{"_id":"6992127effca7672500fb34c","slug":"ramayana-mela-a-confluence-of-cultural-unity-and-universal-message-chitrakoot-news-c-215-1-aur1007-127113-2026-02-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामायण मेला: सांस्कृतिक एकता और सार्वभौमिक संदेश का संगम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामायण मेला: सांस्कृतिक एकता और सार्वभौमिक संदेश का संगम
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Mon, 16 Feb 2026 12:07 AM IST
विज्ञापन
फोटो 15सीकेटीपी 27 मेला महोत्सव में बोलते अयोध्या से आए जगद्गुरु श्री राघवाचार्य। संवाद
विज्ञापन
चित्रकूट। अयोध्या से आए जगद्गुरु स्वामी राघवाचार्य ने रविवार को रामायण मेला महोत्सव के उद्घाटन समारोह में रामचरितमानस को विश्व का प्रथम ग्रंथ बताते हुए इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि रामायण भारत की आत्मा है और इसका संदेश जन-जन तक पहुंचाना ही रामायण मेलों का मूल उद्देश्य है। जगद्गुरु ने भगवान श्रीराम को सभी जीवों की आत्मा बताया और कहा कि ईश्वर का एक नाम न्याय भी है।
रामायण मेला प्रेक्षागृह में जगद्गुरु श्री राघवाचार्य ने चित्रकूट और अयोध्या की समानता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने जानकी जी को बताया था कि चित्रकूट का पर्वत ही अयोध्या है और यहां के जीवों को अयोध्यावासी समझना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चित्रकूट में भगवान राम का नित्य वास है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है। इसका संदेश सभी समुदायों और वर्गों के लिए प्रासंगिक है।
प्रदेश सरकार के जल शक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने रामायण को केवल एक धार्मिक ग्रंथ न बताकर, इसे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक करार दिया। कहा कि रामायण का प्रभाव विश्व के उन सभी कोनों तक पहुंचा है, जहां भारतीय संस्कृति की जड़ें फैली हुई हैं।
महोत्सव की अध्यक्षता करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने तुलसीदास के रामचरितमानस का उल्लेख किया। कहा कि जो जिस कार्य में लगा है, उसे सत्य के साथ करे और उसी को ईश्वर की पूजा का मार्ग माने। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि यह ग्रंथ सत्य की असत्य पर विजय का है और यह सिखाता है कि धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर बार-बार जन्म लेंगे।
Trending Videos
रामायण मेला प्रेक्षागृह में जगद्गुरु श्री राघवाचार्य ने चित्रकूट और अयोध्या की समानता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने जानकी जी को बताया था कि चित्रकूट का पर्वत ही अयोध्या है और यहां के जीवों को अयोध्यावासी समझना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चित्रकूट में भगवान राम का नित्य वास है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है। इसका संदेश सभी समुदायों और वर्गों के लिए प्रासंगिक है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदेश सरकार के जल शक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने रामायण को केवल एक धार्मिक ग्रंथ न बताकर, इसे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक करार दिया। कहा कि रामायण का प्रभाव विश्व के उन सभी कोनों तक पहुंचा है, जहां भारतीय संस्कृति की जड़ें फैली हुई हैं।
महोत्सव की अध्यक्षता करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने तुलसीदास के रामचरितमानस का उल्लेख किया। कहा कि जो जिस कार्य में लगा है, उसे सत्य के साथ करे और उसी को ईश्वर की पूजा का मार्ग माने। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि यह ग्रंथ सत्य की असत्य पर विजय का है और यह सिखाता है कि धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर बार-बार जन्म लेंगे।

फोटो 15सीकेटीपी 27 मेला महोत्सव में बोलते अयोध्या से आए जगद्गुरु श्री राघवाचार्य। संवाद

फोटो 15सीकेटीपी 27 मेला महोत्सव में बोलते अयोध्या से आए जगद्गुरु श्री राघवाचार्य। संवाद