव बंसल, योगेश कंसल, सभासद मनोज गुप्ता, भरत गोयल, पूनम कौशिक व डॉली शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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आचार्य ने कहा कि जीव अनंत जन्मों से अपनी यात्रा करता आ रहा है और इसकी पूर्णता केवल परमात्मा से मिलन में ही संभव है। यह आध्यात्म का चरम अनुभव है, जिसे सौभाग्यशाली आत्माएं ही प्राप्त कर पाती हैं। उन्होंने भागवत कथा को परमात्मा के प्रबल प्रेम का साक्षात स्वरूप बताते हुए कहा कि इसमें सांसारिक संबंध गौण हो जाते हैं और भक्त पूर्णतः ईश्वर प्रेम में लीन हो जाता है।
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कंस वध प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि पापी व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसका अंत दयनीय ही होता है। कभी-कभी पाप करने वाला व्यक्ति सुखी दिखाई देता है, लेकिन वह उसके पूर्व जन्मों के पुण्यों का परिणाम होता है। जब उसके पाप प्रकट होते हैं तो उसका पतन निश्चित हो जाता है। इस अवसर पर रुक्मिणी वल्लभ भगवान के विवाह उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। सुंदर झांकियों के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और भजनों पर झूमते नजर आए। कार्यक्रम में कृष्ण कांत वार्ष्णेय, सूर्य प्रकाश बंसल, उमेश वार्ष्णेय, अजय कौशिक, गौरव बंसल, योगेश कंसल, सभासद मनोज गुप्ता, भरत गोयल, पूनम कौशिक व डॉली शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।