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Bulandshahar News: तलाश खत्म, यादें शेष...93 घंटे बाद मिला चारू का शव
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जिला अस्पातल से पोस्टमार्टम के पांव छात्रा चारु के अंतिम दर्शन को खड़े लोग। संवाद
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बुलंदशहर। चारू सबको रुलाकर चली गई। लगभग 93 घंटे से चल रहा तलाशी अभियान काली नदी में उसकी लाश मिलने के साथ ही थम गया। उसके शव को शनिवार सुबह लगभग साढ़े नौ बजे बागपत के गोताखोर इरफान और उनकी टीम ने घटनास्थल से लगभग दो किमी दूर चावली के पास से बरामद किया।
चारू की सलामती के लिए पूरा शहर दुआएं मांग रहा था। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नगर निगम की टीम और गोताखोर उसे सकुशल बरामद करने के लिए पांच दिन से जी जान से जुटे हुए थे लेकिन सभी को मायूसी हाथ लगी। पोस्टमार्टम के तुरंत बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसे हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
नगर के मोहल्ला साठा धर्मपाल वाली गली निवासी रिंकू कश्यप की 11 वर्षीय बेटी चारू भूतेश्वर मंदिर के सामने स्थित सुशीला पब्लिक स्कूल में कक्षा चार में पढ़ती थी। मंगलवार को लगभग साढ़े बारह बजे वह स्कूल से लौटते समय खुले नाले में बह गई थी।
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उस दौरान बहुत तेज बारिश हो रही थी। उसको उसके भाई और एक अन्य व्यक्ति ने बचाने का प्रयास किया लेकिन पानी का तेज बहाव होने के कारण दोनों नाकाम रहे थे।
छात्रा के नाले में बहने की सूचना जैसे ही उसके भाई गगन ने घर पर दी तो कोहराम मच गया। प्रशासन की ओर से बचाव कार्य शुरू कराया गया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बुलाईं गईं। नावों, मोटरबोट, ड्रोन का सहारा लिया गया। तीन दिन तक जब सफलता नहीं मिली तो चौथे दिन शाम को बागपत के गोताखोर इरफान और उनकी टीम ने मोर्चा संभाला।
अलग-अलग जोन में बांटकर 15 किलोमीटर के दायरे में तलाशी अभियान चलाया गया। पांचवें दिन सुबह से ही इरफान की टीम ने चारू को खोजने के लिए फिर से कमर कसी और लगभग चार घंटे की मशक्कत के बाद आखिरकार खोज निकाला। उसका शव चावली के पास काली नदी में कूड़े में अटका हुआ था।
शव मिलते ही मची चीख पुकार, भाई ने दी मुखाग्नि
चारू के शव के बाहर आते ही वहां मौजूद परिजनों की चीख-पुकार मच गई। जिस बेटी के सुरक्षित लौटने की दुआएं मांगी जा रही थीं, वह अंतिम बार अपने घर भी नहीं पहुंच सकी। पुलिस-प्रशासन ने पोस्टमार्टम के बाद शव एंबुलेंस से सीधा श्मशान घाट भेज दिया।
यहां हजारों लोगों की गमगीन भीड़ के बीच उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसके बड़े भाई गगन ने उसे मुखाग्नि दी। इस दौरान हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था कि अगर समय रहते सुरक्षा के इंतजाम होते तो आज चारू जिंदा होती।
अब तस्वीरों में शेष बची चारू की मुस्कान
चारू की मौत ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही, खुले और असुरक्षित जलमार्गों तथा बचाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब मासूम की मुस्कान सिर्फ तस्वीरों में रह गई है जबकि उसका परिवार जिंदगी भर इस दर्द के साथ जीने को मजबूर होगा।
श्मशान घाट पर बेहोश हुए पिता
शनिवार दोपहर करीब एक बजे पोस्टमार्टम के बाद जब चारू का शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे तो अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान पिता रिंकू रोते-रोते बेहोश हो गए। वहां मौजूद लोगों ने रिंकू को लोगों ने पानी पिलाया और होश में लाने के लिए काफी प्रयास किया। मां ज्ञानवती, दादी और अन्य परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
परिवार को दी चार लाख की आर्थिक मदद
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से चारू के परिजनों को चार लाख रुपये की मदद दी गई है। इसके लिए अधिकारियों ने बताया कि आर्थिक मदद की धनराशि पीड़ित परिजन के खाते में ट्रांसफर कर दी गई है।
कोट-- --
पोस्टमार्टम के बाद चारू के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। पीड़ित परिजनों के खाते में चार लाख रुपये की धनराशि सहायता के तौर पर भेजी गई है। स्कूल प्रबंधन के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट के आधार पर मामले में जांच कराई जा रही है। परिजनों की मांग के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए कदम उठाए जाएंगे। - नितीश कुमार, एडीएम प्रशासन
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चारू की सलामती के लिए पूरा शहर दुआएं मांग रहा था। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नगर निगम की टीम और गोताखोर उसे सकुशल बरामद करने के लिए पांच दिन से जी जान से जुटे हुए थे लेकिन सभी को मायूसी हाथ लगी। पोस्टमार्टम के तुरंत बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसे हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
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नगर के मोहल्ला साठा धर्मपाल वाली गली निवासी रिंकू कश्यप की 11 वर्षीय बेटी चारू भूतेश्वर मंदिर के सामने स्थित सुशीला पब्लिक स्कूल में कक्षा चार में पढ़ती थी। मंगलवार को लगभग साढ़े बारह बजे वह स्कूल से लौटते समय खुले नाले में बह गई थी।
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उस दौरान बहुत तेज बारिश हो रही थी। उसको उसके भाई और एक अन्य व्यक्ति ने बचाने का प्रयास किया लेकिन पानी का तेज बहाव होने के कारण दोनों नाकाम रहे थे।
छात्रा के नाले में बहने की सूचना जैसे ही उसके भाई गगन ने घर पर दी तो कोहराम मच गया। प्रशासन की ओर से बचाव कार्य शुरू कराया गया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बुलाईं गईं। नावों, मोटरबोट, ड्रोन का सहारा लिया गया। तीन दिन तक जब सफलता नहीं मिली तो चौथे दिन शाम को बागपत के गोताखोर इरफान और उनकी टीम ने मोर्चा संभाला।
अलग-अलग जोन में बांटकर 15 किलोमीटर के दायरे में तलाशी अभियान चलाया गया। पांचवें दिन सुबह से ही इरफान की टीम ने चारू को खोजने के लिए फिर से कमर कसी और लगभग चार घंटे की मशक्कत के बाद आखिरकार खोज निकाला। उसका शव चावली के पास काली नदी में कूड़े में अटका हुआ था।
शव मिलते ही मची चीख पुकार, भाई ने दी मुखाग्नि
चारू के शव के बाहर आते ही वहां मौजूद परिजनों की चीख-पुकार मच गई। जिस बेटी के सुरक्षित लौटने की दुआएं मांगी जा रही थीं, वह अंतिम बार अपने घर भी नहीं पहुंच सकी। पुलिस-प्रशासन ने पोस्टमार्टम के बाद शव एंबुलेंस से सीधा श्मशान घाट भेज दिया।
यहां हजारों लोगों की गमगीन भीड़ के बीच उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसके बड़े भाई गगन ने उसे मुखाग्नि दी। इस दौरान हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था कि अगर समय रहते सुरक्षा के इंतजाम होते तो आज चारू जिंदा होती।
अब तस्वीरों में शेष बची चारू की मुस्कान
चारू की मौत ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही, खुले और असुरक्षित जलमार्गों तथा बचाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब मासूम की मुस्कान सिर्फ तस्वीरों में रह गई है जबकि उसका परिवार जिंदगी भर इस दर्द के साथ जीने को मजबूर होगा।
श्मशान घाट पर बेहोश हुए पिता
शनिवार दोपहर करीब एक बजे पोस्टमार्टम के बाद जब चारू का शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे तो अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान पिता रिंकू रोते-रोते बेहोश हो गए। वहां मौजूद लोगों ने रिंकू को लोगों ने पानी पिलाया और होश में लाने के लिए काफी प्रयास किया। मां ज्ञानवती, दादी और अन्य परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
परिवार को दी चार लाख की आर्थिक मदद
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से चारू के परिजनों को चार लाख रुपये की मदद दी गई है। इसके लिए अधिकारियों ने बताया कि आर्थिक मदद की धनराशि पीड़ित परिजन के खाते में ट्रांसफर कर दी गई है।
कोट
पोस्टमार्टम के बाद चारू के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। पीड़ित परिजनों के खाते में चार लाख रुपये की धनराशि सहायता के तौर पर भेजी गई है। स्कूल प्रबंधन के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट के आधार पर मामले में जांच कराई जा रही है। परिजनों की मांग के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए कदम उठाए जाएंगे। - नितीश कुमार, एडीएम प्रशासन

जिला अस्पातल से पोस्टमार्टम के पांव छात्रा चारु के अंतिम दर्शन को खड़े लोग। संवाद

जिला अस्पातल से पोस्टमार्टम के पांव छात्रा चारु के अंतिम दर्शन को खड़े लोग। संवाद

जिला अस्पातल से पोस्टमार्टम के पांव छात्रा चारु के अंतिम दर्शन को खड़े लोग। संवाद