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Deoria News: जिसके आदेश को किया दरकिनार, फंसीं तो वहीं पहुंचीं
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 27 Feb 2026 01:21 AM IST
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देवरिया। गौरी बाजार क्षेत्र के मदरसन गांव के अनुदानित स्कूल शिक्षक कृष्णमोहन सिंह मामले में जिस हाईकोर्ट के आदेश को बीएसए शालिनी सिंह एक साल से लंबित रखे हुए थीं, अब वे स्वयं अपने बचाव में हाईकोर्ट पहुंच गई हैं।
चर्चा है कि शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में नामजद बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कराने और गिरफ्तारी से बचाव के लिए अग्रिम जमानत की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट दाखिल की है। हालांकि, बीएसए की ओर से दायर याचिका पर बृहस्पतिवार की शाम तक सुनवाई की तिथि निर्धारित नहीं हुई थी।
कृष्ण मोहन सिंह समेत तीन शिक्षकों के मामले में वेतन आहरण का निर्णय बीएसए को लेना था। शिक्षकों ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जिस पर कोर्ट ने बीएसए को मामले के निस्तारण का निर्देश दिया था, लेकिन एक साल से मामला लंबित था। कृष्ण मोहन सिंह ने आत्महत्या से पहले जो चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, उसमें इस बात का जिक्र किया था कि वह 16 लाख रुपये दे चुका था। इसके बाद भी चार लाख रुपये के लिए दबाव बनाया जा रहा था। न तो वेतन निर्गत किया जा रहा था और न ही पैसा लौटाया जा रहा था। घटना के अगले दिन जब डीएम दिव्या मित्तल बीएसए दफ्तर पहुंचीं तो उन्होंने यही सवाल उठाया कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद आखिर निर्णय लेने में एक साल का वक्त क्यों लगा।
जांच के बाद डीएम ने बीएसए के निलंबन व विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर दी है। उधर, मृत शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व एक अज्ञात पर गोरखपुर में प्राथमिकी दर्ज हुई है। पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई में खुद को घिरता देख बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को भी उसी हाईकोर्ट से राहत की उम्मीद है, जिसके आदेश को उन्होंने दरकिनार कर दिया था। चर्चा है कि बीएसए तीन दिन से अपने एक खास कर्मचारी के साथ प्रयागराज में हैं। उन्होंने दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं के जरिए हाईकोर्ट में केस रद्द कराने व अग्रिम जमानत के लिए अपील दाखिल की है। हालांकि देर शाम तक इस प्रकरण में अगली सुनवाई की तारीख बीएसए को नहीं मिल पाई थी।
विभागीय कार्रवाई और चार्ज पर नहीं हो पा रहा फैसला : इस प्रकरण में स्थानीय व शासन स्तर से हुई जांच के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इतने संगीन मामले में आरोपी बीएसए पर क्या कार्रवाई होगी, प्रभार किसे सौंपा जाएगा, इस पर भी स्पष्ट निर्णय नहीं हो पा रहा है। बीएसए शालिनी श्रीवास्तव का सीयूजी नंबर भी नॉट रिचेबल है। आधिकारिक तौर पर कोई भी अफसर इस मामले में बयान नहीं दे रहा है।
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चर्चा है कि शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में नामजद बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कराने और गिरफ्तारी से बचाव के लिए अग्रिम जमानत की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट दाखिल की है। हालांकि, बीएसए की ओर से दायर याचिका पर बृहस्पतिवार की शाम तक सुनवाई की तिथि निर्धारित नहीं हुई थी।
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कृष्ण मोहन सिंह समेत तीन शिक्षकों के मामले में वेतन आहरण का निर्णय बीएसए को लेना था। शिक्षकों ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जिस पर कोर्ट ने बीएसए को मामले के निस्तारण का निर्देश दिया था, लेकिन एक साल से मामला लंबित था। कृष्ण मोहन सिंह ने आत्महत्या से पहले जो चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, उसमें इस बात का जिक्र किया था कि वह 16 लाख रुपये दे चुका था। इसके बाद भी चार लाख रुपये के लिए दबाव बनाया जा रहा था। न तो वेतन निर्गत किया जा रहा था और न ही पैसा लौटाया जा रहा था। घटना के अगले दिन जब डीएम दिव्या मित्तल बीएसए दफ्तर पहुंचीं तो उन्होंने यही सवाल उठाया कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद आखिर निर्णय लेने में एक साल का वक्त क्यों लगा।
जांच के बाद डीएम ने बीएसए के निलंबन व विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर दी है। उधर, मृत शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व एक अज्ञात पर गोरखपुर में प्राथमिकी दर्ज हुई है। पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई में खुद को घिरता देख बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को भी उसी हाईकोर्ट से राहत की उम्मीद है, जिसके आदेश को उन्होंने दरकिनार कर दिया था। चर्चा है कि बीएसए तीन दिन से अपने एक खास कर्मचारी के साथ प्रयागराज में हैं। उन्होंने दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं के जरिए हाईकोर्ट में केस रद्द कराने व अग्रिम जमानत के लिए अपील दाखिल की है। हालांकि देर शाम तक इस प्रकरण में अगली सुनवाई की तारीख बीएसए को नहीं मिल पाई थी।
विभागीय कार्रवाई और चार्ज पर नहीं हो पा रहा फैसला : इस प्रकरण में स्थानीय व शासन स्तर से हुई जांच के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इतने संगीन मामले में आरोपी बीएसए पर क्या कार्रवाई होगी, प्रभार किसे सौंपा जाएगा, इस पर भी स्पष्ट निर्णय नहीं हो पा रहा है। बीएसए शालिनी श्रीवास्तव का सीयूजी नंबर भी नॉट रिचेबल है। आधिकारिक तौर पर कोई भी अफसर इस मामले में बयान नहीं दे रहा है।
