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Chitrakoot News: डॉक्टर देर से पहुंचते, इंतजार में मरीज होते बेहाल
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फोटो 25सीकेटीपी 07 इमरजेंसी वार्ड के बाहर ड्यूटी चार्ट पर अंकित 25 मई 2025 तारीख। संवाद
पड़ताल का लोगो
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल, पर्चा काउंटर भी रहती मरीजों की भीड़
संवाद न्यूज़ एजेंसी
चित्रकूट। जिला अस्पताल में मंगलवार को स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई। अमर उजाला की जिला अस्पताल में इमरजेंसी व ओपीडी की पड़ताल में सुबह आठ बजे के बाद कई विभागों के कक्ष खुले थे और वहां पर कुर्सियां भी सजी थीं मगर पर डॉक्टर नदारद थे। हालांकि मरीज और तीमारदार डॉक्टरों के आने की प्रतीक्षा में थे।
बुधवार की सुबह 8.10 बजे टीम जिला अस्पताल पहुंची। काउंटर पर पर्चा बनवाने के लिए बीस से 25 मरीज व तीमारदार लाइन में खड़े थे, जिनके पर्चे बन गए थे, वो आवंटित डॉक्टर कक्ष पहुंच रहे थे। इसके बाद टीम इमरजेंसी वार्ड की तरफ गई। यहां वार्ड के बाहर लगे ड्यूटी चार्ट बोर्ड पर 25 मई 2025 के बाद से तारीख नहीं बदली गई थी। बोर्ड पर डॉ. जितेंद्र का नाम दर्ज था, जबकि डॉ. शिखर अग्रवाल मौजूद मिले। वहां से टीम ओपीडी की ओर गई।
हड्डी रोग, बाल रोग और सर्जन समेत अन्य कई डॉक्टरों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं लेकिन डॉक्टर नहीं आए थे। जबकि उस वक्त घड़ी की सुई करीब साढ़े आठ बजा चुकी थी। हालांकि मरीज और तीमारदार डॉक्टरों के आने का इंतजार कर रहे थे। कर्वी के मरीज अमर ने पैर में चोट के बावजूद डॉक्टर का इंतजार करने की बात कही, जबकि भौंरी की सहदेइया कान दर्द के इलाज के लिए घंटों बैठी रहीं। मरीजों का कहना है कि जिला अस्पताल में अक्सर डॉक्टर समय से नहीं पहुंचते हैं।
केस-एक
फोटो 25सीकेटीपी 10 कक्ष में मरीज को देखते फिजीशियन। संवाद
बुधवार को सुबह 8.17 बजे कक्ष संख्या सात में वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. आरबी लाल, एक महिला व पुरुष मरीज का इलाज करते हुए मिले। कुछ मरीज कक्ष के बाहर खड़े थे, जो अपने नंबर आने का इंतजार करते नजर आए।
केस-दो
फोटो 25सीकेटीपी 08 बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष में खाली कुर्सी। संवाद
कक्ष संख्या पांच में 8.25 बजे तक बाल रोग विशेषज्ञ की कुर्सियां खाली पड़ी थी। इसके बाद डॉ हरिश्चंद्र अग्रवाल पहुंचे तो मरीजों का इलाज शुरू किया। डॉ ने बताया कि ओपीडी में आने के बाद भर्ती बच्चों को देखने चले गए थे। कुछ देर बाद आकर फिर ओपीडी में मरीजों को देखने लगे।
केस-तीन
फोटो 25सीकेटीपी 12 ईएनटी कक्ष में विशेषज्ञ की खाली कुर्सी। संवाद
कान, नाक, गला रोग विशेषज्ञ की भी कुर्सी 8.35 बजे तक खाली रही। कई मरीज कक्ष में पहुंचे लेकिन खाली कुर्सी देख कर बाहर बैठ गए। डॉ मृदुल कुमार तिवारी ने बताया कि आज अस्पताल में पहुंचने में कुछ देर हो गई थी। मरीजों का इलाज किया गया है।
केस-चार
फोटो 25सीकेटीपी 11 आयुष विंग में डॉक्टर की खाली पड़ी कुर्सी। संवाद
आयुष विंग के डॉक्टर रवि द्विवेदी व डॉ. रत्ना द्विवेदी भी 8.55 बजे तक कुर्सियाँ खाली रहीं। उस समय केवल फार्मासिस्ट ही पहुंचे थे। जो आराम फरमा रहे थे। मरीज पहुंचते और डॉक्टर के बारे में पूछ कर लौट जा रहे थे। डॉ. रवि द्विवेदी ने बताया कि उनके बेटे को स्कूल में परीक्षा परिणाम मिलना था, सीएमएस को लिखित पत्र देकर आए हैं। दोपहर 11.30 बजे तक पहुंच जाएंगे।
केस-पांच
फोटो 25सीकेटीपी 09 हड्डी रोग विशेषज्ञ कक्ष में खाली कुर्सी। संवाद
कक्ष संख्या दो में हड्डी रोग विशेषज्ञ भी 8.45 बजे तक गायब थे। कक्ष के बाहर बैठ कर मरीज डॉक्टरों का इंतजार कर रहे थे। डॉ एके मोहन ने बताया कि वह अस्पताल आ गए थे, वार्डों में मरीजों को देख रहे थे।
बोले जिम्मेदार
डॉ. रवि द्विवेदी व डॉ. रत्ना द्विवेदी एक घंटे लेट आने की सूचना दी थी। अन्य डॉक्टर अस्पताल पहुंचने के बाद पहले भर्ती मरीजों को देखने जाते हैं, उसके बाद ओपीडी में बैठते हैं। हो सकता है कि इस कारण ओपीडी में बैठने में देरी हो गई हो। डॉ.- शैलेंद्र कुमार, सीएमएस, संयुक्त जिला अस्पताल।
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जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल, पर्चा काउंटर भी रहती मरीजों की भीड़
संवाद न्यूज़ एजेंसी
चित्रकूट। जिला अस्पताल में मंगलवार को स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई। अमर उजाला की जिला अस्पताल में इमरजेंसी व ओपीडी की पड़ताल में सुबह आठ बजे के बाद कई विभागों के कक्ष खुले थे और वहां पर कुर्सियां भी सजी थीं मगर पर डॉक्टर नदारद थे। हालांकि मरीज और तीमारदार डॉक्टरों के आने की प्रतीक्षा में थे।
बुधवार की सुबह 8.10 बजे टीम जिला अस्पताल पहुंची। काउंटर पर पर्चा बनवाने के लिए बीस से 25 मरीज व तीमारदार लाइन में खड़े थे, जिनके पर्चे बन गए थे, वो आवंटित डॉक्टर कक्ष पहुंच रहे थे। इसके बाद टीम इमरजेंसी वार्ड की तरफ गई। यहां वार्ड के बाहर लगे ड्यूटी चार्ट बोर्ड पर 25 मई 2025 के बाद से तारीख नहीं बदली गई थी। बोर्ड पर डॉ. जितेंद्र का नाम दर्ज था, जबकि डॉ. शिखर अग्रवाल मौजूद मिले। वहां से टीम ओपीडी की ओर गई।
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हड्डी रोग, बाल रोग और सर्जन समेत अन्य कई डॉक्टरों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं लेकिन डॉक्टर नहीं आए थे। जबकि उस वक्त घड़ी की सुई करीब साढ़े आठ बजा चुकी थी। हालांकि मरीज और तीमारदार डॉक्टरों के आने का इंतजार कर रहे थे। कर्वी के मरीज अमर ने पैर में चोट के बावजूद डॉक्टर का इंतजार करने की बात कही, जबकि भौंरी की सहदेइया कान दर्द के इलाज के लिए घंटों बैठी रहीं। मरीजों का कहना है कि जिला अस्पताल में अक्सर डॉक्टर समय से नहीं पहुंचते हैं।
केस-एक
फोटो 25सीकेटीपी 10 कक्ष में मरीज को देखते फिजीशियन। संवाद
बुधवार को सुबह 8.17 बजे कक्ष संख्या सात में वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. आरबी लाल, एक महिला व पुरुष मरीज का इलाज करते हुए मिले। कुछ मरीज कक्ष के बाहर खड़े थे, जो अपने नंबर आने का इंतजार करते नजर आए।
केस-दो
फोटो 25सीकेटीपी 08 बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष में खाली कुर्सी। संवाद
कक्ष संख्या पांच में 8.25 बजे तक बाल रोग विशेषज्ञ की कुर्सियां खाली पड़ी थी। इसके बाद डॉ हरिश्चंद्र अग्रवाल पहुंचे तो मरीजों का इलाज शुरू किया। डॉ ने बताया कि ओपीडी में आने के बाद भर्ती बच्चों को देखने चले गए थे। कुछ देर बाद आकर फिर ओपीडी में मरीजों को देखने लगे।
केस-तीन
फोटो 25सीकेटीपी 12 ईएनटी कक्ष में विशेषज्ञ की खाली कुर्सी। संवाद
कान, नाक, गला रोग विशेषज्ञ की भी कुर्सी 8.35 बजे तक खाली रही। कई मरीज कक्ष में पहुंचे लेकिन खाली कुर्सी देख कर बाहर बैठ गए। डॉ मृदुल कुमार तिवारी ने बताया कि आज अस्पताल में पहुंचने में कुछ देर हो गई थी। मरीजों का इलाज किया गया है।
केस-चार
फोटो 25सीकेटीपी 11 आयुष विंग में डॉक्टर की खाली पड़ी कुर्सी। संवाद
आयुष विंग के डॉक्टर रवि द्विवेदी व डॉ. रत्ना द्विवेदी भी 8.55 बजे तक कुर्सियाँ खाली रहीं। उस समय केवल फार्मासिस्ट ही पहुंचे थे। जो आराम फरमा रहे थे। मरीज पहुंचते और डॉक्टर के बारे में पूछ कर लौट जा रहे थे। डॉ. रवि द्विवेदी ने बताया कि उनके बेटे को स्कूल में परीक्षा परिणाम मिलना था, सीएमएस को लिखित पत्र देकर आए हैं। दोपहर 11.30 बजे तक पहुंच जाएंगे।
केस-पांच
फोटो 25सीकेटीपी 09 हड्डी रोग विशेषज्ञ कक्ष में खाली कुर्सी। संवाद
कक्ष संख्या दो में हड्डी रोग विशेषज्ञ भी 8.45 बजे तक गायब थे। कक्ष के बाहर बैठ कर मरीज डॉक्टरों का इंतजार कर रहे थे। डॉ एके मोहन ने बताया कि वह अस्पताल आ गए थे, वार्डों में मरीजों को देख रहे थे।
बोले जिम्मेदार
डॉ. रवि द्विवेदी व डॉ. रत्ना द्विवेदी एक घंटे लेट आने की सूचना दी थी। अन्य डॉक्टर अस्पताल पहुंचने के बाद पहले भर्ती मरीजों को देखने जाते हैं, उसके बाद ओपीडी में बैठते हैं। हो सकता है कि इस कारण ओपीडी में बैठने में देरी हो गई हो। डॉ.- शैलेंद्र कुमार, सीएमएस, संयुक्त जिला अस्पताल।