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तेल का खेल : लागत 230...बिक रहा 150 रुपये में !
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देवरिया। बाजार में 160 से 180 रुपये लीटर बिक रहा सरसों का तेल सवालों के घेरे में है। दरअसल मंडी में सरसों के दाम 6700 से 7200 रुपये प्रति किलोग्राम है। तीन किलोग्राम सरसों की पेराई पर एक लीटर सरसों का तेल निकलता है।
एक लीटर शुद्ध तेल तैयार करने में करीब 230 रुपये का खर्च आता है। तेल का यह खेल खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए भी चुनौती बन गया है। जानकारों का कहना है कि सरसों के तेल में मिलावट का खेल गहरे तक जड़ जमा चुका है। यहां तैयार तेल को गोरखपुर समेत दूसरे जिलों को भी भेजा जा रहा है।
बाजार के जानकारों के मुताबिक जिले में हर दिन करीब 25 हजार लीटर सरसों के तेल की खपत होती है। होली जैसे बड़े त्योहार में घरों में खाने का सामान बनाने में तेल के प्रयोग की वजह से यह मांग बढ़कर 40 से 45 हजार लीटर प्रतिदिन तक पहुंच जाती है।
इस बढ़ी मांग का फायदा मिलावटखोर उठाते हैं और बाजार में बड़े पैमाने पर मिलावटी तेल उतार देते हैं। बीते रविवार को बैतालपुर क्षेत्र में एक तेल मिल पर छापा मारकर करीब 1300 लीटर तेल जब्त किया गया था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई कि इसमें सस्ता सोयाबीन ऑयल मिलाया गया होगा।
बाजार सूत्रों के मुताबिक पाम ऑयल में केमिकल और कृत्रिम फ्लेवर मिलाकर उसे सरसों का तेल बताकर बेचा जा रहा था। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। तेल कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, नेपाल से सस्ते दाम पर पाम ऑयल मंगाया जाता है।
इसमें रंग और गंध देने वाले केमिकल मिलाकर उसे सरसों के तेल जैसा बना दिया जाता है। इसके बाद स्थानीय ब्रांड या ढीले तेल के रूप में बाजार में खपाया जाता है। यह मिलावटी तेल 120 से 140 रुपये लीटर के भाव दुकानदारों को मिल जाता है जो इसे 160 से 170 रुपये लीटर के भाव बेचकर मुनाफा कमा लेते हैं।
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एक लीटर शुद्ध तेल तैयार करने में करीब 230 रुपये का खर्च आता है। तेल का यह खेल खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए भी चुनौती बन गया है। जानकारों का कहना है कि सरसों के तेल में मिलावट का खेल गहरे तक जड़ जमा चुका है। यहां तैयार तेल को गोरखपुर समेत दूसरे जिलों को भी भेजा जा रहा है।
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बाजार के जानकारों के मुताबिक जिले में हर दिन करीब 25 हजार लीटर सरसों के तेल की खपत होती है। होली जैसे बड़े त्योहार में घरों में खाने का सामान बनाने में तेल के प्रयोग की वजह से यह मांग बढ़कर 40 से 45 हजार लीटर प्रतिदिन तक पहुंच जाती है।
इस बढ़ी मांग का फायदा मिलावटखोर उठाते हैं और बाजार में बड़े पैमाने पर मिलावटी तेल उतार देते हैं। बीते रविवार को बैतालपुर क्षेत्र में एक तेल मिल पर छापा मारकर करीब 1300 लीटर तेल जब्त किया गया था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई कि इसमें सस्ता सोयाबीन ऑयल मिलाया गया होगा।
बाजार सूत्रों के मुताबिक पाम ऑयल में केमिकल और कृत्रिम फ्लेवर मिलाकर उसे सरसों का तेल बताकर बेचा जा रहा था। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। तेल कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, नेपाल से सस्ते दाम पर पाम ऑयल मंगाया जाता है।
इसमें रंग और गंध देने वाले केमिकल मिलाकर उसे सरसों के तेल जैसा बना दिया जाता है। इसके बाद स्थानीय ब्रांड या ढीले तेल के रूप में बाजार में खपाया जाता है। यह मिलावटी तेल 120 से 140 रुपये लीटर के भाव दुकानदारों को मिल जाता है जो इसे 160 से 170 रुपये लीटर के भाव बेचकर मुनाफा कमा लेते हैं।
