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Etawah News: स्वच्छता के दावों पर कूड़े का अंबार, मशीनें बंद, हाथों से हो रहा छांटा जा रहा कूड़ा
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इटावा। जनपद को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावों से इतर कूड़ा निस्तारण व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। तीनों नगर पालिकाओं के कूड़ा निस्तारण केंद्रों में उम्मीद के अनुसार काम नहीं हो पा रहा है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी क्षमता की कमी और संसाधनों का अभाव बना हुआ है।
कहीं कूड़ा निस्तारण प्लांट बंद पड़े हैं तो कहीं मशीनों के बजाय कर्मचारी कूड़ा अलग कर रहे हैं। जिला मुख्यालय पर रोजाना करीब 60 से 65 टन कूड़ा निकलता है। निस्तारण के लिए पक्का तालाब, मकसूदपुरा, उमरैन और लाइनपार में चार केंद्र बनाए गए हैं। हर केंद्र की क्षमता पांच-पांच टन है। उदी क्षेत्र के कामेत में 75 टन क्षमता का एक बड़ा प्लांट भी लगा है। नगर पालिका सभी केंद्रों के सुचारू संचालन के दावों की कलई रविवार को खुल गई। पड़ताल में कामेत स्थित प्लांट बंद पाया गया।
कामेत प्लांट के कर्मचारियों ने बताया कि पूरे कूड़े का निस्तारण नहीं हो पाता है। क्षमता के अनुरूप व्यवस्था संचालित नहीं हो रही है। शहर के कई इलाकों में फैली गंदगी भी यही दर्शाती है। कूड़ा उठान और निस्तारण की व्यवस्था कागजों पर ही प्रभावी दिखती है। स्वच्छ भारत मिशन के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुनील कुमार ने कहा कि शहर के सभी कूड़ा निस्तारण केंद्र संचालित हो रहे हैं। यदि कोई केंद्र बंद मिला है तो उसकी जांच की जाएगी। लापरवाही पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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भरथना क्षेत्र के निनावा गांव में नगर पालिका परिषद की ओर से संचालित एमआरएफ सेंटर की स्थिति भी व्यवस्था की पोल खोल रही है। वर्ष 2022-23 में करीब 33.67 लाख रुपये की लागत से बनाए गए इस केंद्र में आज भी कूड़े का पृथक्करण मैनुअल तरीके से किया जा रहा है। करीब दस कर्मचारियों को लगाकर कूड़ा अलग कराया जाता है। पालिका प्रशासन ने मशीनों की खरीद के लिए करीब 16 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन अभी तक आधुनिक व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है। इसी परिसर में वर्ष 2024-25 में 39.57 लाख रुपये की लागत से वेट वेस्ट कंपोस्ट पिट का निर्माण कराया गया। इसकी क्षमता 10 टन प्रतिदिन है, जबकि भरथना नगर क्षेत्र से रोजाना लगभग 15 टन कूड़ा निकलता है। ऐसे में शुरुआत से ही व्यवस्था जरूरत से कम क्षमता की साबित हो रही है। (संवाद)
जसवंतनगर में छिमारा रोड स्थित प्रतापपुरा के पास करीब 35 लाख रुपये की लागत से कूड़ा निस्तारण केंद्र स्थापित किया गया है। करीब आठ बीघा भूमि में बने इस प्लांट में कस्बे का पूरा कूड़ा एकत्र किया जाता है। यहां प्लास्टिक और अन्य ठोस अपशिष्ट को अलग करने के साथ खाद बनाने की व्यवस्था भी है, लेकिन इसकी क्षमता मात्र तीन टन प्रतिदिन है, जबकि नगर क्षेत्र से रोजाना लगभग सात टन कूड़ा निकल रहा है। नतीजतन प्लांट परिसर में बड़ी मात्रा में कचरा जमा हो गया है। इससे आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध और स्वच्छता संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। रविवार को पड़ताल के दौरान प्लांट बंद मिला और वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। (संवाद)
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वर्जन
एसडीएम की ओर से कूड़ा निस्तारण के लिए नई जगह आवंटित कर दी गई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वर्तमान स्थल पर कूड़ा डाले जाने की प्रक्रिया समाप्त कर दी जाएगी।
-श्याम बचन सरोज, ईओ जसवंतनगर
कहीं कूड़ा निस्तारण प्लांट बंद पड़े हैं तो कहीं मशीनों के बजाय कर्मचारी कूड़ा अलग कर रहे हैं। जिला मुख्यालय पर रोजाना करीब 60 से 65 टन कूड़ा निकलता है। निस्तारण के लिए पक्का तालाब, मकसूदपुरा, उमरैन और लाइनपार में चार केंद्र बनाए गए हैं। हर केंद्र की क्षमता पांच-पांच टन है। उदी क्षेत्र के कामेत में 75 टन क्षमता का एक बड़ा प्लांट भी लगा है। नगर पालिका सभी केंद्रों के सुचारू संचालन के दावों की कलई रविवार को खुल गई। पड़ताल में कामेत स्थित प्लांट बंद पाया गया।
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कामेत प्लांट के कर्मचारियों ने बताया कि पूरे कूड़े का निस्तारण नहीं हो पाता है। क्षमता के अनुरूप व्यवस्था संचालित नहीं हो रही है। शहर के कई इलाकों में फैली गंदगी भी यही दर्शाती है। कूड़ा उठान और निस्तारण की व्यवस्था कागजों पर ही प्रभावी दिखती है। स्वच्छ भारत मिशन के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुनील कुमार ने कहा कि शहर के सभी कूड़ा निस्तारण केंद्र संचालित हो रहे हैं। यदि कोई केंद्र बंद मिला है तो उसकी जांच की जाएगी। लापरवाही पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
भरथना क्षेत्र के निनावा गांव में नगर पालिका परिषद की ओर से संचालित एमआरएफ सेंटर की स्थिति भी व्यवस्था की पोल खोल रही है। वर्ष 2022-23 में करीब 33.67 लाख रुपये की लागत से बनाए गए इस केंद्र में आज भी कूड़े का पृथक्करण मैनुअल तरीके से किया जा रहा है। करीब दस कर्मचारियों को लगाकर कूड़ा अलग कराया जाता है। पालिका प्रशासन ने मशीनों की खरीद के लिए करीब 16 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन अभी तक आधुनिक व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है। इसी परिसर में वर्ष 2024-25 में 39.57 लाख रुपये की लागत से वेट वेस्ट कंपोस्ट पिट का निर्माण कराया गया। इसकी क्षमता 10 टन प्रतिदिन है, जबकि भरथना नगर क्षेत्र से रोजाना लगभग 15 टन कूड़ा निकलता है। ऐसे में शुरुआत से ही व्यवस्था जरूरत से कम क्षमता की साबित हो रही है। (संवाद)
जसवंतनगर में छिमारा रोड स्थित प्रतापपुरा के पास करीब 35 लाख रुपये की लागत से कूड़ा निस्तारण केंद्र स्थापित किया गया है। करीब आठ बीघा भूमि में बने इस प्लांट में कस्बे का पूरा कूड़ा एकत्र किया जाता है। यहां प्लास्टिक और अन्य ठोस अपशिष्ट को अलग करने के साथ खाद बनाने की व्यवस्था भी है, लेकिन इसकी क्षमता मात्र तीन टन प्रतिदिन है, जबकि नगर क्षेत्र से रोजाना लगभग सात टन कूड़ा निकल रहा है। नतीजतन प्लांट परिसर में बड़ी मात्रा में कचरा जमा हो गया है। इससे आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध और स्वच्छता संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। रविवार को पड़ताल के दौरान प्लांट बंद मिला और वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। (संवाद)
वर्जन
एसडीएम की ओर से कूड़ा निस्तारण के लिए नई जगह आवंटित कर दी गई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वर्तमान स्थल पर कूड़ा डाले जाने की प्रक्रिया समाप्त कर दी जाएगी।
-श्याम बचन सरोज, ईओ जसवंतनगर