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Etawah News: नौकरी जाने से आहत युवक ने नहर में कूदकर दी जान
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फोटो 18:: दीपक दुबे। फाइल फोटोपरिजन
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बकेवर (इटावा)। नगर पंचायत लखना में आउटसोर्सिंग कर्मचारी रहे युवक ने रविवार सुबह भोगनीपुर गंग नहर में कूदकर जान दे दी। पिता ने नगर पंचायत अध्यक्ष पर बेटे को नौकरी से निकालकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। वहीं, अध्यक्ष ने आरोपों को खारिज कर कहा कि कर्मचारी की सेवाएं स्वास्थ्य संबंधी कारणों से आउटसोर्सिंग कंपनी ने समाप्त की थीं। एक साल पहले उसे नौकरी से निकाला गया था।
कस्बा लखना के दीक्षितान मोहल्ला निवासी दीपक दुबे (48) रविवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे घर से निकले। फिर वह कहराहान मोहल्ला स्थित सैय्यद बाबा की मजार के पास पहुंचे और भोगनीपुर गंग नहर में छलांग लगा दी। आसपास मौजूद लोगों ने देखा तो नहर में कूदकर उन्हें बाहर निकाला। लोगों ने मौके पर ही सीपीआर देकर जान बचाने का प्रयास किया और परिजन मोहल्ले के लोगों की मदद से निजी वाहन से 50 शैया अस्पताल लेकर पहुंचे।
अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉ. रविंद्र शाहू ने भी उन्हें सीपीआर देकर बचाने का प्रयास किया, लेकिन परीक्षण के बाद दीपक को मृत घोषित कर दिया। सूचना पाकर पुलिस अस्पताल पहुंची और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। दीपक के पिता बालकराम दुबे ने बताया कि उनका बेटा नगर पंचायत लखना में आउटसोर्सिंग कर्मचारी के रूप में कार्यरत था। करीब एक वर्ष पहले उसे नौकरी से हटा दिया गया था।
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उनका आरोप है कि नौकरी जाने के बाद से दीपक लगातार मानसिक तनाव में था। कई बार नगर पंचायत अध्यक्ष से मिलकर बेटे को दोबारा नौकरी पर रखने की गुहार लगाई पर सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा। उनका कहना है कि बेटे की मौत के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष जिम्मेदार हैं। वहीं, नगर पंचायत अध्यक्ष गणेश शंकर पोरवाल ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।
उन्होंने कहा कि दीपक दुबे को मिर्गी का दौरा पड़ता था, जिस कारण वह नियमित ड्यूटी नहीं कर पा रहे थे। इसी वजह से आउटसोर्सिंग एजेंसी कृष्णा कंपनी झांसी ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत का इसमें कोई व्यक्तिगत हस्तक्षेप नहीं था और उन पर लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं।
दीपक की मौत के बाद पत्नी साधना, मां गीता, दो बेटे आयुष, अभय व बेटी मेघा का रो-रोकर बुरा हाल है। सीओ भरथना आरडी मौर्य ने बताया कि फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। तहरीर मिलती है तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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कस्बा लखना के दीक्षितान मोहल्ला निवासी दीपक दुबे (48) रविवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे घर से निकले। फिर वह कहराहान मोहल्ला स्थित सैय्यद बाबा की मजार के पास पहुंचे और भोगनीपुर गंग नहर में छलांग लगा दी। आसपास मौजूद लोगों ने देखा तो नहर में कूदकर उन्हें बाहर निकाला। लोगों ने मौके पर ही सीपीआर देकर जान बचाने का प्रयास किया और परिजन मोहल्ले के लोगों की मदद से निजी वाहन से 50 शैया अस्पताल लेकर पहुंचे।
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अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉ. रविंद्र शाहू ने भी उन्हें सीपीआर देकर बचाने का प्रयास किया, लेकिन परीक्षण के बाद दीपक को मृत घोषित कर दिया। सूचना पाकर पुलिस अस्पताल पहुंची और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। दीपक के पिता बालकराम दुबे ने बताया कि उनका बेटा नगर पंचायत लखना में आउटसोर्सिंग कर्मचारी के रूप में कार्यरत था। करीब एक वर्ष पहले उसे नौकरी से हटा दिया गया था।
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उनका आरोप है कि नौकरी जाने के बाद से दीपक लगातार मानसिक तनाव में था। कई बार नगर पंचायत अध्यक्ष से मिलकर बेटे को दोबारा नौकरी पर रखने की गुहार लगाई पर सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा। उनका कहना है कि बेटे की मौत के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष जिम्मेदार हैं। वहीं, नगर पंचायत अध्यक्ष गणेश शंकर पोरवाल ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।
उन्होंने कहा कि दीपक दुबे को मिर्गी का दौरा पड़ता था, जिस कारण वह नियमित ड्यूटी नहीं कर पा रहे थे। इसी वजह से आउटसोर्सिंग एजेंसी कृष्णा कंपनी झांसी ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत का इसमें कोई व्यक्तिगत हस्तक्षेप नहीं था और उन पर लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं।
दीपक की मौत के बाद पत्नी साधना, मां गीता, दो बेटे आयुष, अभय व बेटी मेघा का रो-रोकर बुरा हाल है। सीओ भरथना आरडी मौर्य ने बताया कि फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। तहरीर मिलती है तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

फोटो 18:: दीपक दुबे। फाइल फोटोपरिजन