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Etawah News: नोड्यूज देने के बाद भी बिजली चोरी के आरोपी बने, कोर्ट से हुए बरी

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 12:51 AM IST
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Even after giving nodues, he was accused of electricity theft, but was acquitted by the court.
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इटावा। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट की अदालत ने सेना से सेवानिवृत्त कैप्टन रामरतन सिंह को विद्युत चोरी के मामले में दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने बिजली निगम के अधिकारियों की ओर से चोरी के पुख्ता सबूत पेश न कर पाने और प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी पर संतोषजनक जवाब न दे पाने को मामले में अहम माना।
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19 जुलाई 2017 को बिजली निगम की एक टीम ने कैप्टन रामरतन सिंह के इंटरलॉकिंग प्लांट का निरीक्षण किया था। आरोप था कि कैप्टन सिंह ने अपने स्वीकृत विद्युत संयोजन के मीटर को बाईपास कर सीधे एलटी लाइन से तार जोड़कर बिजली चोरी की। इसी आधार पर 20 जुलाई 2017 को उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
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बचाव पक्ष के तर्क सुनवाई के दौरान कैप्टन सिंह ने स्वयं पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने न्यायालय में प्रस्तुत किया कि वह सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और व्यापार में घाटे के कारण उन्होंने अपना कारखाना काफी समय पहले ही बंद कर दिया था।
बचाव पक्ष ने 24 अक्तूबर 2017 को विद्युत निगम से नो ड्यूज और स्थायी विच्छेदन प्रमाण पत्र प्राप्त करने के साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। कैप्टन सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि विद्युत निगम के कर्मचारियों ने उनसे अवैध रूप से 50,000 रुपये की मांग की थी और भुगतान न करने पर उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया।


अदालत का विस्तृत विश्लेषण और निर्णय न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार किया। प्रथम, प्राथमिकी दर्ज करने में देरी पाई गई थी। घटना 19 जुलाई 2017 की बताई गई थी जबकि प्राथमिकी अगले दिन 20 जुलाई को रात 9:15 बजे दर्ज की गई थी। इस देरी के लिए विद्युत निगम के पास कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं था। द्वितीय, अभियोजन पक्ष साक्ष्यों को प्रस्तुत करने में विफल रहा। विभाग ने जिस चार हाथ तार को मौके से बरामद होने का दावा किया था उसे साक्ष्य के रूप में न्यायालय में पेश नहीं किया गया। तृतीय, गवाहों का अभाव भी एक प्रमुख कारण बना। विवेचना के दौरान, घटना स्थल पर कोई स्वतंत्र या सार्वजनिक गवाह मौजूद नहीं था, केवल विभाग के कर्मचारी ही गवाह के तौर पर पेश हुए।
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