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ट्रिपल मर्डर: काश..भाई को साथ ले आता तो उजड़ती नहीं दुनिया : उधम
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खुर्जा के सुभाष मार्ग स्थित हत्या कांड वाली रात के बारे में जानकारी देते मृतक मनीष व अमरदीप के
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खुर्जा। अगर मैं उस रात मनीष भाई का हाथ पकड़कर खींच लाता, तो आज हमारे घर के आंगन में सन्नाटा नहीं, बल्कि भाइयों की हंसी गूंज रही होती। मेरी एक चूक ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। यह कहते हुए उधम सिंह सैनी का गला रुंध गया और आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। बोले, शनिवार की उस काली रात ने हमारे परिवार के तीन पिंजरों को सदा के लिए खाली कर दिया, और अब पीछे रह गया है तो बस कभी न खत्म होने वाला पछतावा।
उधम सिंह ने रुंधे गले से बताया कि वह और उसका चचेरा भाई मनीष शनिवार रात को एक शादी समारोह में शिरकत कर हंसी-खुशी घर लौट रहे थे। रात के करीब साढ़े नौ बज रहे थे, और मन में घर जल्दी पहुंचने की जल्दबाजी थी। तभी मनीष के मोबाइल फोन की घंटी बजी। फोन पर मिली सूचना ने दोनों के माथे की शिकन बड़ा दी।
जिम पर अमरदीप का झगड़ा होने की सूचना मिलते ही बिना एक पल गंवाए, दोनों भाई बाइक से सीधे जिम पहुंचे। वहां अमरदीप और जीतू सैनी के बीच तीखी बहस हो रही थी। मनीष और उधम ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। उस वक्त लगा कि विवाद टल गया है, लेकिन किसे पता था कि यह शांत समंदर किसी बड़े तूफान की आहट था।
उधम ने बताया कि जब हमलावर जीतू और मयंक वहां से चले गए, तो माहौल सामान्य दिखने लगा था। मोहल्ले के कुछ अन्य युवक भी वहां मौजूद थे। उधम के पास उसके बड़े भाई धर्म का बार-बार फोन आ रहा था कि रात काफी हो गई है, घर आ जाओ। इस दौरान मनीष ने उधम से कहा कि तू घर निकल, मैं अमरदीप और आकाश को लेकर आता हूं। अमरदीप अपनी बियर खत्म करने की बात कहकर रुक गया था।
उधम ने बताया कि यूनान भाई मनीष की बात मान ली और घर की ओर चल दिया लेकिन महज 15 मिनट बाद ही फोन आया कि सब खत्म हो गया। मौके पर पहुंचे तो मनीष, अमरजीत और आकाश के शव पड़े हुए थे। बताया कि जिम के अंदर उस वक्त मनीष, अमरदीप, आकाश, संचालक रूपेश और अमरजीत ही बचे थे, तभी हमलावरों ने लौटकर मौत का नंगा नाच खेला।
उधम को मलाल है कि काश उसने मनीष की बात न मानी होती और उसे जबरन अपने साथ ले आता। वह बार-बार एक ही बात दोहरा रहा है, बुला लाता भाई मनीष को तो बच जाती सबकी जान। मनीष सबसे बड़े ताऊ प्रेम सिंह का बेटा था, जबकि अमरदीप और आकाश दूसरे नंबर के ताऊ सरूप सैनी के परिवार से थे। उधम के पिता नन्हें सैनी तीसरे नंबर के भाई हैं।
दहशत और गम के साये में खुर्जा
इस हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में तनाव और गम का माहौल है। पुलिस आरोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश दे रही है, लेकिन उधम सिंह और उसके परिवार के लिए न्याय की लड़ाई से बड़ी उनकी अपनी यादों की जंग बन गई है।
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उधम सिंह ने रुंधे गले से बताया कि वह और उसका चचेरा भाई मनीष शनिवार रात को एक शादी समारोह में शिरकत कर हंसी-खुशी घर लौट रहे थे। रात के करीब साढ़े नौ बज रहे थे, और मन में घर जल्दी पहुंचने की जल्दबाजी थी। तभी मनीष के मोबाइल फोन की घंटी बजी। फोन पर मिली सूचना ने दोनों के माथे की शिकन बड़ा दी।
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जिम पर अमरदीप का झगड़ा होने की सूचना मिलते ही बिना एक पल गंवाए, दोनों भाई बाइक से सीधे जिम पहुंचे। वहां अमरदीप और जीतू सैनी के बीच तीखी बहस हो रही थी। मनीष और उधम ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। उस वक्त लगा कि विवाद टल गया है, लेकिन किसे पता था कि यह शांत समंदर किसी बड़े तूफान की आहट था।
उधम ने बताया कि जब हमलावर जीतू और मयंक वहां से चले गए, तो माहौल सामान्य दिखने लगा था। मोहल्ले के कुछ अन्य युवक भी वहां मौजूद थे। उधम के पास उसके बड़े भाई धर्म का बार-बार फोन आ रहा था कि रात काफी हो गई है, घर आ जाओ। इस दौरान मनीष ने उधम से कहा कि तू घर निकल, मैं अमरदीप और आकाश को लेकर आता हूं। अमरदीप अपनी बियर खत्म करने की बात कहकर रुक गया था।
उधम ने बताया कि यूनान भाई मनीष की बात मान ली और घर की ओर चल दिया लेकिन महज 15 मिनट बाद ही फोन आया कि सब खत्म हो गया। मौके पर पहुंचे तो मनीष, अमरजीत और आकाश के शव पड़े हुए थे। बताया कि जिम के अंदर उस वक्त मनीष, अमरदीप, आकाश, संचालक रूपेश और अमरजीत ही बचे थे, तभी हमलावरों ने लौटकर मौत का नंगा नाच खेला।
उधम को मलाल है कि काश उसने मनीष की बात न मानी होती और उसे जबरन अपने साथ ले आता। वह बार-बार एक ही बात दोहरा रहा है, बुला लाता भाई मनीष को तो बच जाती सबकी जान। मनीष सबसे बड़े ताऊ प्रेम सिंह का बेटा था, जबकि अमरदीप और आकाश दूसरे नंबर के ताऊ सरूप सैनी के परिवार से थे। उधम के पिता नन्हें सैनी तीसरे नंबर के भाई हैं।
दहशत और गम के साये में खुर्जा
इस हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में तनाव और गम का माहौल है। पुलिस आरोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश दे रही है, लेकिन उधम सिंह और उसके परिवार के लिए न्याय की लड़ाई से बड़ी उनकी अपनी यादों की जंग बन गई है।

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