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Etawah News: दो साल में फूंके 43 करोड़, गर्मी से पहले अंधेरे में ग्रामीण इलाके
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फोटो 21::
दिन में फसल के नाम पर, तो रात में पनकी पावर हाउस से बिजली न मिलने का बना रहे बहाना
भीषण गर्मी से पहले ही ग्रामीण क्षेत्र में 18 तो, शहरी क्षेत्र में 24 घंटे आपूर्ति के दावे हुए हवाहवाई
संवाद न्यूज़ एजेंसी
इटावा। एक तरफ सरकार बिजली सुधार के लिए करोड़ों का बजट पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ गर्मी का सीज़न पूरी तरह शुरू होने से पहले ही जिले की बिजली व्यवस्था चरमरा गई है। पिछले दो सालों में करीब 43 करोड़ रुपये का बजट बिजली सुधार, क्षमता वृद्धि और रखरखाव के नाम पर खर्च किया जा चुका है, लेकिन जमीन पर हकीकत यह है कि ग्रामीण इलाकों में अभी से घंटों कटौती और लो-वोल्टेज का संकट गहराने लगा है।
जिले में बिजली निगम के तीन खंड हैं। इसके तहत कुल 56 बिजली घरों से ढाई लाख उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जाती है। इसमें 63 हजार उपभोक्ता शहर, जबकि शेष उपभोक्ता ग्रामीण क्षेत्र के हैं। उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने के लिए जिले में लगभग साढ़े 17 हजार ट्रांसफार्मर लगे हैं। इसमें बीते वर्ष 86 और इस वर्ष 106 नए ट्रांसफार्मर शामिल है। गर्मी के मौसम में लोगों को बिजली संकट से परेशानी न झेलनी पड़े, इसके लिए शासन ने ओवरलोड ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि के आदेश दिए थे, ताकि किसी भी हाल में ट्रांसफार्मर न फूंकें और लोगों को बिजली संकट न झेलना पड़े। 2024-25 में बिजनेस प्लान के तहत लगभग 28 करोड़ रुपये भी जारी किए गए, जबकि बिजनेस प्लान 2025-26 के तहत 15 करोड़ का बजट मिला था। कुल मिलाकर बिजली निगम की ओर से दो साल में 43 करोड़ खर्च कर दिए है लेकिन बिजली कटौती का दंश कम होने का नाम नहीं ले रहे है। बिजली निगम का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही है जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि दिनभर में कुल मिलाकर आठ से 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
रातभर होती कटौती, कर्मचारी देते मच्छरदानी में सोने की दुहाई
निवाड़ीकला। कस्बा निवाड़ीकला 33/11 बिजलीघर से जुड़े 20 से अधिक गांवों में इन दिनों बिजली की आवाजाही कम होने का नाम नहीं ले रही है। इससे कस्बा सहित निवाड़ीखुर्द, इंद्रावखी, नगला भदौरिया, नौगवां, पेवली सहित आसपास के गांवों में जमकर बिजली कटौती की जा रही है। शनिवार रात में एक बजे तक कई बार यहां बिजली कटौती की जाती रही। वहीं ग्रामीणों ने जब बिजलीघर फोन किया तो कर्मचारियों सही जानकारी देने के बजाय छत पर मच्छरदानी लगाकर सोने का तर्क दिया। ग्रामीण राजेश कुमार, कौशल, अजय ने बताया कि बिजली की आवाजाही ने अभी से ही परेशान करना शुरू कर दिया है। (संवाद)
ट्रांसफार्मर लोड न लेने से अंधेरे में रहते है 40 गांव
लवेदी। क्षेत्र के ग्राम बहादुरपुर बिजली घर पर 5 एमवीए ट्रांसफार्मर अधिक लोड न ले पाने से 40 से अधिक गांवों में बिजली की जमकर कटौती हो रही हैं। एक-एक घंटे के बाद बिजली कटौती की जा रही है। इससे बहादुरपुर, चिंडौली, नवादा गांवों के उपभोक्ता परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक तो रात में बिजली कटौती से मच्छर और गर्मी से परेशानी है वहीं कृषि फीडर में भी समय से बिजली न मिलने से सिंचाई भी प्रभावित हो रही है। जेई धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि इनकमिंग फीडर एक साथ कृषि एवं घरेलू दोनों लाइनों का लोड नहीं ले सकता है, इससे रूटीन से बिजली आपूर्ति की जा रही है। (संवाद)
आठ घंटे मिल रही नलकूपों को बिजली
उदी। क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को लेकर निगम और उपभोक्ताओं के बीच का अंतर देखने को मिल रहा है। संबंधित कर्मचारियों का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिदिन लगभग 18 घंटे बिजली दी जा रही है, जबकि नलकूप (ट्यूबवेल) के लिए 10 घंटे सप्लाई निर्धारित है। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल 12 से 13 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। इसके अलावा ट्यूबवेल संचालकों का आरोप है कि उन्हें महज सात से आठ घंटे ही बिजली मिलती है, जिससे सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहा है। गर्मी के मौसम में हो रही इस कटौती से आमजन और किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। (संवाद)
ट्रांसफार्मर वर्ष 2024-25 वर्ष 2025-26
नए 86 106
क्षमता बढ़ोतरी 249 137
वर्ज़न
भरथना बिजलीघर पर काम चल रहा है, इसलिए दिन में बिजली बाधित हो सकती है। इसके साथ गेहूं की फसल के चलते दिन में स्थानीय स्तर पर बिजली की कटौती की जा रही है। हालांकि बिना किसी वजह के रात को कटौती क्यों की जा रही है, इसकी जानकारी करेंगे। सभी एक्सईएन व संबंधित एसडीओ को बेवजह कटौती न करने के निर्देश दिए गए है।-ऋषभ देव, अधीक्षण अभियंता
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दिन में फसल के नाम पर, तो रात में पनकी पावर हाउस से बिजली न मिलने का बना रहे बहाना
भीषण गर्मी से पहले ही ग्रामीण क्षेत्र में 18 तो, शहरी क्षेत्र में 24 घंटे आपूर्ति के दावे हुए हवाहवाई
संवाद न्यूज़ एजेंसी
इटावा। एक तरफ सरकार बिजली सुधार के लिए करोड़ों का बजट पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ गर्मी का सीज़न पूरी तरह शुरू होने से पहले ही जिले की बिजली व्यवस्था चरमरा गई है। पिछले दो सालों में करीब 43 करोड़ रुपये का बजट बिजली सुधार, क्षमता वृद्धि और रखरखाव के नाम पर खर्च किया जा चुका है, लेकिन जमीन पर हकीकत यह है कि ग्रामीण इलाकों में अभी से घंटों कटौती और लो-वोल्टेज का संकट गहराने लगा है।
जिले में बिजली निगम के तीन खंड हैं। इसके तहत कुल 56 बिजली घरों से ढाई लाख उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जाती है। इसमें 63 हजार उपभोक्ता शहर, जबकि शेष उपभोक्ता ग्रामीण क्षेत्र के हैं। उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने के लिए जिले में लगभग साढ़े 17 हजार ट्रांसफार्मर लगे हैं। इसमें बीते वर्ष 86 और इस वर्ष 106 नए ट्रांसफार्मर शामिल है। गर्मी के मौसम में लोगों को बिजली संकट से परेशानी न झेलनी पड़े, इसके लिए शासन ने ओवरलोड ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि के आदेश दिए थे, ताकि किसी भी हाल में ट्रांसफार्मर न फूंकें और लोगों को बिजली संकट न झेलना पड़े। 2024-25 में बिजनेस प्लान के तहत लगभग 28 करोड़ रुपये भी जारी किए गए, जबकि बिजनेस प्लान 2025-26 के तहत 15 करोड़ का बजट मिला था। कुल मिलाकर बिजली निगम की ओर से दो साल में 43 करोड़ खर्च कर दिए है लेकिन बिजली कटौती का दंश कम होने का नाम नहीं ले रहे है। बिजली निगम का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही है जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि दिनभर में कुल मिलाकर आठ से 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
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रातभर होती कटौती, कर्मचारी देते मच्छरदानी में सोने की दुहाई
निवाड़ीकला। कस्बा निवाड़ीकला 33/11 बिजलीघर से जुड़े 20 से अधिक गांवों में इन दिनों बिजली की आवाजाही कम होने का नाम नहीं ले रही है। इससे कस्बा सहित निवाड़ीखुर्द, इंद्रावखी, नगला भदौरिया, नौगवां, पेवली सहित आसपास के गांवों में जमकर बिजली कटौती की जा रही है। शनिवार रात में एक बजे तक कई बार यहां बिजली कटौती की जाती रही। वहीं ग्रामीणों ने जब बिजलीघर फोन किया तो कर्मचारियों सही जानकारी देने के बजाय छत पर मच्छरदानी लगाकर सोने का तर्क दिया। ग्रामीण राजेश कुमार, कौशल, अजय ने बताया कि बिजली की आवाजाही ने अभी से ही परेशान करना शुरू कर दिया है। (संवाद)
ट्रांसफार्मर लोड न लेने से अंधेरे में रहते है 40 गांव
लवेदी। क्षेत्र के ग्राम बहादुरपुर बिजली घर पर 5 एमवीए ट्रांसफार्मर अधिक लोड न ले पाने से 40 से अधिक गांवों में बिजली की जमकर कटौती हो रही हैं। एक-एक घंटे के बाद बिजली कटौती की जा रही है। इससे बहादुरपुर, चिंडौली, नवादा गांवों के उपभोक्ता परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक तो रात में बिजली कटौती से मच्छर और गर्मी से परेशानी है वहीं कृषि फीडर में भी समय से बिजली न मिलने से सिंचाई भी प्रभावित हो रही है। जेई धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि इनकमिंग फीडर एक साथ कृषि एवं घरेलू दोनों लाइनों का लोड नहीं ले सकता है, इससे रूटीन से बिजली आपूर्ति की जा रही है। (संवाद)
आठ घंटे मिल रही नलकूपों को बिजली
उदी। क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को लेकर निगम और उपभोक्ताओं के बीच का अंतर देखने को मिल रहा है। संबंधित कर्मचारियों का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिदिन लगभग 18 घंटे बिजली दी जा रही है, जबकि नलकूप (ट्यूबवेल) के लिए 10 घंटे सप्लाई निर्धारित है। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल 12 से 13 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। इसके अलावा ट्यूबवेल संचालकों का आरोप है कि उन्हें महज सात से आठ घंटे ही बिजली मिलती है, जिससे सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहा है। गर्मी के मौसम में हो रही इस कटौती से आमजन और किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। (संवाद)
ट्रांसफार्मर वर्ष 2024-25 वर्ष 2025-26
नए 86 106
क्षमता बढ़ोतरी 249 137
वर्ज़न
भरथना बिजलीघर पर काम चल रहा है, इसलिए दिन में बिजली बाधित हो सकती है। इसके साथ गेहूं की फसल के चलते दिन में स्थानीय स्तर पर बिजली की कटौती की जा रही है। हालांकि बिना किसी वजह के रात को कटौती क्यों की जा रही है, इसकी जानकारी करेंगे। सभी एक्सईएन व संबंधित एसडीओ को बेवजह कटौती न करने के निर्देश दिए गए है।-ऋषभ देव, अधीक्षण अभियंता
