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Etawah News: अच्छे भाव की आस में किसान, कोल्ड स्टोर में रिकॉर्ड भंडारण
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फोटो 25:::शहर की नवीन मंडी में रखा आलू। संवाद
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बीते वर्ष 84 प्रतिशत तक हुआ था भंडारण, इस बार अब तक 90 प्रतिशत तक भंडारण
बाजार में लगातार गिरती आलू की कीमतों के कारण किसानों ने किया कोल्ड स्टोर का रुख
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। बाजार में आलू की गिरती कीमतों ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं लेकिन हार मानने की बजाए जिले के किसानों और व्यापारियों ने भविष्य की उम्मीद को कोल्ड स्टोरेज में सहेजने का फैसला किया है। जिला उद्यान विभाग के ताजा आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि इस बार न केवल कोल्ड स्टोरों की संख्या और क्षमता बढ़ी है बल्कि भंडारण के मामले में बीते साल का रिकॉर्ड भी पीछे छूट गया है।
बीते वर्ष के मुकाबले इस साल जिले में आलू भंडारण की तस्वीर काफी बदली हुई है। जहां पिछले साल जिले में 54 कोल्ड स्टोर संचालित थे, वहीं इस बार इनकी संख्या बढ़कर 58 हो गई है। न केवल संख्या, बल्कि भंडारण की कुल क्षमता में भी इजाफा हुआ है। बीते वर्ष इन कोल्ड स्टोरों की क्षमता 6.13 लाख एमटी थी तक इनमें लगभग 84 प्रतिशत तक आलू का भंडारण हुआ था। वहीं इस वर्ष इनकी क्षमता 7.79 लाख एमटी तक पहुंच गई है और 90 प्रतिशत तक भंडारण किया जा चुका है। वहीं दूसरी ओर उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी कोल्ड स्टोरों में भंडारण की स्थितियों में और भी बढ़त होने की संभावना है।
क्यों भरा जा रहा है आलू
वर्तमान में बाजार में आलू की कीमतें उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल रही हैं। लागत और मुनाफे के समीकरण को देखते हुए किसान अभी आलू बेचना घाटे का सौदा मान रहे हैं। व्यापारियों और किसानों को भरोसा है कि आगामी तीन से चार महीनों में जब बाजार में आवक कम होगी, तब कीमतों में उछाल आएगा। इसी इंतजार की रणनीति के तहत अब तक 90 प्रतिशत क्षमता भरी जा चुकी है।
भारी निवेश और भरोसा
जिला उद्यान विभाग के अनुसार, पिछले साल 6.13 लाख एमटी क्षमता के सापेक्ष केवल 84 फीसदी आलू ही स्टोर हुआ था। इसके उलट, इस बार 7.79 लाख एमटी की विशाल क्षमता होने के बावजूद भंडारण का ग्राफ 90 फीसदी को पार कर गया है। स्पष्ट है कि किसान अब बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए भंडारण को ही सबसे सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
वर्जन
आलू की कम कीमतों के चलते किसानों ने बाजार से दूरी बनाई है। भंडारण की वर्तमान स्थिति को देखते हुए उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में जब बाजार में मांग बढ़ेगी, तब किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सकेगा।-श्याम सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
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बाजार में लगातार गिरती आलू की कीमतों के कारण किसानों ने किया कोल्ड स्टोर का रुख
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। बाजार में आलू की गिरती कीमतों ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं लेकिन हार मानने की बजाए जिले के किसानों और व्यापारियों ने भविष्य की उम्मीद को कोल्ड स्टोरेज में सहेजने का फैसला किया है। जिला उद्यान विभाग के ताजा आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि इस बार न केवल कोल्ड स्टोरों की संख्या और क्षमता बढ़ी है बल्कि भंडारण के मामले में बीते साल का रिकॉर्ड भी पीछे छूट गया है।
बीते वर्ष के मुकाबले इस साल जिले में आलू भंडारण की तस्वीर काफी बदली हुई है। जहां पिछले साल जिले में 54 कोल्ड स्टोर संचालित थे, वहीं इस बार इनकी संख्या बढ़कर 58 हो गई है। न केवल संख्या, बल्कि भंडारण की कुल क्षमता में भी इजाफा हुआ है। बीते वर्ष इन कोल्ड स्टोरों की क्षमता 6.13 लाख एमटी थी तक इनमें लगभग 84 प्रतिशत तक आलू का भंडारण हुआ था। वहीं इस वर्ष इनकी क्षमता 7.79 लाख एमटी तक पहुंच गई है और 90 प्रतिशत तक भंडारण किया जा चुका है। वहीं दूसरी ओर उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी कोल्ड स्टोरों में भंडारण की स्थितियों में और भी बढ़त होने की संभावना है।
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क्यों भरा जा रहा है आलू
वर्तमान में बाजार में आलू की कीमतें उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल रही हैं। लागत और मुनाफे के समीकरण को देखते हुए किसान अभी आलू बेचना घाटे का सौदा मान रहे हैं। व्यापारियों और किसानों को भरोसा है कि आगामी तीन से चार महीनों में जब बाजार में आवक कम होगी, तब कीमतों में उछाल आएगा। इसी इंतजार की रणनीति के तहत अब तक 90 प्रतिशत क्षमता भरी जा चुकी है।
भारी निवेश और भरोसा
जिला उद्यान विभाग के अनुसार, पिछले साल 6.13 लाख एमटी क्षमता के सापेक्ष केवल 84 फीसदी आलू ही स्टोर हुआ था। इसके उलट, इस बार 7.79 लाख एमटी की विशाल क्षमता होने के बावजूद भंडारण का ग्राफ 90 फीसदी को पार कर गया है। स्पष्ट है कि किसान अब बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए भंडारण को ही सबसे सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
वर्जन
आलू की कम कीमतों के चलते किसानों ने बाजार से दूरी बनाई है। भंडारण की वर्तमान स्थिति को देखते हुए उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में जब बाजार में मांग बढ़ेगी, तब किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सकेगा।-श्याम सिंह, जिला उद्यान अधिकारी