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Chandauli News: 2022 में लगाए गए आधे पौधे सूखे, पहचान छिपाने के लिए गड्ढों को कर दिया गया समतल
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कंदवा थाना के पास ग्रो बैग सहित फेंके गए पौधे। संवाद
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पीडीडीयू नगर। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर जिले में लाखों पौधे लगाए जाते हैं। शासन से लक्ष्य तय होता है, विभागों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में फोटो खिंचवाई जाती है।
कुछ महीनों बाद पौधरोपण अभियान की तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है। नौगढ़ के वनांचल में पड़ताल करने पर ऐसी ही हकीकत देखने को मिली। यहां आधे पौधे सूख चुके हैं और पहचान छिपाने के लिए गड्ढों को समतल कर दिया गया है।
पड़ताल में सामने आया कि वर्ष 2022 में नौगढ़ वन क्षेत्र में लगाए गए पौधों में आधे से अधिक सूख चुके हैं। कई स्थानों पर पौधरोपण के गड्ढों तक को समतल कर दिया गया ताकि पौधों के खत्म होने के निशान ही न बचें। वहीं इस वर्ष भी कई जगह पौधरोपण सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित रहा।
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कुछ स्थानों पर पौधे ग्रो बैग सहित सड़क किनारे फेंके मिले, जबकि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लगाए गए पौधे ट्री-गार्ड के अभाव में छुट्टा पशुओं और बकरियों का निवाला बन रहे हैं। सरकार हर साल पौधरोपण पर करोड़ों रुपये खर्च करती है। पौधों की देखरेख, सिंचाई और सुरक्षा के लिए अलग से बजट दिया जाता है।
मनरेगा मजदूरों की तैनाती होती है, जियो टैगिंग कराई जाती है और हर पौधे का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। इसके बावजूद इसके पौधों की जीवित रहने की दर लगातार सवालों के घेरे में है।
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कुछ महीनों बाद पौधरोपण अभियान की तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है। नौगढ़ के वनांचल में पड़ताल करने पर ऐसी ही हकीकत देखने को मिली। यहां आधे पौधे सूख चुके हैं और पहचान छिपाने के लिए गड्ढों को समतल कर दिया गया है।
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पड़ताल में सामने आया कि वर्ष 2022 में नौगढ़ वन क्षेत्र में लगाए गए पौधों में आधे से अधिक सूख चुके हैं। कई स्थानों पर पौधरोपण के गड्ढों तक को समतल कर दिया गया ताकि पौधों के खत्म होने के निशान ही न बचें। वहीं इस वर्ष भी कई जगह पौधरोपण सिर्फ फोटो खिंचवाने तक सीमित रहा।
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कुछ स्थानों पर पौधे ग्रो बैग सहित सड़क किनारे फेंके मिले, जबकि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लगाए गए पौधे ट्री-गार्ड के अभाव में छुट्टा पशुओं और बकरियों का निवाला बन रहे हैं। सरकार हर साल पौधरोपण पर करोड़ों रुपये खर्च करती है। पौधों की देखरेख, सिंचाई और सुरक्षा के लिए अलग से बजट दिया जाता है।
मनरेगा मजदूरों की तैनाती होती है, जियो टैगिंग कराई जाती है और हर पौधे का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। इसके बावजूद इसके पौधों की जीवित रहने की दर लगातार सवालों के घेरे में है।

कंदवा थाना के पास ग्रो बैग सहित फेंके गए पौधे। संवाद