{"_id":"6a304f915b22d1db8c077500","slug":"10-lakh-devotees-took-a-holy-dip-in-the-mandakini-river-on-somvati-amavasya-chitrakoot-news-c-215-1-ckt1007-132459-2026-06-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chitrakoot News: सोमवती अमावस्या पर 10 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई मंदाकिनी में डुबकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chitrakoot News: सोमवती अमावस्या पर 10 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई मंदाकिनी में डुबकी
विज्ञापन
फोटो 15 सीकेटीपी-01-मंदाकिनी में डुबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : 1
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
खोही (चित्रकूट)। ज्येष्ठ माह की सोमवती अमावस्या पर सोमवार को करीब 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगाई और भगवान कामतानाथ के दर्शन कर सुख-समृद्धि मांगी। मलमास के अंतिम दिन होने से इस अमावस्या का महत्व बढ़ गया था। श्रद्धालु रविवार से ही कानपुर, प्रयागराज समेत आसपास के जिलों से चित्रकूट पहुंचने लगे थे। वे रेल, बस और निजी वाहनों से यहां आए। सोमवार की भोर से ही रामघाट समेत अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी नदी में स्नान किया। यह सिलसिला देर शाम तक चला।
स्नान के बाद भक्तों ने सूर्यदेव को अर्घ्य दिया और पुरोहितों को दान-दक्षिणा भेंट की। इसके बाद उन्होंने भगवान मत्तगजेंद्र नाथ व कामतानाथ के दर्शन कर परिक्रमा लगाई। रामघाट, कामतानाथ मंदिर और परिक्रमा मार्ग सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दिनभर भारी भीड़ रही।
जाम और गर्मी ने बढ़ाई श्रद्धालुओं की परेशानी
तेज धूप और यातायात जाम ने श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ा दीं। यूपी-एमपी सीमा, कामतानाथ व आरोग्यधाम जाने वाले मार्गों पर लंबा जाम लग गया। कई स्थानों पर दो से तीन हजार श्रद्धालु घंटों तक फंसे रहे। डेढ़ किलोमीटर लंबे जाम में भीड़ नियंत्रित करने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बेड़ी पुलिया में पेयजल की व्यवस्था न होने से भी लोग परेशान रहे।
विज्ञापन
बसें और स्पेशल ट्रेनें भी पड़ीं कम
श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षा से अधिक होने के कारण परिवहन व्यवस्था भी लड़खड़ा गई। अमावस्या मेले पर चलाई गई 45 अतिरिक्त रोडवेज बसें और रेलवे की दो स्पेशल ट्रेनें भी पर्याप्त साबित नहीं हुईं। बस स्टैंड, बेड़ी पुलिया और कर्वी क्षेत्र में यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। बसों और ट्रेनों में सीट पाने के लिए भारी भीड़ उमड़ी और अधिकांश यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा।
जगह-जगह भंडारे
विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया। रामघाट, परिक्रमा मार्ग, बराह हनुमान मंदिर, भरतकूप मंदिर और शंख चौराहा सहित कई स्थानों पर शरबत, पूड़ी-सब्जी और पेयजल की व्यवस्था की गई। प्रशासन की ओर से भी राहत शिविर लगाकर श्रद्धालुओं को भोजन और शीतल पेय उपलब्ध कराए गए।
चार किमी पहले रोक दी गईं गाडि़यां
वाहनों की भीड़ रोकने के लिए शंख चौराहे से ही प्रशासन ने गाड़ियों को रोक दिया। श्रद्धालु करीब चार किमी की पैदल यात्रा करके परिक्रमा मार्ग तक पहुंचे। इसके बाद फिर से वापसी में परेशान हुए। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग व बच्चों को भीषण धूप में हुई।
फतेहपुर के जितेंद्र सिंह ने बताया कि शंख चौराहे पर गाड़ी रोके जाने के कारण मां व पिता जी को परेशान होना पड़ा। चार किमी पैदल चलने में कई स्थान पर उन्हें ग्लूकोज पिलाना पड़ा। बुजुर्गों व बच्चों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। कानपुर की गरिमा देवी ने बताया कि घाट में तेज धूप व परिक्रमा तक पैदल ही बच्चों के साथ जाना परेशानी भरा रहा। घंटों जाम में दिक्कतें बढ़ गईं। पेयजल की समुचित न होने पर कई बार पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ी।
स्नान के बाद भक्तों ने सूर्यदेव को अर्घ्य दिया और पुरोहितों को दान-दक्षिणा भेंट की। इसके बाद उन्होंने भगवान मत्तगजेंद्र नाथ व कामतानाथ के दर्शन कर परिक्रमा लगाई। रामघाट, कामतानाथ मंदिर और परिक्रमा मार्ग सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दिनभर भारी भीड़ रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
जाम और गर्मी ने बढ़ाई श्रद्धालुओं की परेशानी
तेज धूप और यातायात जाम ने श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ा दीं। यूपी-एमपी सीमा, कामतानाथ व आरोग्यधाम जाने वाले मार्गों पर लंबा जाम लग गया। कई स्थानों पर दो से तीन हजार श्रद्धालु घंटों तक फंसे रहे। डेढ़ किलोमीटर लंबे जाम में भीड़ नियंत्रित करने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बेड़ी पुलिया में पेयजल की व्यवस्था न होने से भी लोग परेशान रहे।
बसें और स्पेशल ट्रेनें भी पड़ीं कम
श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षा से अधिक होने के कारण परिवहन व्यवस्था भी लड़खड़ा गई। अमावस्या मेले पर चलाई गई 45 अतिरिक्त रोडवेज बसें और रेलवे की दो स्पेशल ट्रेनें भी पर्याप्त साबित नहीं हुईं। बस स्टैंड, बेड़ी पुलिया और कर्वी क्षेत्र में यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। बसों और ट्रेनों में सीट पाने के लिए भारी भीड़ उमड़ी और अधिकांश यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा।
जगह-जगह भंडारे
विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया। रामघाट, परिक्रमा मार्ग, बराह हनुमान मंदिर, भरतकूप मंदिर और शंख चौराहा सहित कई स्थानों पर शरबत, पूड़ी-सब्जी और पेयजल की व्यवस्था की गई। प्रशासन की ओर से भी राहत शिविर लगाकर श्रद्धालुओं को भोजन और शीतल पेय उपलब्ध कराए गए।
चार किमी पहले रोक दी गईं गाडि़यां
वाहनों की भीड़ रोकने के लिए शंख चौराहे से ही प्रशासन ने गाड़ियों को रोक दिया। श्रद्धालु करीब चार किमी की पैदल यात्रा करके परिक्रमा मार्ग तक पहुंचे। इसके बाद फिर से वापसी में परेशान हुए। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग व बच्चों को भीषण धूप में हुई।
फतेहपुर के जितेंद्र सिंह ने बताया कि शंख चौराहे पर गाड़ी रोके जाने के कारण मां व पिता जी को परेशान होना पड़ा। चार किमी पैदल चलने में कई स्थान पर उन्हें ग्लूकोज पिलाना पड़ा। बुजुर्गों व बच्चों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। कानपुर की गरिमा देवी ने बताया कि घाट में तेज धूप व परिक्रमा तक पैदल ही बच्चों के साथ जाना परेशानी भरा रहा। घंटों जाम में दिक्कतें बढ़ गईं। पेयजल की समुचित न होने पर कई बार पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ी।

फोटो 15 सीकेटीपी-01-मंदाकिनी में डुबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : 1

फोटो 15 सीकेटीपी-01-मंदाकिनी में डुबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : 1

फोटो 15 सीकेटीपी-01-मंदाकिनी में डुबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : 1

फोटो 15 सीकेटीपी-01-मंदाकिनी में डुबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : 1

फोटो 15 सीकेटीपी-01-मंदाकिनी में डुबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : 1