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Deoria News: हर दिन 50 हजार लोग करते हैं यात्रा पर सुविधाएं एक टिन शेड तक सिमटी
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देवरिया। रोडवेज बस डिपो देवरिया की बसों में रोजाना करीब 50 हजार लोग यात्रा करते हैं, लेकिन बस स्टेशन परिसर में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यात्रियों को टिन शेड के नीचे बसों का इंतजार करना पड़ता है। वह शेड भी चारों तरफ से खुला है। इससे गर्मी में लू के थपेड़ों से यात्री परेशान रहते हैं तो बारिश में उन्हें भीगने का डर सताता है। ठंड में स्थिति और भी खराब हो जाती है। बर्फीली हवाओं की वजह से यात्री टिनशेड के अंदर ठिठुरते हुए नजर आते हैं।
देवरिया बस डिपो से प्रतिदिन करीब 270 बसें विभिन्न रूटों के लिए संचालित होती हैं। इनसे से 144 बसें अनुबंधित और 84 परिवहन निगम की हैं। इन बसों से रोजाना लगभग 50 हजार यात्री सफर करते हैं, इसके बावजूद डिपो पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं नाम मात्र की हैं। सबसे बड़ी समस्या स्टेशन भवन के टूटने के बाद उत्पन्न हुई है। भवन ध्वस्त होने के बाद न तो यात्रियों के बैठने की समुचित व्यवस्था बची है और न ही कर्मचारियों के लिए कोई स्थायी स्थान उपलब्ध है। टिकट काउंटर, पूछताछ केंद्र और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था अस्थायी ढांचे में किसी तरह चलाई जा रही है। बारिश, धूप और ठंड के मौसम में यात्रियों के साथ-साथ रोडवेज कर्मियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
डिपो परिसर में शौचालय, पेयजल, छाया और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। यात्रियों का कहना है कि लंबी दूरी की बसों का इंतजार करते समय बैठने की जगह न होने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कई बार यात्री खुले में या बसों के आसपास खड़े रहकर समय बिताने को मजबूर होते हैं।
कर्मचारियों की समस्याएं भी कम नहीं हैं। स्टेशन भवन न होने से चालक-परिचालक और अन्य कर्मचारी खुले में या बसों के अंदर ही बैठकर ड्यूटी का इंतजार करते हैं। इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है, बल्कि मौसम की मार का सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर यात्रियों की आवाजाही के बावजूद सुविधाओं की अनदेखी समझ से परे है। यात्रियों ने मांग की है कि जल्द से जल्द नए स्टेशन भवन का निर्माण कराया जाए और डिपो में मूलभूत सुविधाएं बहाल की जाएं।
प्रस्ताव लंबित है
देवरिया बस डिपो में नया भवन बनवाने का प्रस्ताव करीब एक साल से लंबित पड़ा है। इससे संबंधित हाईकोर्ट में एक मुकदमा भी लंबित है, लेकिन भवन निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत नहीं होना समझ से परे है।
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डिपो परिसर में शौचालय, पेयजल, छाया और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। यात्रियों का कहना है कि लंबी दूरी की बसों का इंतजार करते समय बैठने की जगह न होने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कई बार यात्री खुले में या बसों के आसपास खड़े रहकर समय बिताने को मजबूर होते हैं।
कर्मचारियों की समस्याएं भी कम नहीं हैं। स्टेशन भवन न होने से चालक-परिचालक और अन्य कर्मचारी खुले में या बसों के अंदर ही बैठकर ड्यूटी का इंतजार करते हैं। इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है, बल्कि मौसम की मार का सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर यात्रियों की आवाजाही के बावजूद सुविधाओं की अनदेखी समझ से परे है। यात्रियों ने मांग की है कि जल्द से जल्द नए स्टेशन भवन का निर्माण कराया जाए और डिपो में मूलभूत सुविधाएं बहाल की जाएं।
प्रस्ताव लंबित है
देवरिया बस डिपो में नया भवन बनवाने का प्रस्ताव करीब एक साल से लंबित पड़ा है। इससे संबंधित हाईकोर्ट में एक मुकदमा भी लंबित है, लेकिन भवन निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत नहीं होना समझ से परे है।
