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UP: काॅलर और कान में माइक्रो डिवाइस छिपाकर पेपर हल कराते थे साॅल्वर, 13 अरेस्ट; दो सगे भाई चला रहे थे गिरोह

Mon, 13 Jul 2026 08:58 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Mon, 13 Jul 2026 08:58 AM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी में सहायक बोरिंग टेक्नीशियन भर्ती परीक्षा में सॉल्वर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने सरगना समेत 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरोह के दो सगे भाई इसका संचालन कर रहे थे। अभ्यर्थियों के कॉलर और कान में छिपाए माइक्रो डिवाइस के जरिए प्रश्नपत्र हल कराया जाता था। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य साक्ष्य भी बरामद किए।

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Solvers helped candidates take exams using micro-devices hidden in collars and ears 13 arrested in varanasi
सहायक बोरिंग टेक्नीशियन मुख्य परीक्षा में नकल कराने वाले आरोपी। - फोटो : संवाद

विस्तार

Assistant Boring Technician Main Examination: सहायक बोरिंग टेक्नीशियन मुख्य परीक्षा में नकल कराने वाले सॉल्वर गिरोह के सरगना समेत 13 आरोपियों को एसटीएफ वाराणसी इकाई ने वाराणसी के दो परीक्षा केंद्रों और प्रयागराज से गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से 11 मोबाइल फोन, चार माइक्रो डिवाइस, दो प्रिंटर, दो प्रवेश पत्र, दो प्रश्नपत्र और दो ओएमआर शीट बरामद की गईं। गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों के शर्ट के काॅलर और कान में माइक्रो डिवाइस छिपाकर उन्हें परीक्षा केंद्र के अंदर भेजते थे।

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इनकी हुई गिरफ्तारी

एसटीएफ वाराणसी इकाई के फील्ड निरीक्षक अनिल कुमार सिंह और राघवेंद्र सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का सरगना प्रयागराज के बहरिया थाना क्षेत्र के कोठारी रामगढ़ निवासी कप्तान सिंह पटेल, ओमप्रकाश सिंह पटेल, सराय ममरेज थाना क्षेत्र के सोनबरसा निवासी राकेश कुमार पटेल, प्रतापगढ़ के पट्टी थाना क्षेत्र के श्रीनाथपुर निवासी रविकांत वर्मा, प्रयागराज के उतरांव थाना क्षेत्र के यासीनपुर निवासी धर्मेंद्र कुमार सिंह, फूलपुर निवासी लालता प्रसाद उर्फ गुड्डू, सोरांव थाना क्षेत्र के डिहा मौरव निवासी अनुज कुमार पाल, उतरांव थाना क्षेत्र के मैथईपुर निवासी शिवप्रकाश पटेल, प्रतापगढ़ के जेठवारा थाना क्षेत्र के नंदा का पुरवा निवासी मनोज कुमार, प्रतापगढ़ के पट्टी थाना क्षेत्र के रायपुर निवासी अभ्यर्थी विपिन कुमार वर्मा, पट्टी थाना क्षेत्र के रमईपुर नेवादा निवासी अभ्यर्थी धर्मेंद्र कुमार, प्रतापगढ़ के लालगंज थाना क्षेत्र के मुडियन का पूरा निवासी चंदर तथा प्रतापगढ़ के पट्टी थाना क्षेत्र के बेसार सलाहपुर निवासी दीपक पटेल शामिल हैं।

मैदागिन स्थित हरिश्चंद्र बालिका इंटर कॉलेज से अभ्यर्थी विपिन कुमार वर्मा और सिगरा के लल्लापुरा स्थित एंग्लो इंडियन मुस्लिम इंटर कॉलेज से अभ्यर्थी धर्मेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के खिलाफ सिगरा और कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरोह के मुख्य सरगना शिवजीत पटेल और राजेंद्र यादव उर्फ धीरेंद्र यादव की तलाश में एसटीएफ दबिश दे रही है।

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नकल कराने के लिए अभ्यर्थियों से लिए थे 5-5 लाख रुपये
पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूलता था। गिरोह ने अभ्यर्थी धर्मेंद्र कुमार से कप्तान सिंह के खाते में 3.75 लाख रुपये ट्रांसफर कराए थे और 1.25 लाख रुपये नकद लिए थे। दूसरे अभ्यर्थी विपिन कुमार वर्मा से परीक्षा पास कराने के लिए पांच लाख रुपये नकद और 25 हजार रुपये इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के नाम पर लिए गए थे। 

एसटीएफ के अनुसार, कप्तान सिंह पटेल का भाई शिवजीत पटेल, दीपक पटेल और राजेंद्र यादव उर्फ धीरेंद्र यादव प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल कराने वाले एक संगठित गिरोह का संचालन करते हैं, जिसका मुख्य सरगना शिवजीत पटेल है। गिरोह के सदस्य रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे। उन्हें सॉल्वर के माध्यम से परीक्षा पास कराने और सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर अपने जाल में फंसाते थे।

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दो सगे भाई चला रहे थे गिरोह
परीक्षा शुरू होने के बाद आरोपी राजेंद्र यादव प्रश्नपत्र की व्यवस्था कर उसे कप्तान सिंह और शिवजीत पटेल तक पहुंचाता था। प्रयागराज में एक गुप्त स्थान पर बैठे सॉल्वरों को प्रत्येक पेपर हल करने के लिए 20 से 25 हजार रुपये दिए जाते थे। सॉल्वर प्रश्नपत्र हल कर मोबाइल के माध्यम से परीक्षा केंद्र में बैठे अभ्यर्थियों के कान में लगे माइक्रो डिवाइस पर सही उत्तर बताते थे। परीक्षा के दौरान माइक्रो डिवाइस की व्यवस्था दीपक पटेल और राजेंद्र यादव उर्फ धीरेंद्र यादव करते थे। 

कप्तान सिंह पटेल और शिवजीत पटेल सगे भाई हैं। सॉल्वरों को पहले से बताया जाता था कि किस अभ्यर्थी के डिवाइस पर उत्तर भेजना है। प्रश्नपत्र मिलते ही उसे तुरंत सॉल्वरों तक पहुंचा दिया जाता था। इसके बाद सॉल्वर प्रश्न संख्या के अनुसार सही उत्तर फोन के माध्यम से बताते थे। गिरोह का एक सदस्य परीक्षा केंद्र के बाहर रहकर गतिविधियों पर भी नजर रखता था।

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