UP: लटकती छतें, झूलती सरिया और ईंटों के नीचे चल रही 50 से ज्यादा दुकानें; दो की मौत से भी नहीं जागा सिस्टम
Chandauli News: वाराणसी में लटकती छतों, झूलती सरियों और जर्जर भवनों के नीचे 50 से अधिक दुकानें संचालित हो रही हैं। दो मजदूरों की मलबे में दबकर मौत के बाद भी व्यवस्था नहीं जागी। रोजाना सैकड़ों लोग इन खतरनाक भवनों के नीचे आवाजाही और खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
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UP News: सड़क चौड़ीकरण के दौरान टूटे भवन अब नगर में बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। कई माह बीत जाने के बाद भी नगर के प्रमुख मार्गों पर दर्जनों भवन जर्जर और खतरनाक स्थिति में खड़े हैं। कहीं छत का हिस्सा आधा टूटा हुआ है, कहीं दीवारें दरक चुकी हैं, तो कहीं सरिया और ईंटें हवा में झूल रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन खतरनाक भवनों के नीचे 50 से अधिक दुकानें, भोजनालय, होटल और अन्य प्रतिष्ठान धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं।
पीडीडीयू जंक्शन और काली मंदिर से गल्ला मंडी तक सड़क चौड़ीकरण के दौरान करीब 200 भवनों और दुकान टूटे हैं। सड़क के नाले की खोदाई चल रही है लेकिन भवनों को न तो पूरी तरह ध्वस्त कराया गया और न ही उन्हें सुरक्षित बनाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया।
नतीजा यह है कि जर्जर भवनों के नीचे दुकानदार और ग्राहक दोनों अपनी जान जोखिम में डालकर रोजाना कारोबार कर रहे हैं। कई भवनों की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। छतों से सरिया बाहर निकली हुई है और ईंट-पत्थर किसी भी समय नीचे गिर सकते हैं।
इसके बावजूद इन भवनों के नीचे होटल, भोजनालय, पान की दुकानें, दवा की दुकानें और फल-सब्जी के ठेले संचालित हो रहे हैं। रोजाना हजारों लोग इन मार्गों से गुजरते हैं, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारी प्रतिदिन इन रास्तों से गुजरते हैं, लेकिन खतरनाक भवनों में चल रही गतिविधियों पर किसी का ध्यान नहीं है। व्यापारी आर्थिक मजबूरियों का हवाला देकर दुकानें चला रहे हैं, जबकि ग्राहकों को संभावित खतरे की कोई जानकारी नहीं है।
सीन-1, स्टेशन गेट पर जर्जर भवन में चल रहा भोजनालय
पीडीडीयू जंक्शन के मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर स्थित भोजनालयों के भवन सड़क चौड़ीकरण के दौरान आंशिक रूप से तोड़े गए थे। वर्तमान में इन भवनों की केवल छत बची हुई है, जिसके किनारों से ईंटें लटक रही हैं और दीवारों में गहरी दरारें दिखाई देती हैं। इसके बावजूद यहां बड़े-बड़े भोजनालय संचालित किए जा रहे हैं और प्रतिदिन 200 से अधिक यात्रियों को बैठाकर भोजन कराया जा रहा है। यदि दीवार या छत का कोई हिस्सा गिर जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है।
सीन-2, लटकी छत के नीचे बिक रही लस्सी
काली मंदिर क्षेत्र में एक आंशिक रूप से ध्वस्त भवन के नीचे लस्सी की दुकान संचालित हो रही है। भवन की आधी से अधिक छत टूटी हुई अवस्था में लटकी है और सरिया व ईंटें नीचे की ओर निकली हुई हैं। इसके बावजूद ग्राहक वहीं खड़े होकर लस्सी पीते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोग इसे खुला खतरा मान रहे हैं।
सीन-3, सरिया में अटके कंक्रीट के बड़े टुकड़े नीचे दवा और सब्जी की दुकान
गल्ला मंडी के सामने सड़क के दक्षिणी किनारे स्थित एक भवन की छत का हिस्सा टूट चुका है। सरिया में फंसे भारी पत्थर और कंक्रीट के टुकड़े हवा के हल्के झोंके से भी नीचे गिर सकते हैं। इसके बावजूद नीचे दवा की दुकान, फल और सब्जी के ठेले लगाए जा रहे हैं। राहगीर भी अनजाने में इसी रास्ते से गुजरते हैं।
सीन-4, आधे टूटे मकान में चल रही पान की दुकान
काली मंदिर के सामने स्थित एक भवन बीच से टूटा हुआ है और उसकी दीवारों में चौड़ी दरारें साफ दिखाई देती हैं। भवन की स्थिति बेहद कमजोर होने के बावजूद उसके नीचे पान और तंबाकू की दुकान संचालित की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बरसात या तेज हवा चली तो भवन का हिस्सा गिर सकता है।
मलबा गिरने से जा चुकी है दो मजदूरों की जान
सड़क चौड़ीकरण के दौरान 7 जून को पंजाब होटल के भवन का मलबा हटाने के समय बड़ा हादसा हुआ था। मलबा गिरने से वाराणसी के बजरडीहा निवासी मजदूर मुहम्मद अली (24) और सद्दाम हुसैन (18) की मौत हो गई थी। इस घटना ने निर्माण कार्य की जोखिमपूर्ण स्थिति को उजागर कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद खतरनाक भवनों को लेकर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। मलबा गिरने से हुई मजदूरों की मौत के बाद मुगलसराय थाना प्रभारी विजय प्रताप ने कहा था कि रात में भवन न तोड़ने का चेतावनी दिया गया है लेकिन हकीकत है है कि ज्यादातर भवन रात में ही तोड़े जा रहे हैं।
महज 400 मीटर दूर थाना, फिर भी नहीं दिख रहा खतरा
जिन जर्जर भवनों में दुकानें और भोजनालय संचालित हो रहे हैं, उनसे मुगलसराय थाना महज 400 मीटर की दूरी पर स्थित है। इस मार्ग से दिनभर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का आवागमन रहता है। इसके बावजूद टूटे भवनों के नीचे लोगों को बैठाकर भोजन कराया जा रहा है और व्यापारिक गतिविधियां जारी हैं। स्थानीय नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों कर रहे हैं।
लोगों ने कहा, प्रशासन को लगानी चाहिए रोक
टूटे हुए भवनों के नीचे रोज सैकड़ों लोग खरीदारी करने आते हैं। कई जगह ईंटें और सरिया लटक रही हैं। अगर अचानक कोई हिस्सा गिर गया तो बड़ी जनहानि हो सकती है। टूटे भवन के नीचे 50 से ज्यादा लोगों को बैठाकर खाना खिलाया जा रहा है। - अभिषेक पासवान, पीडीडीयू नगर
दो मजदूरों की मौत के बाद प्रशासन को और सतर्क होना चाहिए था, लेकिन आज भी कई खतरनाक भवनों के नीचे दुकानें चल रही हैं। यह सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है। ऐसे भवनों को चिन्हित कर तत्काल सुरक्षा घेरा बनाना चाहिए और व्यापारिक गतिविधियां रोकनी चाहिए। - मन्नू बिंद, पीडीडीूय नगर
सबसे ज्यादा खतरा इन कारणों से
- छतों से लटक रही ईंटें और कंक्रीट के टुकड़े
- बाहर निकली और जंग लगी सरिया
- दीवारों में गहरी दरारें
- बरसात में भवन कमजोर होने की आशंका
- नीचे बैठते हैं सैकड़ों ग्राहक और राहगीर
लोगों की प्रमुख मांगें
- टूटे भवनों की तत्काल जांच हो।
- खतरनाक स्थलों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
- जर्जर भवनों के नीचे चल रही दुकानों को हटाया जाए।
- हादसा रोकने के लिए बैरिकेडिंग की जाए।
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
टूटे हुए भवनों में दुकानें, होटल आदि चलाने से बहुत बड़ा जोखिम हो सकता है। इसे लेकर शुक्रवार से अभियान चलाया जाएगा। ऐसे भवन जो खतरनाक स्थिति में हैं, उनके नीचे इस तरह से दुकानें संचालित नहीं होने दी जाएंगी। - राजीव मोहन सक्सेना, एसडीएम, पीडीडीयू नगर