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Chitrakoot News: सीएचसी में डॉक्टरों की कमी, चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं
Tue, 30 Jun 2026 12:31 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Tue, 30 Jun 2026 12:31 AM IST
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मऊ। मऊ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। प्रतिदिन तीन सौ से अधिक मरीजों को इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सीएचसी में बच्चों के रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और महिला डॉक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद भी खाली
हैं।
सीएचसी में अधीक्षक सहित दस डॉक्टर पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल छह ही कार्यरत हैं। चार डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। दो नर्सों की जगह एक और तीन फार्मासिस्ट में से एक ही तैनात है। सर्जन विद्यासागर सप्ताह में तीन दिन मऊ और तीन दिन राजापुर में सेवाएं देते हैं, जिससे स्टाफ की कमी बढ़ जाती है। दंत चिकित्सक की अनुपस्थिति में महंगी एक्सरे मशीन धूल फांक रही है। अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ अनूप के छुट्टी पर होने से अल्ट्रासाउंड कक्ष भी बंद है। मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। जन औषधि केंद्र में भी दवाओं का संकट बना हुआ है।
सीएचसी अधीक्षक मो. हारून ने बताया कि दस स्वीकृत पदों के सापेक्ष छह डॉक्टर तैनात हैं। सीमित संसाधनों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। सीएमओ महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि इस कमी को दूर करने के लिए शासन से मांग की जा चुकी है।
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हैं।
सीएचसी में अधीक्षक सहित दस डॉक्टर पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल छह ही कार्यरत हैं। चार डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। दो नर्सों की जगह एक और तीन फार्मासिस्ट में से एक ही तैनात है। सर्जन विद्यासागर सप्ताह में तीन दिन मऊ और तीन दिन राजापुर में सेवाएं देते हैं, जिससे स्टाफ की कमी बढ़ जाती है। दंत चिकित्सक की अनुपस्थिति में महंगी एक्सरे मशीन धूल फांक रही है। अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ अनूप के छुट्टी पर होने से अल्ट्रासाउंड कक्ष भी बंद है। मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। जन औषधि केंद्र में भी दवाओं का संकट बना हुआ है।
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सीएचसी अधीक्षक मो. हारून ने बताया कि दस स्वीकृत पदों के सापेक्ष छह डॉक्टर तैनात हैं। सीमित संसाधनों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। सीएमओ महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि इस कमी को दूर करने के लिए शासन से मांग की जा चुकी है।
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