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Etawah News: मोहल्ला लाइनपार, समस्याएं बेशुमार
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फोटो 04:: शहर के लाइनपार मोहल्ले के ऊसरा अड्डा की गली में भरा पानी। संवाद
फोटो 05::लाइनपार मोहल्ले के मोहल्ला शांति कॉलोनी में कई गलियों में ऐसी है जलभराव की स्थिति। संवाद
फोटो 06:: सती मंदिर से अजीतनगर की ओर जाने वाले अंडरपास में भी रहती है जलभराव की स्थिति। संवाद
फोटो 07::इटावा-कानपुर नेशनल हाईवे की सर्विस सड़क पर कई जगह ऐसा रहता है जलभराव। संवाद
फोटो 08::रवींद्र सिंह तोमर।
फोटो 09::धीरेंद्र।
पड़ताल
इस बार भी जलभराव का दंश झेलेगी 50 हजार आबादी, न सड़कें दुरुस्त न जलनिकासी की व्यवस्था
15 दिन बाद दस्तक दे देगा मानसून, नगर पालिका के पास नहीं है कोई स्थायी समाधान
कई मोहल्लों में नाला के साथ ही गलियों का नहीं हो सका निर्माण, सालभर रहता है जलभराव
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। शहर के लाइनपार क्षेत्र के करीब 20 से 25 मोहल्ले इस बार भी जलभराव जैसी समस्या से जूझेंगे। हर साल की तरह इस साल भी नगर पालिका ने इन मोहल्लों में जलनिकासी के लिए कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया है। नतीजतन सालभर जलभराव की समस्या से जूझने वाली लाइनपार के मोहल्लों की 50 हजार से अधिक आबादी की समस्याएं इस बार भी कम होने वाली नहीं है। हालात यह हैं कि कुछ सड़कों पर पूरे साल पानी भरा रहता है, जबकि बारिश के मौसम में स्थिति और विकट हो जाती है।
लाइनपार क्षेत्र में विजयनगर-भरथना चौराहा मार्ग, अशोक नगर और पचावली सड़क पर सालभर जलभराव बना रहता है। पचावली सड़क पर लगभग 50 मीटर तक सड़क पर पानी भरा रहता है, जबकि अजीतनगर को जाने वाली सर्विस सड़क और यशोदा नगर में भी लोगों को इसी समस्या का सामना करना पड़ता है। बारिश के दौरान इन क्षेत्रों में डेढ़ से दो फीट तक पानी भर जाता है, जिससे आवागमन मुश्किल हो जाता है। घरों के गंदे पानी की निकासी नहीं होने से मोहल्लों में जलभराव और बढ़ जाता है।
इन मोहल्लों के लोगों को भी होती है परेशानी
जलनिकासी का उचित प्रबंध न होने से लाइनपार के मोहल्ला विजयनगर, शांति कॉलोनी, रामनगर, यशोदा नगर, दुर्गा नगर, यदुवंशी नगर, अजीतनगर, बंगाली कॉलोनी, तुलसी नगर, ऊसरा अड्डा, बगिया अड्डा, चौहान कॉलोनी, अड्डा गूलर, अड्डा श्यामलाल और शहरिया मोहल्ला समेत करीब 20 मोहल्लों के लोगों को आवाजाही में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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मैनपुरी अंडरपास में भी आठ फीट तक भर जाता पानी
शहर को मैनपुरी और सैफई से जोड़ने वाला अंडरपास भी जलभराव की बड़ी समस्या से ग्रस्त है। बारिश होने पर यहां छह से आठ फीट तक पानी भर जाता है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो जाता है। ऐसे में लोगों को सैफई और मैनपुरी जाने के लिए लगभग छह किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। विशेष रूप से आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई जाने वाले मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
नगर पालिका की ओर से अंडरपास में पानी निकालने के लिए मोटरें भी लगाई गई है, जिससे अस्थायी राहत मिलती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। तीन वर्ष पूर्व इस अंडरपास को टीनशैड से कवर करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था लेकिन समय बीतने के साथ ही वह भी ठंडे बस्ते में चला गया।
इन कारणों से होता है जलभराव
-इन मोहल्लों में जलनिकासी के लिए पर्याप्त क्षमता वाला बड़ा नाला नहीं है। इसके कारण घरों और गलियों का पानी मोहल्लों में ही भरा हो जाता है।
-एक ओर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएचएआई) और दूसरी ओर रेलवे लाइन होने से नए नालों के निर्माण या निकासी मार्ग विकसित करने में दिक्कत आती है। संबंधित विभागों से एनओसी नहीं मिलने के कारण परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पातीं।
-लाइनपार के कई हिस्से निचले स्तर पर हैं, जहां पानी भरा हो जाता है और उसके निकास की समुचित व्यवस्था नहीं है।
-बारिश के दौरान नालियों की क्षमता कम पड़ जाती है। घरों का गंदा पानी और वर्षा जल दोनों सड़कों पर भर जाते हैं।
लोगों ने बताई परेशानी
फोटो 08::रवींद्र सिंह तोमर।
स्थानीय रवींद्र सिंह तोमर ने बताया कि मोहल्ले में सालभर जलभराव की समस्या रहती है। कई बार नगर पालिका के अधिकारियों सहित एसडीएम को भी शिकायतें की जा चुकी है लेकिन नतीजा सिफर रहता है। कोई समाधान नहीं है बारिश के समय तो यह मोहल्ला टापू बन जाता है।
फोटो 09::धीरेंद्र।
स्थानीय धीरेंद्र ने बताया कि नगर पालिका के लिए लाइनपार मोहल्लों में जलनिकासी के लिए कोई स्थायी समाधान नहीं है। बिना बारिश के ही कई मोहल्लों में जलभराव की समस्या रहती है इससे राहगीरों सहित स्कूली बच्चों को परेशानी होती है। बारिश में स्थितियां और भी बदतर हो जाती है।
फोटो 05::लाइनपार मोहल्ले के मोहल्ला शांति कॉलोनी में कई गलियों में ऐसी है जलभराव की स्थिति। संवाद
फोटो 06:: सती मंदिर से अजीतनगर की ओर जाने वाले अंडरपास में भी रहती है जलभराव की स्थिति। संवाद
फोटो 07::इटावा-कानपुर नेशनल हाईवे की सर्विस सड़क पर कई जगह ऐसा रहता है जलभराव। संवाद
फोटो 08::रवींद्र सिंह तोमर।
फोटो 09::धीरेंद्र।
पड़ताल
इस बार भी जलभराव का दंश झेलेगी 50 हजार आबादी, न सड़कें दुरुस्त न जलनिकासी की व्यवस्था
15 दिन बाद दस्तक दे देगा मानसून, नगर पालिका के पास नहीं है कोई स्थायी समाधान
कई मोहल्लों में नाला के साथ ही गलियों का नहीं हो सका निर्माण, सालभर रहता है जलभराव
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। शहर के लाइनपार क्षेत्र के करीब 20 से 25 मोहल्ले इस बार भी जलभराव जैसी समस्या से जूझेंगे। हर साल की तरह इस साल भी नगर पालिका ने इन मोहल्लों में जलनिकासी के लिए कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया है। नतीजतन सालभर जलभराव की समस्या से जूझने वाली लाइनपार के मोहल्लों की 50 हजार से अधिक आबादी की समस्याएं इस बार भी कम होने वाली नहीं है। हालात यह हैं कि कुछ सड़कों पर पूरे साल पानी भरा रहता है, जबकि बारिश के मौसम में स्थिति और विकट हो जाती है।
लाइनपार क्षेत्र में विजयनगर-भरथना चौराहा मार्ग, अशोक नगर और पचावली सड़क पर सालभर जलभराव बना रहता है। पचावली सड़क पर लगभग 50 मीटर तक सड़क पर पानी भरा रहता है, जबकि अजीतनगर को जाने वाली सर्विस सड़क और यशोदा नगर में भी लोगों को इसी समस्या का सामना करना पड़ता है। बारिश के दौरान इन क्षेत्रों में डेढ़ से दो फीट तक पानी भर जाता है, जिससे आवागमन मुश्किल हो जाता है। घरों के गंदे पानी की निकासी नहीं होने से मोहल्लों में जलभराव और बढ़ जाता है।
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इन मोहल्लों के लोगों को भी होती है परेशानी
जलनिकासी का उचित प्रबंध न होने से लाइनपार के मोहल्ला विजयनगर, शांति कॉलोनी, रामनगर, यशोदा नगर, दुर्गा नगर, यदुवंशी नगर, अजीतनगर, बंगाली कॉलोनी, तुलसी नगर, ऊसरा अड्डा, बगिया अड्डा, चौहान कॉलोनी, अड्डा गूलर, अड्डा श्यामलाल और शहरिया मोहल्ला समेत करीब 20 मोहल्लों के लोगों को आवाजाही में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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मैनपुरी अंडरपास में भी आठ फीट तक भर जाता पानी
शहर को मैनपुरी और सैफई से जोड़ने वाला अंडरपास भी जलभराव की बड़ी समस्या से ग्रस्त है। बारिश होने पर यहां छह से आठ फीट तक पानी भर जाता है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो जाता है। ऐसे में लोगों को सैफई और मैनपुरी जाने के लिए लगभग छह किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। विशेष रूप से आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई जाने वाले मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
नगर पालिका की ओर से अंडरपास में पानी निकालने के लिए मोटरें भी लगाई गई है, जिससे अस्थायी राहत मिलती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। तीन वर्ष पूर्व इस अंडरपास को टीनशैड से कवर करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था लेकिन समय बीतने के साथ ही वह भी ठंडे बस्ते में चला गया।
इन कारणों से होता है जलभराव
-इन मोहल्लों में जलनिकासी के लिए पर्याप्त क्षमता वाला बड़ा नाला नहीं है। इसके कारण घरों और गलियों का पानी मोहल्लों में ही भरा हो जाता है।
-एक ओर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएचएआई) और दूसरी ओर रेलवे लाइन होने से नए नालों के निर्माण या निकासी मार्ग विकसित करने में दिक्कत आती है। संबंधित विभागों से एनओसी नहीं मिलने के कारण परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पातीं।
-लाइनपार के कई हिस्से निचले स्तर पर हैं, जहां पानी भरा हो जाता है और उसके निकास की समुचित व्यवस्था नहीं है।
-बारिश के दौरान नालियों की क्षमता कम पड़ जाती है। घरों का गंदा पानी और वर्षा जल दोनों सड़कों पर भर जाते हैं।
लोगों ने बताई परेशानी
फोटो 08::रवींद्र सिंह तोमर।
स्थानीय रवींद्र सिंह तोमर ने बताया कि मोहल्ले में सालभर जलभराव की समस्या रहती है। कई बार नगर पालिका के अधिकारियों सहित एसडीएम को भी शिकायतें की जा चुकी है लेकिन नतीजा सिफर रहता है। कोई समाधान नहीं है बारिश के समय तो यह मोहल्ला टापू बन जाता है।
फोटो 09::धीरेंद्र।
स्थानीय धीरेंद्र ने बताया कि नगर पालिका के लिए लाइनपार मोहल्लों में जलनिकासी के लिए कोई स्थायी समाधान नहीं है। बिना बारिश के ही कई मोहल्लों में जलभराव की समस्या रहती है इससे राहगीरों सहित स्कूली बच्चों को परेशानी होती है। बारिश में स्थितियां और भी बदतर हो जाती है।