{"_id":"6a6901d9bbd5421c7206c94d","slug":"etah-news-up-waste-treatment-plan-etah-news-c-163-1-eta1002-154101-2026-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etah News: फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए सोंगरा में मिली जमीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etah News: फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए सोंगरा में मिली जमीन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। जिले में स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले फीकल स्लज (मल अपशिष्ट) के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए सोंगरा गांव में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए लगभग पांच बीघा भूमि का चयन कर लिया है और जल्द ही शासन को इसका प्रस्ताव भेजा जाएगा।
जिले के अधिकांश शहरी और कस्बाई क्षेत्रों में सीवर लाइन का जाल अभी तक पूरी तरह से नहीं बिछा है। ऐसे में बड़ी संख्या में मकानों और प्रतिष्ठानों में सेप्टिक टैंक बने हुए हैं। इन टैंकों से निकलने वाले फीकल स्लज के सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण की समुचित व्यवस्था न होने के कारण अक्सर इसे खुले क्षेत्रों, नालों या अन्य जगहों पर फेंक दिया जाता है। इस लापरवाही का सीधा असर पर्यावरण पर पड़ता है।
इस गंभीर समस्या के स्थाई समाधान के लिए संबंधित विभागों ने लेखपाल की मदद से सोंगरा गांव में लगभग पांच बीघा भूमि का चयन किया है। इसके अतिरिक्त, शहर के भगीपुर क्षेत्र में भी भूमि संबंधी प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। शासन से स्वीकृति मिलते ही निर्माण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस परियोजना पर लगभग 1.50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्तावित फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट में सेप्टिक टैंकों से निकाले गए मल अपशिष्ट को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से उपचारित किया जाएगा। उपचार प्रक्रिया के बाद, अपशिष्ट का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। इससे मिट्टी, भूजल और आसपास के जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा।
विज्ञापन
इस परियोजना के सफल कार्यान्वयन से जिले की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को गति देने के साथ-साथ एटा जिले को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विज्ञापन
जिले के अधिकांश शहरी और कस्बाई क्षेत्रों में सीवर लाइन का जाल अभी तक पूरी तरह से नहीं बिछा है। ऐसे में बड़ी संख्या में मकानों और प्रतिष्ठानों में सेप्टिक टैंक बने हुए हैं। इन टैंकों से निकलने वाले फीकल स्लज के सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण की समुचित व्यवस्था न होने के कारण अक्सर इसे खुले क्षेत्रों, नालों या अन्य जगहों पर फेंक दिया जाता है। इस लापरवाही का सीधा असर पर्यावरण पर पड़ता है।
विज्ञापन
इस गंभीर समस्या के स्थाई समाधान के लिए संबंधित विभागों ने लेखपाल की मदद से सोंगरा गांव में लगभग पांच बीघा भूमि का चयन किया है। इसके अतिरिक्त, शहर के भगीपुर क्षेत्र में भी भूमि संबंधी प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। शासन से स्वीकृति मिलते ही निर्माण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस परियोजना पर लगभग 1.50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्तावित फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट में सेप्टिक टैंकों से निकाले गए मल अपशिष्ट को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से उपचारित किया जाएगा। उपचार प्रक्रिया के बाद, अपशिष्ट का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। इससे मिट्टी, भूजल और आसपास के जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा।
विज्ञापन
इस परियोजना के सफल कार्यान्वयन से जिले की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को गति देने के साथ-साथ एटा जिले को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।