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Varanasi News: गंगा में मिला 2500 साल पुराना दो क्विंटल का शिवलिंग, काले पत्थर से बना है; मौर्य काल की चर्चा

Mon, 08 Jun 2026 01:23 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 08 Jun 2026 01:23 AM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी के सूजाबाद स्थित शक्ति घाट के पास गंगा से करीब दो क्विंटल वजनी शिवलिंग मिला है। मछुआरों ने एक घंटे की मशक्कत के बाद इसे बाहर निकाला। विद्वान इसकी शैली को मौर्यकालीन बताते हैं। शिवलिंग को गंगा मंदिर में स्थापित किया गया है। इसकी जांच के लिए पुरातत्व विभाग को सूचना दी गई है।

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2500-year-old Shivling weighing two quintals found in Ganges Varanasi black stone linked to Mauryan era
2500 साल पुराने शिवलिंग की पूजा करते स्थानीय लोग। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: गंगा उस पार सूजाबाद क्षेत्र में शक्ति घाट के पास रविवार तड़के गंगा नदी से एक विशाल शिवलिंग मिलने के बाद क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। करीब दो क्विंटल वजनी इस शिवलिंग को काशी के विद्वान प्रारंभिक तौर पर लगभग 2500 वर्ष पुराना और मौर्यकालीन शैली का बता रहे हैं। हालांकि इसकी वास्तविक प्राचीनता का निर्धारण पुरातत्व विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगा।

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जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह कुछ मछुआरे गंगा में जाल डालकर मछली पकड़ रहे थे। इसी दौरान उनके जाल में कोई भारी वस्तु फंस गई। पहले तो मछुआरों को लगा कि कोई बड़ा पत्थर या अन्य वस्तु जाल में अटक गई है, लेकिन जब उसे बाहर निकालने का प्रयास किया गया तो शिवलिंग होने का पता चला। करीब 15 मछुआरों ने एक घंटे की मशक्कत के बाद उसे गंगा से बाहर निकाला।
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शिवलिंग मिलने की सूचना क्षेत्र में तेजी से फैल गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु मौके पर पहुंच गए। बाद में शिवलिंग को पास स्थित मां गंगा मंदिर में स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के पुजारी लालबाबू निषाद ने इसे नंदीश्वर महादेव का स्वरूप बताते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षित रख लिया।

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सूजाबाद निवासी एवं चंदौली के जिला परियोजना अधिकारी दर्शन निषाद ने बताया कि वह सुबह गंगा स्नान के लिए जा रहे थे, तभी उन्हें मछुआरों से शिवलिंग मिलने की सूचना मिली। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से शिवलिंग को बाहर निकलवाया गया और मंदिर तक पहुंचाया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार शिवलिंग काले पत्थर से निर्मित है, जो नेपाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में पाया जाता है। इसकी बनावट और नक्काशी वर्तमान समय के शिवलिंगों से अलग दिखाई देती है। संभावना जताई जा रही है कि किसी प्राचीन मंदिर के बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदा में क्षतिग्रस्त होने के बाद यह शिवलिंग गंगा की धारा में बहते हुए यहां पहुंच गया हो।

घटना की सूचना पुरातत्व विभाग को दे दी गई है। विभागीय जांच और अध्ययन के बाद ही शिवलिंग की वास्तविक आयु, ऐतिहासिक महत्व और मूल स्थान के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

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