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Deoria News: 1857 की क्रांति में आजाद हो गया था पैना गांव
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 25 Jan 2026 12:21 AM IST
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बरहज। आजादी की पहली लड़ाई में किसी एक गांव में सबसे अधिक कुर्बानी देने की बात आती है तो सबसे पहला नाम देवरिया जिले के पैना गांव का आता है। सरयू नदी के किनारे बसे इस गांव के वीरों ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों से खुद को आजाद घोषित कर दिया था।
विद्रोह को दबाने के लिए ब्रिटिश फौज ने गांव को चारों तरफ से घेरकर आग का गोला बरसाया था। कहा जाता है कि उस युद्ध में गांव की करीब 100 महिलाओं ने सरयू नदी में जल जौहर कर लिया था। ब्रिटिश हुकूमत ने आठ लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी। जिन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका था। अंग्रेजों के खिलाफ पैना के बगावत में ठाकुर सिंह, अयोध्या सिंह, अजरायल सिंह, बीजाधर सिंह, माधव सिंह, देवीदयाल, डोमन सिंह, तिलक सिंह आदि शामिल थे।
लोगों का कहना है कि इन लोगों ने छदम युद्ध के जरिये अंग्रेजों को खदेड़ने का कार्य किया था। 18 अप्रैल 1858 को इन लोगों को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी की सजा सुनाई थी।
आज भी सती पूजन से शुरू होता है मांगलिक कार्य : बरहज। पैना गांव में आज भी मांगलिक कार्य सती पूजन के साथ ही शुरू किया जाता है। शहीदों और वीरांगनाओं की याद में सती घाट पर मंदिर और स्मारक बनाया गया है।
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विद्रोह को दबाने के लिए ब्रिटिश फौज ने गांव को चारों तरफ से घेरकर आग का गोला बरसाया था। कहा जाता है कि उस युद्ध में गांव की करीब 100 महिलाओं ने सरयू नदी में जल जौहर कर लिया था। ब्रिटिश हुकूमत ने आठ लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी। जिन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका था। अंग्रेजों के खिलाफ पैना के बगावत में ठाकुर सिंह, अयोध्या सिंह, अजरायल सिंह, बीजाधर सिंह, माधव सिंह, देवीदयाल, डोमन सिंह, तिलक सिंह आदि शामिल थे।
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लोगों का कहना है कि इन लोगों ने छदम युद्ध के जरिये अंग्रेजों को खदेड़ने का कार्य किया था। 18 अप्रैल 1858 को इन लोगों को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी की सजा सुनाई थी।
आज भी सती पूजन से शुरू होता है मांगलिक कार्य : बरहज। पैना गांव में आज भी मांगलिक कार्य सती पूजन के साथ ही शुरू किया जाता है। शहीदों और वीरांगनाओं की याद में सती घाट पर मंदिर और स्मारक बनाया गया है।
