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Deoria News: सूजी, मैदा-बेसन में भी मिलावट...लापरवाही कर देगी बीमार
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देवरिया। त्योहारों की रौनक के बीच धंधेबाजों ने मुनाफ के लिए सूजी, मैदा और बेसन को भी मिलावटी बना दिया है। मिलावट का खेल इतना गहरा हो चुका है कि सूजी व मैदा में खराब चावल की मिलावट हो रही है, जबकि बेसन में मक्के का आटा व खेसारी की दाल को पीसकर मिलाया जा रहा है।
सस्ती खरीद और महंगे दाम पर बिक्री के इस खेल में दुकानदारों को दो गुना तक मुनाफा हो रहा है, लेकिन इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि ये मिलावट पाचन क्रिया पर भारी पड़ेगी। नतीजा त्योहार बाद पेट के मरीज बढ़ेंगे। खाद्य कारोबार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बाजार में कम कीमत पर मिलने वाले सरकारी दुकान के टूटे और खराब चावल को धंधेबाज आधे रेट में खरीद ले रहे हैं। अमूमन धंधेबाजों को यह चावल 12 से 15 रुपये किलो के भाव मिल जा रहा है। इसे पीसकर सूजी और मैदा में मिला देते हैं।
रंग और बनावट में मामूली अंतर होने के कारण आम उपभोक्ता इसे पहचान नहीं पाता। इसी तरह चने के बेसन में मक्के का आटा के अलावा खेसारी दाल का आटा भी मिलाया जा रहा है, जिससे लागत घट जाती है और मुनाफा बढ़ जाता है। जिले में औसतन 200 मीट्रिक टन मैदा व करीब 150 मीट्रिक टन बेसन की खपत होती है।
त्योहार में यह दो गुना हो जाता है। वहीं 100 मीट्रिक टन से अधिक करीब सूजी की खपत होती है। देवरिया में यह सारा माल गोरखपुर से आता है।
मंगलवार को भटनी में इस तरह के मिलावट की आशंका में करीब 42 बोरी बेसन को विभाग ने जब्त भी किया था।
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सस्ती खरीद और महंगे दाम पर बिक्री के इस खेल में दुकानदारों को दो गुना तक मुनाफा हो रहा है, लेकिन इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि ये मिलावट पाचन क्रिया पर भारी पड़ेगी। नतीजा त्योहार बाद पेट के मरीज बढ़ेंगे। खाद्य कारोबार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बाजार में कम कीमत पर मिलने वाले सरकारी दुकान के टूटे और खराब चावल को धंधेबाज आधे रेट में खरीद ले रहे हैं। अमूमन धंधेबाजों को यह चावल 12 से 15 रुपये किलो के भाव मिल जा रहा है। इसे पीसकर सूजी और मैदा में मिला देते हैं।
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रंग और बनावट में मामूली अंतर होने के कारण आम उपभोक्ता इसे पहचान नहीं पाता। इसी तरह चने के बेसन में मक्के का आटा के अलावा खेसारी दाल का आटा भी मिलाया जा रहा है, जिससे लागत घट जाती है और मुनाफा बढ़ जाता है। जिले में औसतन 200 मीट्रिक टन मैदा व करीब 150 मीट्रिक टन बेसन की खपत होती है।
त्योहार में यह दो गुना हो जाता है। वहीं 100 मीट्रिक टन से अधिक करीब सूजी की खपत होती है। देवरिया में यह सारा माल गोरखपुर से आता है।
मंगलवार को भटनी में इस तरह के मिलावट की आशंका में करीब 42 बोरी बेसन को विभाग ने जब्त भी किया था।
